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महज पांच से सात घंटे मिल रही है बिजली, और गहरा सकता है बिजली संकट

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Chatra: झारखंड राज्य बिजली बोर्ड मे अनुबंध पर कार्यरत मानव दिवस कर्मियों का अनुबंध समाप्त हो चूका है.  अनुबंध समाप्त हुए करीब दो माह बीत जाने के बाद भी इनकी संविदा का नवीनीकरण अबतक बोर्ड द्वारा नहीं किया गया है. ऐसे मे ये मानव दिवस कर्मी अपनी खुद की जिम्मेवारी पर जान जोखिम मे डालकर विभाग को सेवा देकर विद्युत व्यवस्था बहाल कर रहे हैं.  लेकिन अधिकारियों के रवैये से इनकी हिम्मत भी जवाब देने लगी है. कर्मी अपने अनुबंध का नवीनीकरण चाहते हैं. इसके साथ ही उनका कहना है कि उनके बकाये मानदेय का भुगतान किया जाय. अपनी इन्ही मांगों को लेकर मैन्डेज कर्मियों ने 6 जुलाई से हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है.

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पूरे जिले में मंडरा रहा ब्लैकआउट का खतरा
दूसरी ओर बिजलीकर्मियों की संविदा समाप्त होते ही जिले मे बिजली संकट धीरे-धीरे गहराने लगा है. चौबीस घंटों मे जिले को महज पांच से सात घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है. ऐसे मे लाइन मे फाल्ट उत्पन्न हुआ तो वो भी नदारद. ऐसी स्थिति उत्पन्न होने का एक मात्र कारण बिजली आपूर्ति प्रमंडल में मेंटेनेंस कर्मियों की कमी है.  स्थिति यही बनी रही तो छह जुलाई के बाद जिले मे पूरी तरह से ब्लैक आउट की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. हालांकि अभी से ही बिजली की आंख मिचौली लोगों को रुला रही है. शहरी जलापूर्ति योजना पर भी विद्युत आपूर्ति के अभाव मे प्रतिकूल असर पड़ रहा है. लोगों को यदा कदा ही पानी मिल पा रहा है.

बिजली विभाग मे स्वीकृत पद के अनुरूप ज्यादा कर्मी हैं कार्यरत
झारखंड राज्य बिजली बोर्ड, चतरा ईकाई में जिले को नियमित बिजली आपूर्ति को लेकर मेंटेनेंस कर्मियों और बिजली मिस्त्रियों का कुल अठारह पद स्वीकृत हैं. इसके एवज में विभाग द्वारा 22 कर्मियों से सेवा ली जा रही है.  जिसमे पांच नियमित व 18 मानव दिवस कर्मी हैं. सरकारी कर्मियों की स्थिति ये नहीं है कि वो लाइन आपूर्ति मे आई बाधा को दूर कर सकें.  ऐसे मे मानव दिवस कर्मियों के कन्धों पर ही जिले भर की विद्युत व्यवस्था की जिम्मेवारी है.  इसके लिए विभाग ने कार्य एजेंसी टॉप्स ग्रुप के माध्यम से प्रखंड से जिलास्तर पर मैन्डेज कर्मियों की नियुक्ति की है. जिनकी संविदा भी दो माह पूर्व ही समाप्त हो गई है. सबसे मजे की बात ये है कि विभागीय अधिकारीयों द्वारा स्वीकृत बल के अनुरूप चार अतिरिक्त कर्मियों से कार्य कराया जा रहा है. जिनकी नियुक्ति ना तो बोर्ड के अनुशंसा पर हुई है, और ना ही इन्हें विभाग द्वारा मानदेय का भुगतान किया जाता है.  इन अतिरिक्त बलों का कार्य भुगतान भी मानव दिवस कर्मियों के मानदेय को काटकर ही किया जाता है.  मानव दिवस कर्मियों ने बताया कि अविलम्ब बोर्ड द्वारा संविदा का नवीनीकरण नहीं किया गया तो सभी सामूहिक कार्य बहिष्कार करते हुए हड़ताल पर चले जाएंगे.

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दुर्घटना हुई तो कौन होगा जिम्मेवार ?
सबसे आश्चर्य की बात ये है कि संविदा समाप्त होने के बाद भी विगत दो माह से बगैर मानदेय कर्मियों से अधिकारी काम ले रहे हैं.  ऐसे मे लाइन मेंटेनेंस के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना मानव दिवस कर्मियों के साथ घटती है, तो इसका जिम्मेवार कौन होगा ? अधिकारी क्षति का हर्जाना भरेंगे या कर्मी खुद इसके लिए जिम्मेवार होंगे.  क्योंकि पूर्व मे हुई दुर्घटनाओं की क्षतिपूर्ति व मुआवजा भी अबतक कर्मियों को बिजली बोर्ड और कार्य एजेंसी द्वारा नहीं दिया गया है.

कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं अधिकारी
कर्मियों की संविदा समाप्त होने के बाद भी अधिकारी कितने लापरवाह हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विभाग का कोई भी अधिकारी इस मामले को लेकर कैमरे के सामने कुछ भी कहने को तैयार नहीं है.  हाँ ऑफ कैमरा वे जरुर समस्या के समाधान की बात कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि संविदा नवीनीकरण कि संचिका विभाग को भेज दी गई है. जल्द ही निर्देश प्राप्त होते ही नवीनीकरण कर दिया जाएगा.

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