न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बॉम्बे हाइकोर्ट का एेतिहासिक फैसला, कहा- प्रेम संबंधों में सहमति से बना जिस्मानी संबंध बलात्कार नहीं

192

Mumbai : अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि महिलाएं अपने कुछ अधिकारों का गलत इस्तेमाल करके पुरुषों पर यौन शोषण जैसे आरोप मढ़ देती हैं. ऐसे ही आरोपों को लेकर बॉम्बे हाइकोर्ट की गोवा बेंच ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि प्रेम संबंधों के दौरान सहमति से सेक्स करने पर किसी व्यक्ति को बलात्कार का दोषी नहीं ठहराया जा सकता. सिर्फ महिला के गलत बयानी के आधार पर ही किसी को सजा नहीं दी जा सकती. हाइकोर्ट की बेंच ने उक्त बातें ट्रायल कोर्ट से बलात्कार के आरोप में सात साल की सजा और दस हजार जुर्माना की सजा मिले व्यक्ति मामले में सुनवाई के दौरान कही. उसपर महिला ने शादी का झांसा देकर बलात्कार करने का आरोप लगाया था. आरोपी ने 2013 में ट्रायल कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इसी के साथ हाइकोर्ट ने आरोपी को बरी करते हुए राहत प्रदान की. दो कैसीनो कर्मियों के बीच प्रेम संबंध के बाद आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बना था.

इसे भी पढ़ें : एससी-एसटी एक्ट को लेकर राहुल का बीजेपी-आरएसएस के DNA पर सवाल, भाजपा का पलटवार

शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप

महिला ने योगेश पालेकर नामक प्रेमी पर आरोप लगाया था कि उसने परिवार से मिलवाने के बहाने उसे अपने घर ले गया था. वहां जाने पर पता चला कि घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं है. महिला वहां उसके साथ रात भर रही, जिसके बाद दोनों के बीच जिस्मानी संबंध कायम हो गए. लड़की के मुताबिक शादी का झांसा देकर प्रेमी ने बाद में तीन से चार बार घर बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए. युवती ने बताया कि उसने बाद में छोटी जाति की बात कहकर शादी से इन्कार कर दिया. जिसके बाद महिला ने पालेकर के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज कराया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान महिला ने माना कि उसने यौन संबंध के लिए सहमति दी थी, मगर शादी करने की शर्त पर.

xfgnbcncn

इसे भी पढ़ें : हिंसक हुआ भारत बंद प्रदर्शन: एमपी के मुरैना में एक शख्स की मौत के बाद लगा कर्फ्यू, सरकार ने दायर की पुर्नविचार याचिका, शांति की अपील

20 मई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- बालिग महिला मित्र की सहमति से बना यौन संबंध बलात्कार नहीं

 bhmkbhjmn

उच्चतम न्यायालय ने 20 मई 2013 को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि बालिग महिला मित्र की सहमति से यौन संबंध स्थापित करने वाले व्यक्ति पर बलात्कार के आरोप में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, बशर्ते उसकी महिला मित्र से विवाह करने की मंशा हो. न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने कहा था कि यदि लड़की प्रेमवश यौन संबंध स्थापित करती है, लेकिन किन्हीं कारणवश उनका विवाह नहीं हो सका, ऐसे मामले में भी व्यक्ति बलात्कार का आरोपी नहीं हो सकता.

अदालत को तथ्यों का परीक्षण करना चाहिए :  उच्चतम न्यायालय

न्यायाधीशों ने कहा था कि अदालत को इस तथ्य का परीक्षण करना चाहिए कि क्या आरोपी ने शुरू में विवाह का झूठा वायदा किया था और क्या यौन संबंध के स्वरूप और परिणाम को पूरी तरह समझते हुये इसकी सहमति दी गयी थी. कोर्ट ने कहा था कि ऐसा भी हो सकता है जहां पीड़ित आरोपी के प्रति अपने प्रेम और आसक्ति के कारण यौन संसर्ग के लिये तैयार हो गयी हो और आरोपी द्वारा गलत तस्वीर पेश करने के कारण ऐसा नहीं हुआ हो या विवाह करने की मंशा रखने के बावजूद आरोपी किसी अपरिहार्य कारणों या परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर होने की वजह से उससे विवाह करने में असमर्थ रहा हो. ऐसे मामलों पर अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है. न्यायाधीशों ने कहा कि बलात्कार और सहमति से यौन संबंध स्थापित करने में अंतर है.

इसे भी पढ़ें : पेट्रोल के दामों ने तोड़ा चार साल का रिकॉर्ड, डीजल अबतक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.
 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: