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यूनिटी देश की अखंडता के लिए है या फिर सरकार विशेष समुदाय के लोगों को एकजुट कर रही है

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Sanjeevani

Ranchi, 31 October : मंगलवार को देशभर में रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम के तहत लोगों ने देश की अंखडता पर एकमत होकर राष्ट्रविरोधी ताकतों के खिलाफ खड़े होने की कसम खाई. देश की अखंडता और संप्रभुता पर अपनी जान न्यौछवर करने की प्रतिबद्धा दिखायी. उन्होंने लौह पुरुष सरदार पटेल की 142वें जयंती पर एकता के सूत्रधार को याद किया. झारखंड की राजधानी रांची में भी इसका रंग खूब दिखा. मुख्यमंत्री रघुवर दास संग आयोजित रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम में मंत्री, वरीय प्रशासनिक अधिकारी समेत भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. इस मौके पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ. लोगों में पाकिस्तान, चीन खिलाफ आक्रोश और देश के लिए  मर-मिटने वाला जज्बा दिखा. लेकिन इस दौड़ के दौरान धार्मिक श्लोक को बजाया जाना लोगों को नागवार (नपसंद) गुजर रहा है. इस पर विभिन्न समुदाय के लोगों ने एक बहस ही छेड़ दी है. लोगों का कहना है कि यूनिटी देश की अखंडता के लिए है या फिर सरकार किसी विशेष समुदाय के लोगों एकजुट कर रही है, जैसे सवाल खड़े होने लगे हैं.

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क्या कहते हैं लोग

किरपाल सिंह

मेनरोड स्थित गुरुद्वारा समिति के महासिचव किरपाल सिंह ने कहा कि रैली देश की अखंडता के लिए थी, ना कि किसी समुदाय की. इस तरह के सरकारी आयोजन में धार्मिक श्लोक बजाना गलत है. हम इसका विरोध करते हैं. हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी लोग देश की अखंडता पर एक मत है. इसलिए ऐसे कार्यक्रम से धार्मिक श्लोक को दूर रखना चाहिए.

 

डॉ गुलफाम मुजीबी, समाजिक कार्यकार्ता ने कहा कि रन फॉर यूनिटी एक आम कार्यक्रम है और इसमें सभी समुदाय के लोगों में यूनिटी होनी चाहिए. इसमें धार्मिक श्लोक बजाकर दर्शाया है कि भाजपा में भय है कि उसका दलित हिंदू और आदिवासी वोट खिसक रहा. यह निंदनीय है.

विनोद कुमार पांडेय, झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि महापुरूषों की पुण्यतिथि को भी जाती धर्म के नाम पर बांटकर राजनीतिक लाभ लिया जा रहा है. जनता को विचार करना चाहिए कि हमारे देश को किस दिशा में ले जाया जा रहा है. महापुरुषों को किसी पार्टी, जाति और धर्म से बांधना दुर्भाग्यपूर्ण है. केंद्र और राज्य दोनों ही सरकार जाती धर्म के नाम पर लोगों को बांट रही है. जनता से आग्रह है बंटे नहीं, देश के विकास के लिए सोचे और अपना योगदान दें. राज्य सरकार से भी आग्रह है कि लोग धर्म-जाती के नाम पर न बांटे, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे.

प्रदीप यादव, जेवीएमः महापुरुषों का राजनीतिकरण किया जा रहा है. इससे देश की अखंडता और संप्रभुता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और एकता कमजोर होगी. इस तरह के कार्यों से सभी धर्मों के समावेश वाली भारत की परंपरा-पहचान पर कहीं न कहीं प्रश्न चिन्ह और काला धब्बा लगेगा. सरकार और भारतीय जनता पार्टी को इससे बचना चाहिए, वरना जनता इसपर विचार करेगी.

आभा सिन्हा, कांग्रेसः एकता दौड़ में धार्मिक भजन, कृतन नहीं होना चाहिए. इन्होंने ऐसा कर साबित कर दिया है कि मुंह में राम और बगल में छुरी है. इसका विरोध करना चाहिए.

छात्र सतीशः रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम में संस्कृत मंत्रोच्चार का होना देश की अखंडता के लिए सही नहीं है. जब हम एकता की बात करते हैं तब वैसे समय में किसी भी समुदाय से इसे जोड़ना सही नहीं है. हम सभी भारतवासी हैं और इससे पहले  एक इंसान है. इंसानियत से बढ़कर इस दुनिया में कुछ भी नहीं है. जब एकता की बात होती है तब जात, पात, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर लोगों को आगे आने की जरूरत है.

रतन तिर्की, जनजतीय परार्मश दात्री परिषदः लौह पुरुष की व्याख्या इतिहास में स्वतंत्रता सेनानी के रूप में होती है. ऐसी रैली या दौड़ में देशभक्ति गीत बजते या गाए जाते तो अच्छा होता है. देश भक्ति गितों से बना है, भजन-कृतन से नहीं. धर्म बाद में, कर्म पहले है. रन फॉर यूनिटी में धर्म से कोई मतलब नहीं है. अनेकता में एकता बात होनी चाहिए. भगवान पर आस्था होनी चाहिए, लेकिन देश के मामलों को इससे अलग रखना चाहिए. देश की तरक्की आजान या घंटा बजाकर नहीं होने वाली है. ऐसा कतई नहीं होनी चाहिए.

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