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रांची :डुंडीगढ़ा प्राथामिक स्वास्थय केंद्र खुद है बीमार, डॉक्टर, एएनएम रहते हैं सिर्फ तीन घंटे, मरीज हैं भगवान भरोसे

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Md. Asghar Khan/ Saurav Shukla

News Wing Ranchi, 27 November: राजधानी रांची से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नामकुम प्रखंड के डुंडीगढ़ा हजाम रायडीह गांव के ग्रामीण चिकित्सा सुविधा के नाम पर बने अस्पताल से बेहाल हैं. रात-बेरात ही नहीं, दोपहर में भी अस्तपाल रहते हुए गांव वालों को इलाज के लिए हटिया, तुपुदाना या रांची ही जाना पड़ता है, क्योंकि इस गांव में स्थित अतिरिक्त प्राथामिक स्वास्थय केंद्र प्रतिदिन महज तीन घंटा ही खुलता है. वहीं चिकित्सा सुविधा के नाम पर यहां मात्र एक डॉक्टर और एक ही एएनएम से काम चलाया जा रहा है. यह दोनों स्टाफ भी दो-ढाई बजे तक अस्पताल में ताला जड़ निकल लेते हैं. अस्पताल की इस बदहाली को देख मालूम होता है कि सरकारी चिकित्सालयों के नियमानुसार 24×7 सार्विस कागज तक ही सीमित है. बता दें कि यह अस्पताल नामकुम प्रखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र(पीएचसी) के अंतर्गत आता है.

बेड, बिल्डिंग, बिजली-पानी तक नहीं

अस्पताल की अपनी बिल्डिंग भी नहीं है. जिसमें अस्पताल संचालित हो रहा है, उसकी भी हालत भी जर्जर है. बरसात के दिनों में बारिश का पानी भवन की छत से टपकता है. हॉस्पिटल में मरीजों के लिए मात्र तीन ही बेड की व्यवस्था है, जिसमें जंग लग चुका है. बिजली-पानी से भी अस्पताल वंचित है. अस्पातल में कार्यरत दो डॉक्टर और दो एएनएम की संख्या को घटाकर एक-एक कर दी गई है.

1.45 बजे आईं चिकित्सक प्रभारी, 2.40 बजे चली गईं

न्यूजविंग की टीम जब डुंडीगढ़ा के इस स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल करने पहुंची, तो दोपहर के 1.40 बजे अस्पताल में डॉक्टर नहीं पहुंचे थे. दो घंटे से मरीज इंतजार कर रहे थें, जिन्हें केंद्र पर मौजूद एएनएम, जल्द ही डॉक्टर के आ जाने का आश्वासन दे रही थीं. लगभग 1.45 में अस्पताल की चिकित्सा प्रभारी रेखा कुमारी आईं. जब न्यूजविंग के सवांददाता ने विलंब से आने के विषय में पूछा, तो जवाब मिला कि गाड़ी खराब हो गई थी, जिसकी वजह से लेट हो गया. ऐसे समय पर आती हूं. इनके समय का अंदाजा तब और अच्छे से लगाया जा सकता है जब डॉक्टर रेखा कुमारी विलंब से अस्पताल पहुंचने के बावजूद 55 मिनट के भीतर ही ड्यूटी पूरी कर निकल गईं. एक बार फिर जब न्यूजविंग के रिपोर्टर ने पूछाः मैडम आप इतनी जल्दी जा रही हैं. तब उनका जवाब था कि क्या करें, मरीज ही नहीं है. इसके बाद 2.45 तक स्वास्थ्य केंद्र पर ताला भी लटक चुका था.

इस दौरान डॉ रेखा कुमारी से अस्पताल की सुविधाओं के बारे में बात करने पर कहती हैं कि अस्पातल में कोई व्यवस्था नहीं है. सिर्फ दो ही स्टाफ यह स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं. यहां मरीजों के लिए ना बेड है ना बिजली-पानी. बिल्डिंग भी जर्जर स्थिति में है. डॉ रेखा ने कहा कि अस्पताल की सफाई तक मुझे अपने पैसों से करवानी पड़ती है. उन्होंने बताया कि कई बार इस बाबत नामकुम पीएचसी को शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है.

ग्रामीण कहते हैंः हफ्ते में तीन दिन ही डॉक्टर बैठते हैं

90 घरों के इस डुंडीगढ़ा गांव में लगभग हजार की संख्या में आबादी बताई जाती है. चिकित्सा सुविधा के संदर्भ में बात करने पर स्थानीय लोग काफी अक्रोशित हो गए. कहते हैं कि गांव में महज नाम का ही अस्पताल है. बुजुर्ग तेतरी देवी से अस्पताल की सुविधाओं की बारे में पूछते ही कहा कि हमारा इलाज करवा दीजिए. रिपोर्टर ने जब उनसे कहा कि मां जी यहां अस्पताल है वहीं की सुविधा के बारें में पूछ रहे हैं, तब उन्होंने कहा कि वो तो अक्सर ही बंद रहता है. वहीं गांव के सरफराज कहते हैं कि 12 बजे डॉक्टर आते हैं, फिर जब मन करता है चले जाते हैं. हफ्ते में तीन दिन ही इस अस्पताल में डॉक्टर बैठते हैं, वो भी दो-तीन घंटे के लिए. ग्रामीणों को छोटी-बड़ी किसी भी बीमारी के इलाज के लिए या तो हाटिया-तुपुदाना या फिर रांची जाना पड़ता है. अजय कुमार कहते हैं कि अस्पताल में कोई भी सुविधा नहीं है. भर्ती होने के लिए बेड तक नहीं है. कभी-कभार दिखाने जाते हैं तो दवा बाहर से लिख दी जाती है, जबकि फिरोज अंसारी के मुताबिक इलाज के लिए लोगों को काफी दिक्कत होती है. वो कहते हैं कि पांच साल से यह अस्पताल नाम के लिए ही बना हुआ है. जब भी इलाज के लिए जाते हैं तो बंद रहता है. स्थानीय निवासी उमर ने कहा कि आज तक यहां किसी भी मरीज को पानी तक नहीं चढा है. इस अस्पताल के भरोसे रहें तो जान ही चली जायेगी. हुस्ना खातुन बताती हैं कि बीपी नापने वाली मशीन भी अस्पताल में नहीं है. अस्पताल में कोई व्यवस्था ही नहीं कि महिलाओं का यहां प्रसव कराया जा सके. इसलिए सभी को रांची ही जाना पड़ता है. जेरका भोक्ता, महावी महतो ने भी यही बात बताई.

राज्य में चिकित्सकों का है अभावः सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉक्टर एसएस हरिजन ने इस बाबत कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग बनाने की तैयारी चल रही है. जहां तक मुझे जानकारी है विभागीय स्तर पर फैसला कर लिया गया है. भवन निर्माण का कार्य जल्द ही शुरु कर लिया जायेगा, वहीं चिकित्सक के विलंब से पहुंचने पर कहा कि हर रोज डॉक्टरों को जाना जरुरी है. यादि विलंब या स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं जाती हैं तो कार्रवाई होगी. उन्होंने कहा कि यह समस्या इसलिए भी है कि क्योंकि पूरे राज्य में चिकित्सकों की भारी कमी है.

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