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रघुवर दास : सदन को मजाक बना कर रखा है विपक्ष ने, मजाक तो आपने बना कर रखा है पूरे राज्य का : हेमंत सोरेन

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Ranchi : तीन बजे जब तीसरी बार सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष ने स्पीकर के सदन में आते ही हंगामा शुरू कर दिया. विपक्ष बार-बार भूमि अधिग्रहण बिल और स्थानीय नीति को लेकर नारेबाजी कर रहा था. स्पीकर ने विपक्ष को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन विपक्ष नहीं माना. हंगामा जोर पकड़ने लगा. विधायक बीरंची नारायण ने उठ कर कहा कि विपक्ष सदन को नहीं चलने देना चाहता है. कहा- नेता प्रतिपक्ष को विपक्ष के विधायकों पर कोई जोर ही नहीं है. विधायक उनकी बात नहीं सुनते. 

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नेता सदन vs नेता प्रतिपक्ष 

इसी हंगामे के बीच सीएम रघुवर दास उठकर खड़े हुए और स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसा सदन में होना ठीक नहीं है. आखिर क्यों विपक्ष सदन को चलने नहीं देता. विपक्ष ने सदन का मजाक बना कर रखा है. ये बात सुनते ही नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को जवाब दिया. कहा- अरे मजाक तो आपने बना रखा है पूरे राज्य का. खुले आम मर्डर हो रहा है. नक्सली बता कर आम जनता को गोली मारी जा रही है. लोग सड़क पर आंदोलन कर रहे हैं तो उन्हें जेल में डाल दिया जा रहा है. पूरे देश में राज्य को हंसी का पात्र बना दिया है. इतना बोलना था कि हंगामा शुरू हो गया. बीजेपी और विपक्ष के विधायकों की बयानबाजी शुरू हो गयी. 

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मैं क्या कहूं अब तो धीरे-धीरे सरकार की खुद ही परत खुल रही हैः हेमंत सोरेन 

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेने ने कहा कि शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक प्रवर समिति को कैसे गया, इस पर मैं क्या कहूं. अब धीरे-धीरे सरकार की परतें खुल रही हैं. अब तो ये भी बोलना बेकार है कि सीएम इस्तीफा दें. सीएम रघुवर दास व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. जनता की भावना के साथ खिलवाड़ हो रहा है. सरकार घिर चुकी है. अपने ही विधेयक में सरकार अपने ही लोगों से फंस रही है. विपक्ष सभी मुद्दों को लेकर मुखर होगी. सीएम विपक्ष से शालीनता की बात करते हैं. जबकि उनका खुद का सिस्टम फेल है. मुखिया का नियंत्रण खो चुका है. उन्हें पता नहीं कि हर चीज पैसे से मैनेज नहीं होता. पहचान विज्ञापन से नहीं बनती. शख्सियत बनाने में काफी कुछ लगता है. वो असम में झारखंड के आदिवसियों का भला करने की बात करते हैं. उनसे झारखंड के तो आदिवासी संभल नहीं रहे हैं. पहले झारखंड के आदिवासियों का भला करें. उसके बाद दूसरे राज्य में जाकर भलाई का काम करें.  

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सीएम दबाव दे रहे थे, लेकिन विधायक सीएम का साथ नही दे रहे थेः प्रदीप यादव

सदन की तीसरी दिन की कार्यवाही खत्म होने के बाद सदन के बाहर विधायक प्रदीप यादव ने मीडिया के सामने कहा- शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक प्रवर समिति में बीजेपी विधायकों की वजह से गया. विधायक चाहते थे कि जिला समिति में वो भी सदस्य हों. लेकिन सीएम नहीं चाहते थे. सीएम ने विधायकों पर दबाव बनाने की भी कोशिश की. लेकिन विधायकों ने सीएम की एक नहीं सुनी. बीजेपी विधायक सीएम का विश्वास खो चुके हैं. सीएम को इस बात को गंभीरता से लेनी चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए.  

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विपक्ष की शोर की वजह से ऐसा हुआः नीरा यादव 

शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक प्रवर समिति में जाने की वजह विपक्ष का शोर था. शोर की वजह से विधायकों को बात समझने में शायद चूक हुई हो. कहा कि विधायकों को जिला समिति में सदस्य इस वजह से नहीं रखा गया था क्योंकि एक जिले में कई स्कूल होते हैं. कहां-कहां के फैसलों में वो शामिल होते रहेंगे. कहा- ये मामला काफी गंभीर है. बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ है. 

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सबकुछ अधिकारियों पर तो नहीं छोड़ा जा सकताः बादल पत्रलेख

कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख जिनकी वजह से शिक्षा न्यायाधिकार (संशोधन) विधेयक प्रवर समिति को चला गया उन्होंने कहा कि ये मामला वाकई गंभीर है. बच्चों और अभिभावकों से जुड़ा हुआ है. मैंने किसी की नहीं बल्कि अपने दिल की सुनी और संशोधन प्रस्ताव सदन में रखा. मैं तो अभी सीखने की उम्र में हूं. यहां सभी सीनियरों से सीख रहा हूं. लेकिन इतना समझता हूं कि सारी चीजें अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती. इसलिए मैंने जिला समिति में विधायकों को भी सदस्य रखने की मांग की.

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