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बोल्ट युग से आगे निकला एथलेटिक्स लेकिन भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं

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New Delhi : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स उसेन बोल्ट युग से आगे बढ़ गया लेकिन भारत के लिये समय मानो थमा हुआ ही है जिसमें डोप कलंकित खेल में वैश्विक स्तर पर पदक जीतने के मामले में भारत की झोली खाली ही रही. खेल के इतिहास के महानतम फर्राटा धावक और ‘शोमैन’ बोल्ट ने लंदन में विश्व चैम्पियनशिप में फिनिशिंग लाइन को चूमकर खेल से विदा ली तो इसके साथ ही एक युग का समापन हो गया.

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कलंकित एथलेटिक्स में विश्वसनीयता का दूसरा नाम बोल्ट

जमैका के 31 बरस के बोल्ट डोप कलंकित एथलेटिक्स में विश्वसनीयता का दूसरा नाम हो गए थे क्योंकि उनका पूरा कैरियर बेदाग रहा है. बोल्ट को 100 मीटर फाइनल में डोप कलंकित जस्टिन गाटलिन ने हराया. विश्व एथलेटिक्स के आला हुक्मरान सेबेस्टियन कू ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि गाटलिन पर प्रतिबंध लगना चाहिये था. इस सप्ताह फिर गाटलिन नये डोपिंग विवाद में फंस गए हैं.

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सुनहरे कैरियर की आखिरी रेस रही निराशाजनक

बोल्ट के सुनहरे कैरियर की आखिरी रेस निराशाजनक रही क्योंकि चार गुणा सौ मीटर रिले में बीच में मांसपेशी में खिंचाव आने के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा. आठ ओलंपिक और 11 विश्व चैम्पियनशिप स्वर्ण जीत चुके बोल्ट दर्द से कराहते हुए ट्रैक से विदा हुए और अपनी रेस भी पूरी नहीं कर सके । इससे यह भी साबित हुआ कि खेल कितना बेरहम हो सकता है हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब महानतम खिलाड़ियों की विदाई निराशाजनक रही हो ।

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