न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

मोदी सरकार की सोच केवल दीनदयाल तक सीमित, शिक्षा की हो रही अनदेखी : कपिल सिब्बल

101

New Delhi : सरकार पर लगातार आरोप लगाकर चर्चा में रहने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार पर स्कूली शिक्षा का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार का ध्यान सिर्फ पुस्तक बदलने, इतिहास बदलने की कवायद तक सीमित है और पिछले चार वर्षों में उसने स्कूली शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की सोच नहीं दिखायी. शिक्षा का अधिकार कानून के लागू होने के आठ वर्ष पूरे होने पर पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने ‘‘भाषा’’ से खास बातचीत में कहा कि इस सरकार का ध्यान स्कूली पाठ्य पुस्तक में पंडित नेहरू के स्थान पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय को लाने तक सीमित है. स्कूली शिक्षा का राजनीतिकरण कर रहे हैं. इस सोच के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को कैसे बेहतर किया जा सकता है ?

mi banner add

इसे भी पढ़ें – कपिल सिब्बल पर कौड़ियों के दाम में करोड़ों की जमीन खरीदने का स्मृति ईरानी ने लगाये आरोप

पूरे विश्व में स्कूली शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही, मगर वर्तमान सरकार शिक्षा की कर रही अनदेखी

सिब्बल ने कहा कि जब पूरे विश्व में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में केंद्र की वर्तमान सरकार ने पिछले चार साल में इस बारे में कुछ नहीं सोचा जो दुखद है. उल्लेखनीय है कि छह से 14 वर्ष के बच्चों के लिये अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा का अधिकार कानून एक अप्रैल 2010 से अमल में आया था. संप्रग सरकार में अपने कार्यकाल के दौरान आकाशटैबलेट परियोजना का जिक्र करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि देश के दूर दराज क्षेत्रों तक शिक्षा को सुगम बनाने की इस महत्वपूर्ण पहल को आगे नहीं बढ़ाया गया. इस परियोजना को आगे बढ़ाया जाता, तो दूर देहात के बच्चों के हाथों में टैबलेट होता और वे खुद ही शिक्षा को आगे बढ़ा पाते. सिब्बल ने कहा कि छह से 14 वर्ष के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून में एक महत्वपूर्ण आयाम समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को पहली कक्षा में दाखिले में 25 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने का था. यह दुखद है कि अभी यह 8 प्रतिशत तक ही सीमित है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्कूल अपनी जवाबदेही से बच रहे हैं और सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है.

इसे भी पढ़ें – CBSE पेपर लीक मामले का खुलासा : शिक्षकों ने सुबह 9:15 बजे पेपर की फोटो क्लिक की और कोचिंग सेंटर के मालिक को भेज दिया, फिर मालिक ने छात्रों में बांट दिया पेपर

Related Posts

पूर्व सीजेआई आरएम लोढा हुए साइबर ठगी के शिकार, एक लाख रुपए गंवाये

साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

छठी कक्षा का बच्चा दूसरी कक्षा का किताब नहीं पढ़ पा रहा

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर हम हाल की रिपोर्ट को देखें तो यह बात स्पष्ट होती है कि छठी कक्षा का बच्चा दूसरी, तीसरी कक्षा की पुस्तकों को नहीं पढ़ पा रहा है. शिक्षा की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती है और सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. सिब्बल ने कहा कि संप्रग सरकार के दौरान जब उन्होंने मंत्रालय संभाला था तब 12वीं कक्षा पास करके विश्वविद्यालय जाने वाले बच्चों की सकल नामांकन दर 12.4 प्रतिशत थी. उस समय वैश्विक औसत जीईआर 27 प्रतिशत था. इस दिशा में तब की सरकार ने ठोस नीति तैयार की और उसी का परिणाम है कि आज जीईआर 24 प्रतिशत हो गई है. इसमें और अधिक वृद्धि की गुंजाइश है तथा सरकार को इस दिशा में गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: