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योजनाओं के नाम पर सरकार के खोखले वादे, घोषणाएं बड़ी-बड़ी, हकीकत जीरो

Kumar Gaurav

Ranchi : सरकार ने गरीबों के कल्याण के लिए कई बड़ी-बड़ी योजनाओं को लाने का वादा किया था. मुख्यमंत्री ने जब इन योजनाओं की घोषणाएं की थी या इनकी लांचिंग हुई थी तब गरीबों को लगा था कि कुछ दिन में एक डाकिया आएगा और घर पर एक बोरा चावल पहुंचा जाएगा. बेबस गरीब विधवाओं को ये लगने लगा कि कुछ दिन में उनका अपना एक छत होगा. ग्रामीण युवाओं को खेती के माध्यम से लाखों कमाने का एक सुनहरा ख्वाब दिखने लगा. पर जैसे-जैसे दिन बीतते गए, सरकार के दिखाये गये सारे सपने गरीबों के आंखों से ओझल हो गये. सरकार अगर अपनी इन योजनाओं को सही तरीके से धरातल पर उतार देती तो गरीबों का कल्याण हो जाता. पर ये योजनाएं सरकारी फाइलों में ही अटकी रह गयी.

क्या थीं योजनाएं

सरकार की जिन योजनाओं के बारे में बात किया जा रहा है वे हैं- पीजीटी डाकिया योजना, जिसके तहत गरीबों को हर महीने 35 किलो चावल घर-घर जाकर मुहैया करवानी थी. युवाओं के लिए आर्य योजना की बात की गयी थी. जिसके तहत ग्रामीण युवाओं को खेती की ओर आर्किर्षत करने की प्लानिंग थी. भीमराव अंबेदकर आवास योजना में विधवाओं को घर देने की बात की गयी थी. साथ ही बाल गरीब समृद्धि योजना लाने की सरकार ने तैयारी कर ली थी, जिसका प्रवासी और सताये गये लोगों को सीधा लाभ मिलता.

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पीजीटी डाकिया योजना से मिलता 70 हजार आदिवासी परिवारों को लाभ

इस योजना की लांचिंग अप्रैल में मुख्यमंत्री ने कर दी थी. इस योजना के तहत हर महीने 35 किलो चावल गरीबों को डाकिया के जरीए घर-घर जाकर पहुंचाना था. इस योजना को फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट के जरीये क्रियान्वित किया जाना था. योजना को गोडडा, साहिबगंज और पलामू के लिए फार्मली लांच भी किया जा चुका था. इस योजना से करीब 70 हजार आदिवासी परिवारों को लाभ मिलता. राज्य के हरेक जिलों में करीब 5 हजार परिवार हैं, पर इन तीन जिलों में इसकी संख्या 7 हजार है.

आर्य योजना के तहत युवाओं को खेती के लिए करना था आकर्षित

आर्य योजना को लाने की प्लानिंग जून 2016 में ही हो चुकी थी. इस योजना के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को खेती की ओर आकर्षित करना था. इस योजना के तहत प्रत्येक गांव से दो युवाओं को आत्मा एनजीओ दवारा खेती के विभिन्न आयामों की जानकारी दी जाती और सही तरीके से खेती की भी ट्रेनिंग दी जाती. इसका प्रमुख उद्देष्य खेती को गांवों में बढ़ावा देना और ग्रामिणों को केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना का लाभ लेने को प्रेरित करने के साथ-साथ गांवों में किसान ग्रुप बनाने की बात थी.

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विधवाओं के लिए भीमराव अंबेदकर आवास योजना

भीमराव अंबेदकर आवास योजना को लाने की घोषणा डॉ बीआर अंबेदकर के 125वीं जन्मतिथि के अवसर पर की गयी थी. इसके तहत राज्य सरकार विधवाओं के लिए आवास बनवाने की योजना लायी गयी है. सरकार ने इसके लिए 80 करोड़ की बजट तैयार किया है. 11 हजार विधवाओं को घर का लाभ मिलना था. पहाड़ी इलाकों में रहने वालों को 75 हजार रुपये और और समतल इलाकों के लिए 70 हजार रुपये आवांटित की जाएगी. पैसे तीन चरणों में सीधा लाभुकों के खातों में पहुंचना था.

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बाल गरीब समृद्धि योजना

फरवरी में इस योजना को लाने की तैयारी की गयी थी. झारखंड के बच्चों को कुपोषण से बचाने और उनके लिए कल्याण की रक्षा के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य में बाल गरीब समृद्धि योजना का उद्घाटन किया था. यह योजना मूल रूप से बच्चों के लिए एक कल्याणकारी योजना है, जो कि लक्षित हितग्राहियों के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करती है. जो गरीब हैं और जो भी समाज के शक्तिशाली लोगों द्वारा दलित या बीमारी का सामना करते हैं. इस योजना के तहत झारखंड सरकार देवघर में बाल सुधार गृह का निर्माण कर रही है. जो कि 23 करोड़ की लागत से बनने वाला है. इससे बच्चों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करके समाज का बेहतर व्यक्ति बनाने में मदद होती.

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