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मन की बात में बोले पीएम मोदी: हम 40 साल से झेल रहे आतंकवाद, अब दुनिया हमारे साथ

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News Wing New delhi, 26 November: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में आतंकवाद पर गहरी चिंता जतायी है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद आज विश्व के हर भू-भाग में और एक प्रकार से प्रतिदिन होने वाली घटना का एक अति-भयंकर रूप बन गई है. हम भारत में तो गत 40 वर्ष से आतंकवाद के कारण बहुत कुछ झेल रहे हैं. हज़ारों हमारे निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है लेकिन कुछ वर्ष पहले,भारत जब दुनिया के सामने आतंकवाद की चर्चा करता था, आतंकवाद से भयंकर संकट की चर्चा करता था तो दुनिया के बहुत लोग थे, जो इसको गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं थे. आज जब आतंकवाद उनके अपने दरवाज़ों पर दस्तक दे रहा है तब दुनिया की हर सरकार मानवतावाद में विश्वास करने वाले लोकतंत्र में भरोसा करने वाली सरकारें आतंकवाद को एक बहुत बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं.” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम के 38वें संस्करण में बोल रहे थे.

26/11 हमले के शहीदों को पीएम ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री ने मन की बात में 26/11 हमले के शहीदों को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने आंतकवाद के खिलाफ दुनिया के एकजुट होने का आवाहन किया. पीएम ने कहा कि ”ये देश कैसे भूल सकता है कि नौ साल पहले 26/11 को आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला बोल दिया था. देश उन बहादुर नागरिकों, पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मियों को नमन करता है जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई. यह देश कभी उनके बलिदान को नहीं भूल सकता.”

इस धरती ने अहिंसा और प्रेम का दिया है संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा, ”आतंकवाद ने विश्व की मानवता को ललकारा है. आतंकवाद ने मानवतावाद को चुनौती दी है. वो मानवीय शक्तियों को नष्ट करने पर तुला हुआ है. इसलिए, सिर्फ़ भारत ही नहीं, विश्व की सभी मानवतावादी शक्तियों को एकजुट होकर आतंकवाद को पराजित करके ही रहना होगा. लिए, मानवतावादी शक्तियों का अधिक जागरूक होना समय की मांग है.”

संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”आज संविधान दिवस है, 1949 में आज ही के दिन संविधान-सभा ने भारत के संविधान को स्वीकार किया था. 26 जनवरी 1950 को, संविधान लागू हुआ था. भारत का संविधान, हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. आज का दिन, संविधान-सभा के सदस्यों के स्मरण करने का दिन है. उन्होंने भारत का संविधान बनाने के लिए लगभग तीन वर्षों तक परिश्रम किया. संविधान-दिवस के अवसर पर डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर की याद आना तो स्वाभाविक है, आज हम भारत के जिस संविधान पर गौरव का अनुभव करते हैं, उसके निर्माण में बाबासाहेब आंबेडकर के कुशल नेतृत्व की अमिट छाप है.”

मानवता के काम में बढ़-चढ़ कर आगे आयी है भारतीय नौसेना

पीएम ने कहा, ”चार दिसंबर को हम सब नौसेना दिवस दिवस मनाएंगे. भारतीय नौ-सेना, हमारे समुद्र-तटों की रक्षा और सुरक्षा प्रदान करती है. मैं, नौ-सेना से जुड़े सभी लोगों का अभिनंदन करता हूँ. जब हम नौ-सेना की बात करते हैं तो सिर्फ हमें युद्ध ही नज़र आता है लेकिन भारत की नौ-सेना, मानवता के काम में भी उतनी ही बढ़-चढ़ कर के आगे आई है.”

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