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मोदी सर ने डूबती नैया को बचाने हेतु गुजरात में खेला अस्मिता का कार्ड

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मनोज कुमार

गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो गया. दोनों राज्यों में बीजेपी की सरकार बनना तय. जहां हिमाचल प्रदेश में बीजेपी ने कांग्रेस से सत्ता छीन ली, वहीं गुजरात में बीजेपी अपनी सत्ता को बरकरार रखने में छठी बार कामयाब रही. यूं तो हिमाचल में प्रारम्भ से ही प्रत्येक पांच  वर्षों पर सत्ता में बदलाव होता रहता है. हां, आश्चर्य यह रहा कि बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए. निवर्तमान मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह भले स्वयं और अपने पुत्र को चुनाव जितवाने में सफल रहे पर इनपर भ्रष्टाचार के लगे आरोप को मुद्दा बना कर चुनाव में बीजेपी ने 68 में 44 सीट निकाल ली. कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने भी यहां बहुत मेहनत नहीं की और मन ही मन हार मान चुकी थी. सही अर्थों में चुनाव गुजरात में हुए. यहां राहुल गाँधी ने खूब परिश्रम किया और हार्दिक, अल्पेश, जिग्नेश को साथ लेकर मजबूत जातीय समीकरण बनाने में सफल रहे . साथ ही हिंदुत्व की छवि गढ़ने हेतु मन्दिर-मन्दिर परिक्रमा भी करते रहे. भले तमाम एक्जिट पोल बीजेपी को विजेता बताया था पर लोगों में एक कौतुहल रिजल्ट को लेकर था.

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मोदी के अंतिम हथियार कारगर व सफल हुए

कांग्रेस को भी उम्मीद थी कि वहीं बीजेपी डरी हुयी थी. पर अंततः बीजेपी 99 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर ली और कांग्रेस को 80 पर ही सन्तोष करना पड़ा. बीजेपी की जीत उसकी मजबूत संगठन की जीत है. हां मोदी सर डूबती नैया को बचाने हेतु जो गुजरात अस्मिता का कार्ड खेले. वह पूर्णतः सफल रहा. ध्यातब्य है कि यहीं कांग्रेस चूक गयी. साथ ही साथ मोदी सर के यह अंतिम हथियार कारगर व सफल हुए. इसमें मणिशंकर अय्यर की गैरजरूरी और अमर्यादित टिप्पणी तथा कपिल सिब्बल का उच्चत्तम न्यायालय में अयोध्या प्रकरण में बहस कैटलिस्ट का काम किया.

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स्वाभाविक है कि गुजराती अवाम को मोदी सर और राहुल में चुनाव करना पड़ा और वे मोदी सर को ही चुने. मोदी सर भारत के लोकप्रिय पीएम हैं और गांधी, पटेल के बाद सबसे बड़े गुजराती हैं. हां राहुल की भूमिका में कांग्रेस के लिए एक आशा देखने को मिली. यह कांग्रेस को अहसास हुआ कि मोदी सर अपराजेय नही हैं. ऐसे तो बीजेपी दिल्ली, बिहार और पंजाब में भी हारी पर हराने का श्रेय केजरीवाल, लालू, नीतीश और कैप्टन अमरेंद्र को मिला था. हां अबकी चुनाव मोदी सर और राहुल के बीच था जिसमें राहुल मोदी सर को सशक्त चुनौती देने में कामयाब रहे. खैर गुजरात को एक बहुमत की सरकार और एक मजबूत विपक्ष मिला.

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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