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बैंक लोन के विलफुल डिफॉल्टर्स पर सरकार सख्त,  2170 एफआईआर दर्ज : महेश पोद्दार

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Ranchi :  झारखंड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि भारत सरकार इरादतन बैंक लोन चुकाने में कोताही या चूक करनेवाले व्यक्तियों या व्यापारिक इकाइयों के खिलाफ़ सख्त है.  राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के उत्‍तर में प्राप्त तथ्यों के आधार पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के नये सख्त प्रावधानों की वजह से अब बैंकों से लोन लेकर धोखाधड़ी करना आसान नहीं रह गया है.

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Ranchi :  झारखंड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा है कि भारत सरकार इरादतन बैंक लोन चुकाने में कोताही या चूक करनेवाले व्यक्तियों या व्यापारिक इकाइयों के खिलाफ़ सख्त है.  राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के उत्‍तर में प्राप्त तथ्यों के आधार पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक के नये सख्त प्रावधानों की वजह से अब बैंकों से लोन लेकर धोखाधड़ी करना आसान नहीं रह गया है. श्री पोद्दार ने राज्यसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा था कि क्या पुराने खराब लोन को दुबारा नया लोन देकर इसे शोध्य ऋण बनाये रखने की प्रवृत्ति रोकने हेतु कोई नीति बनायी गयी है? उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि क्या सरकार ने ऋण लेकर न चुकाने वाले औद्योगिक/व्यापारिक प्रतिष्ठानों/घरानों के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई की गयी है?  

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लोन लेकर इरादतन नहीं चुकाने वाले पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है

इसका उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्‍ल ने बताया कि आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि दबावग्रस्त खातों को अतिरिक्त वित्त प्रदान करते समय कठोरता से यह सुनिश्चित किया जाये कि ऐसे वित्त का उपयोग विद्यमान ऋणों को चुकाने अथवा खाते को सतत (एवरग्रीन) बनाने के लिए न किया जाये. मंत्री श्री शुक्ल ने बताया कि आरबीआई के अनुदेशों के अनुसार भुगतान की क्षमता होते हुए भी भुगतान में चूक करनेवाले लोन लेनेवाले को बैंक द्वारा इरादतन चूककर्ता घोषित किया जाता है.  इरादतन चूककर्ताओं को बैंकों अथवा वित्‍तीय संस्‍थाओं द्वारा कोई अतिरिक्‍त सुविधा स्‍वीकृत नहीं की जाती है.  उनकी इकाई को 5 वर्ष तक नया उपक्रम आरंभ करने से वंचित किया जाता है और जब कभी आवश्‍यक हो, उधारदाता बैंक उनके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई आरंभ कर सकते हैं

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इरादतन चूककर्ता कंपनियों को पूंजी बाजारों में प्रवेश करने से वंचित किया जाता है

श्री शुक्ल ने बताया कि सरकारी क्षेत्र के बैंकों द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों के अनुसार  31.01.2018 तक इरादतन चूककर्ताओं के विरुद्ध 2,170  एफआईआर दर्ज की गयी है.  इरादतन चूककर्ता प्रोमोटर्स/डायरेक्टर्स वाली कंपनियों को निधियां एकत्र करने के लिए पूंजी बाजारों में प्रवेश करने से वंचित करने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड विनियम में संशोधन किया गया है. इरादतन चूककर्ताओं को दिवालियापन समाधान प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित करने के लिए दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता में भी संशोधन किया गया है.

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