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यूपी में हार के बाद योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली तलब, बीजेपी करेगी हार पर मंथन

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News wing Desk :  यूपी में दो सीटों पर हुए लोकसभा उपचुनावों में बीजेपी की भारी फजीहत के बाद अब बीजेपी ने हार पर मंथन की कवायद शुरू कर दी है. सीएम योगी आदित्यनाथ की संसदीय सीट गोरखपुर और डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की करारी हार पर शनिवार शाम को दिल्ली में मंथन होना है, जिसके लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य को दिल्ली तलब किया है. शाम पांच बजे तीनों नेताओं की बैठक होगी. इस बैठक में 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मिली इस करारी हार के सूक्ष्म कारणों की पड़ताल और समीक्षा की जाएगी.

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सियासी चुनौती की काट निकालने पर होगा मंथन

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सपा और बसपा के गठजोड़ से उभरी सियासी चुनौती की काट निकालने के लिए पार्टी की रणनीति पर भी चर्चा हो सकती है. उपचुनाव में मिली हार के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हमने अतिआत्मविश्वास दिखाया इसलिए हमारी हार हुई. योगी ने कहा कि समय से गिरे हैं, संभलेंगे और 2019 का लोकसभा चुनाव जीतकर दिखाएंगे. 

प्रशासनिक अधिकारियों पर फोड़ा ठीकरा

उपचुनाव में अप्रत्याशित हार की हैरानी से उबरते हुए योगी सरकार ने सरकार के कामकाज की गहन समीक्षा शुरू कर दी है. इसी के तहत मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को 37 अधिकारियों के तबादले कर दिए. कुछ विभागों के मंत्रियों और अफसरों की कार्यशैली से नाराज हैं. सीएम ने जब हार को लेकर समीक्षा की तो उन्हें पता चला था कि कुछ विभागों के अफसर मनमानी कर रहे हैं. खनन, बेसिक शिक्षा विभाग में काम नहीं हो रहे जबकि आयोगों में भर्ती तक शुरू नहीं हो सकी है. इसके बाद उन्होंने कुछ अफसरों को तलब कर उन्हें फटकार के साथ काम में सुधार लाने की ताकीद भी की. 

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मंत्रिमंडल में भी हो सकता है बदलाव

कयास ये भी लगाया जा रहा है कि राज्य के मंत्रिमंडल में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. सीएम को यह भी पता चला है कि कुछ विभागों के मंत्री जनता से जुड़े नहीं हैं. विभागों में मंत्रियों का मनमाना रवैया है. जिसको लेकर योगी आदित्यनाथ संगठन में अपनी बात रख रखेंगे. इसके बाद कुछ मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं. कुछ मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है. वहीं बैठक में यूपी में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों की ओर से जो नये समीकरण बन रहे हैं, उसका एंटीडॉट तलाशने पर पार्टी आलाकमान का जोर रहेगा. 

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