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मेरे सत्ता में आने से पहले मध्यप्रदेश में सरकारी पदों पर होने वाली भर्तियों में सौ प्रतिशत होता था फर्जीवाड़ा: चौहान

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News Wing
Bhopal, 30 November:
अपने शासनकाल में हुए बहुचर्चित व्यापमं घोटाले को बहुत ही छोटा बताते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेरे सत्ता में आने से पहले प्रदेश में सरकारी पदों पर होने वाली भर्तियों में सौ प्रतिशत फर्जीवाड़ा होता था.
मुख्यमंत्री के रूप में 12 साल पूरे होने पर चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को एक खास मुलाकात में बताया कि मेरे 12 साल के कार्यकाल में (प्रदेश के विभिन्न विभागों की विभिन्न पदों की) लाखों भर्तियां हुई, लेकिन उनमें केवल 1,700 गड़बड़ियां हुई. उन्होंने दावा किया कि मेरे शासनकाल से पहले प्रदेश में सरकारी पदों पर होने वाली भर्तियों में सौ प्रतिशत फर्जीवाड़ा होता था. उन्होंने कहा कि मैने इस फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए एक सिस्टम बनाया, जिससे सरकारी पदों पर मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) के जरिये लिखित परीक्षा लेने के बाद पारदर्शी भर्ती हुई और यह फर्जीवाड़ा रूका.

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मेरे कार्यकाल में कम हुई गड़बड़ियां

उनसे सवाल किया गया था कि कांग्रेस हमेशा आप पर व्यापमं घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाती है, अब आपको क्लीन चिट मिल गई है, इस पर आपका क्या कहना है. चौहान ने कहा कि देखिये मैं बहुत विस्तार में नहीं जाऊंगा. लेकिन अगर बहुत संक्षिप्त में समझना हो तो व्यापमं में (मेरे शासनकाल से) पहले जितनी परीक्षाएं होती थीं, उनमें भर्ती परीक्षा में कोई पारदर्शिता नहीं थी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मसलन पुलिस में आरक्षक की भर्ती होनी है तो इनकी भर्ती पुलिस अधीक्षक करता था या पुलिस महानिरीक्षक करता था. कोई लिखित परीक्षा नहीं होती थी. वही लेते थे, वही भर्ती कर देते थे. 100 प्रतिशत फर्जीवाड़ा होता था. चौहान ने आगे बताया कि पटवारी की भर्ती भी कलेक्टर करते थे, डिप्टी कलेक्टर कर देते थे. भर्ती के लिए कोई सिस्टेमैटिक व्यवस्था नहीं थी. शिक्षकों की भर्ती जनपद और जन पंचायत के लोग कर देते थे. उन्होंने कहा कि इसमें मैंने एक सिस्टम बनाया. मैंने कहा परीक्षा होगी और लिखित परीक्षा होगी और मैरिट के आधार पर सरकारी पदों पर भर्ती होगी. व्यापमं ने वह परीक्षा ली, व्यवस्था बनाई. चौहान ने बताया कि हालांकि, सिस्टम में गड़बड़ी हुई, वह भी कितनी? 1,700 गड़बड़ियां हुई जो कुछ भर्ती परीक्षाओं में हुई, जबकि मेरे 12 साल के कार्यकाल में लाखों भर्तियां हुई हैं. उन्होंने कहा कि सिस्टम में किसी ने छेड़छाड़ की. जिन्होंने गड़बड़ की थी, उनको सजा मिल गई है. चौहान ने कहा कि ये गड़बड़ियां प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) को छोड़कर हैं.

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पीएमटी परीक्षा में की जाती है लेन-देन

उन्होंने कहा कि अब पीएमटी की सुन लीजिये. प्राइवेट मेडिकल कॉलेज केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं, हिन्दुस्तान के अलग-अलग राज्यों में खुद परीक्षाएं लेते हैं और आप उनसे पारदर्शिता निकाल लो, 100 प्रतिशत लेने-देन होता है. चौहान ने बताया कि अंडर द टेबल पैसा चलता है और जो पैसे वाला होता है उसी का (पीएमटी में) दाखिला होता है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज पहले खुद परीक्षाएं लेते थे. हमने कहा यह ठीक नहीं है. हमने एक कानून बनाया और हमने तय किया कि आप (प्राइवेट मेडिकल कॉलेज) यह परीक्षा नहीं लोगे और परीक्षाएं पीएमटी के जरिये होनी चाहिए. प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने इसका विरोध किया. वे उच्च न्यायालय गये. हम उच्च न्यायालय में लड़े. वे वहां हारे. इसके बाद वे उच्चतम न्यायालय में गये. वे वहां भी हारे. इसके बाद यह व्यवस्था बनी कि पीएमटी के जरिये ही परीक्षा होगी. चौहान ने बताया कि (रैकेट करने वालों ने) अब उसमें (पीएमटी) एक नई व्यवस्था स्कोरर वाली कर दी. वह भी पकड़ी गई. उन्होंने कहा कि व्यापमं कुल मिला कर सिस्टम को क्लीन करने का मेरा प्रयास है. व्यापमं के मामले में अपने को मिली क्लीन चिट की ओर इशारा करते हुए चौहान ने बताया कि अब उसमें हुई गड़बड़ी को कांग्रेस ने मेरे मत्थे पर मारने की कोशिश की. लेकिन, अंतत: सारी चीजें साफ हो गई. गौरतलब है कि व्यापमं द्वारा विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के साथ-साथ मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए ली गई क्रमश: पीएमटी एवं पीईटी (प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट) की परीक्षाओं में कथित तौर पर अनियमितता हुई थी और सीबीआई इसकी जांच कर रही है.

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गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ हुई कार्रवाई

उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. व्यापमं द्वारा ली गई परीक्षाओं में हुई इन अनियमितताओं के कारण मैंने फैसला लिया कि मध्यप्रदेश में आगे से मेडिकल कॉलेजों में दाखिला नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) के स्कोर से होगा और इजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला जेईई (ज्वाइंट इंट्रेन्स एक्जामिनेशन) के जरिये होगी. पिछले महीने सीबीआई ने विशेष अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि व्यापमं के तत्कालीन अधिकारी नितिन महिन्द्रा के कब्जे से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जब्त की गई हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव की फॉरेंसिक जांच में ‘सीएम’ (मुख्यमंत्री) शब्द से इनमें कभी किसी फाइल के सभ किये जाने का साक्ष्य नहीं मिला है.

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सीबीआई ने डिस्क और पेन ड्राइव से छेड़छाड़ करने संबंधी आरोपों को किया खारिज

सीबीआई ने इस हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव से छेड़छाड़ करने संबंधी आरोपों को खारिज कर दिया था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा व्हिसिलब्लोवर प्रशांत पांडे ने आरोप लगाया था कि इस हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव से छेड़छाड़ की गई है. इस हार्ड डिस्क एवं पेन ड्राइव को करोड़ों रूपये के व्यपामं घोटाले में अहम सबूतों के रूप में देखा जा रहा था. वहीं, सीबीआई ने व्यापमं द्वारा ली गई पीएमटी 2012 परीक्षा में हुए कथित घोटाले की अपनी जांच के सिलसिले में 17 नवंबर को भोपाल में 592 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है, जिनमें व्यापमं के तत्कालीन अधिकारी, छात्र, स्कोरर, मीडियेटर, अभिभावक, इस परीक्षा में ड्यूटी पर लगाये गये शिक्षक-शिक्षिकाएं के साथ-साथ चार निजी कॉलेजों के प्रमोटर, डायरेक्टर एवं अधिकारी शामिल हैं.

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