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रांचीः आदिवासी संगठनों ने वनवासी कल्याण केंद्र पर लगाया आदिवासियों की पहचान मिटाने का आरोप

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News Wing Ranchi, 01 December: आदिवासी महासभा एवं आदिवासी संगठनों की शुक्रवार को हुई एक संयुक्त बैठक में 16 फरवरी को वनवासी कल्याण केंद्र का घेराव करने के तय कार्यक्रम की अंतिम रणनीति बनी. बैठक में वक्ताओं ने कहा की 2011 की जनगणना में पूरे देश के पचास हजार आदिवासियों ने खुद को हिंदू न कहकर अपने धर्म का नाम सरना लिखवाया है, जबकि वनवासी कल्याण के प्रमुख कार्यकर्ता जेठा नाग एवं अखिल भारतीय सह संयोजक जनजाति सुरक्षा के डॉ. राज किशोर हांसदा का यह कहना कि सरना धर्म मानने वाले हिंदू है. वक्ताओं ने कहा कि यह 50 लाख आदिवासियों का घोर अपमान है, जबकि झारखंड धर्म स्वतंत्र विधेयक 2017 में भी सरना धर्म मानने वाले के लिए उनके विश्वास, परंपराओं, आस्था के रूप में धारा 2 च में अलग से दर्शाया गया है.

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आदिवासियों की पहचान और संस्कृति पर हमले नहीं किये जायेंगे बर्दाश्त

प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड के राज्यपाल,  मुख्यमंत्री, गृह सचिव,  पुलिस अधीक्षक से अपील की गई है कि सरना धर्म अनुयायियों को अपमानित करने वालों पर  भारतीय दंड संहिता अधिनियम के तहत कार्रवाई कि जाये. कहा कि वनवासी कल्याण केंद्र की आड़ में आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों द्वारा आदिवासियों की पहचान एवं संस्कृति पर किए जा रहे हमले को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. सर्वसमति से 16 दिसंबर को बरियातू वनवासी कल्याण संस्था का घेराव किया जाएगा.

बैठक में ये थे मौजूद

बैठक की अध्यक्षता देव कुमार धान ने की. बैठक में आदिवासी सरना महासभा, जय आदिवासी महासभा, आदिवासी जनपरिषद, राजी पड़हा प्रार्थना सभा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रतिनिधि शामिल हुए. इसके अलावा छेदी मुंडा, बुधवा उरांव,  सुरेंद्र, क्रांति मुंडा, संगीता उंराव और  अनिल भगत भी बैठक में मौजूद थे.

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