न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

मिशन 2019 : भाजपा के लिए उतनी आसान नहीं डगर सत्ता की

66

” आज बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहा जाता है. देश के सबसे बड़े भू-भाग पर उसका और उसके सहयोगियों का शासन है. उसका कुनबा काफी बड़ा है. उसका लक्ष्य बड़ा है. तो इससे भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि उसकी चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं. अति आत्मविश्वास में की गई कुछ लापरवाहियों का नतीजा हालिया उपचुनाव के नतीजों के रूप में सामने आया. नुकसान छोटा ही सही, लेकिन उसके मायने बहुत बड़े हैं. उसका संदेश व्यापक है और देश में जो मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य उभर रहे हैं, उसे नजरअंदाज करने की भूल बीजेपी को नहीं करनी चाहिए. ”

eidbanner

” आज बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कहा जाता है. देश के सबसे बड़े भू-भाग पर उसका और उसके सहयोगियों का शासन है. उसका कुनबा काफी बड़ा है. उसका लक्ष्य बड़ा है. तो इससे भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि उसकी चुनौतियां भी उतनी ही बड़ी हैं. अति आत्मविश्वास में की गई कुछ लापरवाहियों का नतीजा हालिया उपचुनाव के नतीजों के रूप में सामने आया. नुकसान छोटा ही सही, लेकिन उसके मायने बहुत बड़े हैं. उसका संदेश व्यापक है और देश में जो मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य उभर रहे हैं, उसे नजरअंदाज करने की भूल बीजेपी को नहीं करनी चाहिए. “

News Wing Desk
बीजेपी की शुरुआत 2 सीटों से हुई थी. आज देश के 21 राज्यों में बीजेपी या एनडीए का शासन है. जाहिर है इतनी बड़ी बढ़त से बीजेपी का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा. मगर हालिया यूपी और बिहार के उपचुनावों के नतीजों ने उसे सोचने पर जरूर मजबूर कर दिया है कि अभी भी सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को सूक्ष्मता से समझने की जरूरत है. क्योंकि इन समीकरणों को नजरअंदाज करने का मतलब होता है सीधा नुकसान. राजनीति के जानकारों की नजर में मिशन 2019′ की तैयारी में जुटी बीजेपी के लिए फिलहाल सबसे ज्यादा चुनौती उन्हीं 7 राज्यों से उठती दिख रही है, जो 2014 में उसकी कामयाबी में मील का पत्थर साबित हुए थे. बीजेपी को पूरे देश से जो 282 सीटें मिली थीं, उनमें से 196 सीटें यूपी, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान से मिली थीं. इन सात राज्यों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से 273 सीटें इन्ही राज्यों से आती हैं. इन राज्यों से 44 सीटें बीजेपी के सहयोगी दलों के खाते में भी गईं थीं. मगर अब समीकरण बदलता नजर आ रहा है. बीजेपी के लिए प्रतिकूल माहौल बनने के कई कारण हैं. कहीं सामाजिक समीकरणों को जटिलता है, तो कहीं अपने सहयोगी ही आंखें दिखाने लगे हैं.

इसे भी देखें- केंद्र ने इस बार भी डीके पांडेय को डीजी रैंक में नहीं किया इंपैनल, DG Equlvalent level में ही रखा

सुरक्षित दुर्ग में दस्तक, साथी भी नाराज 
देश की राजनीति में यूपी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ये एक बड़ा राज्य होने के साथसाथ देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री देनेवाला राज्य भी है. यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं. 2014 के चुनाव में बीजेपी को 71 और उसके सहयोगी अपना दल को दो सीटों पर जीत मिली थी, अब यहां एसपी-बीएसपी के नजदीक आने से समीकरणों का पलट जाना तय माना जा रहा है. गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव इसका ताजा और मजबूत उदाहरण है. इन दोनों पार्टियों का अपना एक मजबूत वोटबैंक है और वोट एक दूसरे को ट्रांसफर भी हो जाते हैं. ऊपर से मोस्ट बैकवर्ड का जो हथियार बीजेपी के पास था, अब वह बसपा-सपा के पाले में जाता दिख रहा है. वहीं महाराष्ट्र की बात करें तो इस राज्य से 48 सीटें हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां पर बीजेपी को 23 और सहयोगी शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं. वह परिणाम काफी उत्साहजनक था, लेकिन बीजेपी के अपने सहयोगियों के साथ रिश्ते भी लगातार तल्ख हो रहे हैं. 2019 ने शिवसेना ने भी अकेले चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया है.

बिहार में बदलता सियासी गणित का फार्मूला

पिछले लोकसभा चुनाव में बिहार के 40 लोकसभा सीटों में से बीजेपी को 22 और उसके दो सहयोगी दलों को 9 सीटें मिली थी. आरजेडी और कांग्रेस ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था जबकि जेडीयू ने अलग चुनाव लड़ा था. अब जेडीयू ने पाला बदलकर फिर से बीजेपी का दामन थाम लिया है. इसके बावजूद बीजेपी की राह में मुश्किलें कम नहीं हो रहीं. क्योंकि आरजेडी ने अपने मुस्लिम + यादव समीकरण के अलावा दलित, महादलित अति पिछड़ा वर्ग पर भी ध्यान केंद्रित किया है और सोशल इंजीनियरिंग भी शुरू कर दी है. वहीं महादलितों के नेता जीतनराम मांझी की राजद से नजदीकी और उपेंद्र कुशवाहा का बीजेपी से बढ़ता शिकवा कहीं न कहीं यही बताता है कि 2019 के दंगल में ये दोनों नेता किसी बीजेपी विरोधी खेमे में हो सकते हैं.

Related Posts

पूर्व सीजेआई आरएम लोढा हुए साइबर ठगी के शिकार, एक लाख रुपए गंवाये

साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

इसे भी देखें- घटवार-घटवाल को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने पर बोले रघुवर – कांग्रेस ने किया बाहर, हम करेंगे शामिल

गुजरात और आंध्र के गौरतलब पक्ष

गुजरात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृह प्रदेश होने के साथ साथ बीजेपी का एक अभेद्य किला भी माना जाता रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में 26 सीटों पर जीत ने बीजेपी का आत्मविश्वास जरूर बढ़ाया था, लेकिन हालिया गुजरता विधानसभा चुनाव में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तिकड़ी ने न सिर्फ बीजेपी का जायका बिगाड़ दिया, बल्कि उसे काफी हद तक संतुलित भी कर दिया. शुरुआत में इस तिकड़ी की उपेक्षा जरूर हुई, लेकिन अब बीजेपी इस ओर गंभीरता से सोचने पर मजबूर जरूर हुई है कि गुजरता को पूर्णत: अपना गढ़ समझना एक गलतफहमी ही साबित होगी. वहीं आंध्र प्रदेश में बीजेपी और टीडीपी के बीच तलाक और मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कवायदों के बीच बीजेपी ने आंध्र में नये सहयोगी की तलाश भी शुरू कर दी है.

इसे भी देखें- नगर निकाय चुनाव : डीसी साहब ! आपके कैंपस में हो रहा है आदर्श आचार संहिता का उल्‍लंघन

कांग्रेस फिर से समेट रही ताकत 
अपनी स्थापना से लेकर अब तक के इतिहास में कांग्रेस सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. कई राज्यों में भारी पराजय के बावजूद बिहार और गुजरात में मिली बढ़त ने कांग्रेस के आत्मविश्वास को बढ़ाया है. हालांकि कांग्रेस के लिए इस मुश्किल हालात से उबरना उतना आसान भी नहीं है, लेकिन उसकी ताकत की धीमी ही सही रिकवरी तो हो ही रही है. 
बिहार में मांझी का बिदकना, कुशवाहा का नाराज चलना, आंध्र में टीडीपी से रिश्ते टूटना, गुजरात में कांग्रेस की चुनौती, यूपी में बसपा-सपा गंठजोड़, ऊपर से एनसीपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की ओर से बीजेपी के खिलाफ एक बड़े गठबंधन की हिमायत अपने आप में एक नये रणनीतिक समीकरण की गवाही है. जो बीजेपी के लिए एक संदेश है कि अगली बार उतनी आसान भी नहीं है डगर सत्ता की.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: