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महंगे होंगे डीजल-पेट्रोल, 2018 तक उत्पादन में कटौती जारी रखेंगे ओपेक देश

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News Wing
Vienna, 01 December:
लगातार गिर रही क्रूड ऑइल की कीमतों को रोकने के लिए ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (ओपेक) ने गुरुवार को एक मीटिंग में तेल उत्पादन में कटौती को 2018 के अंत तक जारी रखने का फैसला लिया है. जिसकी वजह से आने वाले समय में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ सकती है. वहीं भारत में भी इसका असर देखने को मिल सकता है. यहां भी आने वाले समय में डीजल-पेट्रौल की कीमत बढ़ेगी.

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रूस नॉन ओपेक देशों का नेतृत्व करेगा

बैठक में इस बात पर सहमति नहीं बन सकी कि लीबिया के ऑइल आउटपुट को कंट्रोल करने के लिए प्रॉडक्शन कट की जरूरत है या नहीं. आपको बता दें कि लीबिया अभी आंतरिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है. 14 सदस्यीय ओपेक नॉन-ओपेक मेंबर देशों के साथ संयुक्त रूप से प्रॉडक्शन कट को लेकर बैठक करने जा रहा है. रूस नॉन ओपेक देशों का नेतृत्व करेगा. रूस ने इसी साल ओपेक देशों के साथ मिलकर प्रॉडक्शन कट किया था. वह खराब दौर से गुजर रहे अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑइल मार्केट को घाटे से उबारने के लिए लगातार प्रॉडक्शन कट की वकालत कर रहा है.

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क्रूड ऑइल की कीमत प्रति बैरल 60 डॉलर से ज्यादा

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑइल की कीमत प्रति बैरल 60 डॉलर से ज्यादा पहुंच चुकी है. अमेरिका प्रॉडक्शन कट करने की डील में शामिल नहीं है. वहीं रूस को यह डर सता रहा है कि कहीं प्रॉडक्शन कट के कारण तेल की बढ़ी डिमांड को पूरा करने के लिए अमेरिका अपने यहां उत्पादन बढ़ा न दे. इंटरनैशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की यह कोशिश कितनी सफल होती है यह ओपेक मेंबर कंट्रीज और नॉन ओपेक मेंबर कंट्रीज के रवैये पर पूरी तरह से निर्भर करेगा. अगर दोनों पार्टियां इस मामले में आम सहमति बनाने में कामयाब होती हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ना तय है.

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