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महाराष्ट्र में नहीं थम रहा किसानों का आक्रोश,  सरकार से नाराज 91 किसानों ने मांगी इच्छामृत्यु

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“किसान को देश का अन्नदाता कहते हैं. जिस देश के सकल घरेलू उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा कृषि से आता हो, वहां के किसानों को देश का भाग्य विधाता भी कहा जाता है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अब तक की सरकारें आखिर क्यों किसानों के हितों की अनदेखी करती रही हैं. आखिर ऐसी क्या मजबूरी या मनोदशा है कि किसान मृत्यु की कामना करने लगता है. इसका जवाब तंत्र को जरूर ढूंढना चाहिए. ताजा मामला महाराष्ट्र का है, जहां किसानों को सरकार से आश्वासन तो जरूर मिलता रहा है, मगर उनकी समस्याएं निराकरण के अभाव में यथावत बनी हुई हैं.”

Mumbai : महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार को किसानों के आक्रोश से छुटकारा मिलता नहीं दिख रहा. हाल में हुई नासिक से मुंबई तक करीब 30 हजार किसानों की पदयात्रा के बाद अब एक बार फिर किसानों ने अपने हक की आवाज बुलंद की है, जिसकी गूंज महाराष्ट्र सरकार तक पहुंच रही है. महाराष्ट्र में फसल का सही मूल्य ना मिल पाने और हाइवे निर्माण के लिए अधिगृहित भूमि का कम मुआवजा मिलने से नाराज किसानों ने अब राज्यपाल को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की अनुमति देने की मांग की है. हालांकि इस पत्र को लेकर सरकार को कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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अपने हक की खातिर महाराष्ट्र के बुलधाना में सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे 91 किसानों ने राज्यपाल को लिखे एक पत्र में उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति देने का अनुरोध किया है. किसानों का आरोप है कि उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. इसके साथ-साथ जिस जमीन को सरकार ने हाइवे बनाने के नाम पर अधिगृहित किया था, उसके लिए उन्हें पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया गया. इस मसले पर राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं होने के कारण किसानों का आक्रोश इस हद तक आ गया है कि उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की है.

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किसानों ने हाल में ही की थी नासिक से मुंबई तक पदयात्रा 
ज्ञात हो कि इससे पहले भी महाराष्ट्र में किसानों ने व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया है. हाल की ही बात है राज्य के करीब 30 हजार किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर नासिक से मुंबई तक विशाल पदयात्रा निकाली थी, जिसके बाद राज्य सरकार की नींद खुली थी. इस पदयात्रा के मुंबई पहुंचने के बाद सीएम देवेंद्र फड़नवीस ने किसानों की कई मांगों को स्वीकार करते हुए उनके प्रदर्शनों को समाप्त कराया था. अब एक बार फिर से किसानों का असंतोष उभरना ये जताता है कि सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं पर सार्थक पहल करने को लेकर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है.

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