न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

रांची : पंडरा में ट्रांसपोर्ट नगर बना तो आम जनता होगी परेशान, लोगों में सरकार के प्रति रोष

14

Manish Jha/News Wing

Ranchi, 12 December : अगर पंडरा में ट्रांसपोर्ट नगर बना तो रांची के लोगों को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा. क्योंकि ट्रांसपोर्ट नगर के निर्माण की वजह से लगभग 300 दुकान और 30 बड़े गोदाम सीधे तौर पर प्रभावित होंगे. रांची में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना पहले 2010 में बनी थी. नगर विकास विभाग ने आरआरडीए को कांके के सुकुरहुटु में 52 एकड़ सरकारी जमीन पर ट्रांसपोर्ट नगर बनाने का निर्देश दिया था और 14 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण होना था. लेकिन ऐसा नहीं हो सका और फिर स्थान बदलकर नामकुम का सरवल हुआ. लेकिन यहां भी 26 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण नहीं होने से मामला फंस गया. अब पंडरा में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की योजना हैं.

पंडरा में बनाया ट्रांसपोर्ट नगर तो सिकुड़ जाएगा शहर

पंडरा,अपर बाजार, हरमू, डेली मार्केट में हर दिन 500 से अधिक ट्रक की लोडिंग-अनलोडिंग की जाती है और इसमें लगातार बढ़ोत्तरी भी हो रही है. साथ ही अपर बाजार के व्यवसायी भी पंडरा से छोटे वाहनों के जरिए माल मंगायेंगे.तो ऐसे में पंडरा से रातू रोड सहित शहर के अन्य इलाकों में भी ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा. जिसे विस्तार की जगह शहर सिकुड़ता जायेगा.

इसे भी पढ़ें – क्या सरकार ने मोमेंटम झारखंड, सरकार के 1000 दिन व माइनिंग शो के दौरान निगम क्षेत्र में बिना अनुमति लगाए थे बैनर-पोस्टर

रांची के लोगों को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा – विशेषज्ञ

वहीं अर्बन डिजायनर रवि सिंह ने कहा कि मास्टर प्लान किसी भी शहर के विकास का संविधान है र उसका पालन करके ही सिस्टमेटिक डेवलपमेंट किया जा सकता है. सभी नई योजनायें और संरचनायें शहर के अंदर ही विकसित होंगी. जिससे स्थिती यह होगी कि सड़क पर चलना तो दूर लोगों को सांस लेना में दिक्कत आयेगी.जैसे कि आज स्थिति नई दिल्ली की है. इससे आगे उन्होंने कहा कि जहां तक जमीन अधिग्रहण का मामला है तो राज्य सरकार कहीं भी जमीन का अधिग्रहण कर सकती है. अगर लोगों को समझाया जाये और उचित कीमत दी जाये.

बाजार समिति में दुकान चलाने वाले मूलचन्द जैन का कहना है कि करीब तीस साल पहले उन्हें अपर बाजार से पंडरा में बसाया गया और अब सरकार यहां से भी उन्हें उजाड़ने की तैयारी कर रही है.

जबकि रांची चैम्बर ऑफ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्रीज के संजय कुमार मोहरी ने कहा कि यहां से बाजार हटने के कारण कैंपस में रोज कमाने खाने वाले मजदूर सड़क पर आ जाएंगे. लगभग 63 एकड़ के इस कैंपस से अनाज और सब्जी दूसरे प्रदेशों में जाता है।

क्या कहते हैं व्यवसायी

पंडरा बाजार समिति दुकान के मालिक संतोष सिंह ने कहा कि सरकार यह सोचकर इस इलाके को चुन रही होगी कि यह शहर के बाहर का इलाका है. लेकिन ट्रांसपोर्ट नगर बन जाने के बाद यहां के व्यवसायियों का क्या होगा. ये पता नही है.

 व्यवसायी उदय चौहान कहते हैं कि सरकार को इस इलाके में जमीन अधिग्रहण में दिक्कत नहीं होगी और बस एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रान्सफर करना होगा. इसलिए सरकार बाजार समिति पर फोकस कर रही है. हासांकि उन्होंने यह भी कहा कि ये सरासर गलत है और इससे भीड़ बढ़ जायेगी. जिससे आम जनता को काफी नुकसान होगा.

झारखंड चैंबर ने रिंग रोड के पास ट्रांसपोर्ट नगर बनाने की दी सलाह

झारखंड चैंबर ने पंडरा बाजार में ट्रांसपोर्ट नगर बनाये जाने को अनुचित बताया है. चैंबर के महासचिव कुणाल अजमानी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने चार-पांच साल पहले 105 एकड़ भूमि पर ट्रांसपोर्ट नगर बसाने की योजना बनायी थी. लेकिन किसी कारणवश यह काम नहीं हो सका. राजधानी में ट्रांसपोर्ट नगर जरूरी है, लेकिन यह 35 एकड़ में नहीं होगा. पंडरा बाजार में ट्रांसपोर्ट नगर बनाना कहीं से भी उचित नहीं है. रातू रोड, पंडरा और पिस्का मोड़ व्यस्त इलाका है. ट्रांसपोर्ट नगर बन जाने से यातायात की समस्या और भयावह हो जायेगी. साथ ही कुणाल ने कहा कि सरकार ट्रांसपोर्ट नगर को रिंग रोड में बसाने पर विचार करे. पंडरा बाजार में रोजाना करोड़ों का व्यापार होता है और ऐसे में व्यापार को अधिकारियों की सलाह पर क्यों उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है. बसे-बसाये व्यापारियों को उजाड़ना कहीं से भी उचित नहीं है. अधिकारी मुख्यमंत्री को क्या फीडबैक दे रहे हैं, यह भी चिंतनीय है. 

इसे भी पढ़ें – संथाल के लिए जहर है कि प्यार है तेरा चुम्मा, बीजेपी ने पूछा जेएमएम से

रांची गुडस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा :  ट्रांसपोर्ट नगर बसाये जाने के लिए 35 एकड़ भूमि बहुत कम है. राजधानी होने के कारण लगभग सभी कंपनियों के डिपो हैं. माल को गोदाम से लाने और ट्रकों में लादने के लिए कम से कम 40,000 स्क्वायर फीट जगह चाहिए. इसी प्रकार ट्रांसपोर्ट कार्यालय के लिए 50,000 स्क्वायर फीट जमीन चाहिए. एक हजार  मालवाहक, पांच सौ लघु भार वाहन, पांच सौ टेंपो, दो सौ रिक्शा, ठेला खड़े होने की जगह की भी आवश्यकता होगी.

 वहीं पंडरा बाजार के व्यापारी प्रवीण जैन छाबड़ा ने कहा कि पंडरा बाजार में ट्रांसपोर्ट नगर बनाये जाने की योजना पूरी तरह से अव्यावहारिक है.

इसे भी पढ़ें – शीतकालीन सत्र ऐसा जैसे शराब और चुंबन प्रतियोगिता के अलावा झारखंड में कोई मुद्दा ही ना हो

झारखंड जनशक्ति मजदूर युनियन पंडरा (अध्यक्ष) : ललित ओझा ने कहा कि जान दे देंगे लेकिन पंडरा बाजार समिति को टूटने नही देंगें. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से अव्यवहारिक है. उन्होंने कहा कि शहर सरकार की इच्छा से नहीं परिकल्पना से चलता है. यहां दुकानदार से लेकर टेंम्पो चालक, मोटिया, महिला मजदूर सब सड़क पर आ जायेंगें. 

रांची मालवाहक टेंम्पो चालक संघ के दिनेश चौबे बताते हैं कि हमलोग जैसे चालकों को बाजार समिति से उजाड़ने का सरकार प्रयास कर रही है. लेकिन हमलोग कदापि नहीं होंगें.

आलु, प्याज थोक विक्रेता संघ : (अध्यक्ष)  राम लखन प्रसाद का कहना है कि बीस साल से हमलोग बाजार समिति में दुकानदारी कर रहे हैं. अगर हमारी दुकान को तोड़ा जाता है तो सड़क पर आने के सिवा कुछ नहीं बचेगा.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: