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बिहार: बीजेपी गठबंधन वाली सरकार में बढ़े सांप्रदायिक हिंसा के मामले

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जुलाई 2017 से अबतक धार्मिक टकराव के 200 मामले आये सामने

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Newswing Desk: बिहार में पिछले दिनों हुए सांप्रदायिक हिंसा ने एक ओर जहां नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा किया है, वही इन मामलों में बीजेपी नेता के हाथ होने के भी आरोप लगे है. अगर आंकड़ों की बात करें तो बिहार बीजेपी से जेडीयू की हुई नयी दोस्ती के बाद राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के मामले बढ़े हैं. जुलाई 2017 से अबतक सांप्रदायिक दंगों के 200 मामले सामने आये हैं. वही साल 2018 में सांप्रदायिक तनाव की 64 घटनाएं हुई हैं. ये खुलासा इंडियन एक्सप्रेस द्वारा सरकारी आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से हुआ है.

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गौरतलब है कि पिछले साल जुलाई में नीतीश कुमार ने  आरजेडी से नाता तोड़कर, अपने पुराने साथी बीजेपी को अपना नया राजनीतिक साथी बनाया था और NDA में पुनर्वापसी की थी. सांप्रदायित हिंसा को आंकड़ों में देखें तो 2012 में 50 ऐसी घटनाएं हुई थीं. 2013 में ये आंकड़ा 112 था. 2014 में 110 रहा, 2015 में ये आंकड़ा बढ़कर 155 हो गया. 2016 में इसमें जबर्दस्त इजाफा देखने को मिला और बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़कर 230 हो गईं. जबकि 2017 में धार्मिक टकराव की 270 घटनाएं हुईं. ये आंकड़ा पांच साल में सबसे ज्यादा है.

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नयी पारी में बढ़े हिंसा के मामले

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बिहार में बीजेपी और जेडीयू की नयी दोस्ती के बाद साम्प्रदायिक दंगे बढ़े हैं. बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की नयी पारी के बाद राज्य में अब तक साम्प्रदायिक तानव की 200 घटनाएं हो चुकी हैं. साल 2018 के लगभग 90-91 दिन गुजर चुके हैं. इस साल के इन तीन महीनों में ही साम्प्रदायिक तनाव की 64 घटनाएं हो चुकी हैं. ये खुलासा इंडियन एक्सप्रेस द्वारा सरकारी आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन से हुआ है. बता दें कि पिछले साल जुलाई में नीतीश कुमार ने लालू यादव की आरजेडी से रिश्ता खत्म कर बीजेपी को अपना नया राजनीतिक साथी बनाया था और NDA में पुनर्वापसी की थी. अगर हम पिछले पांच साल के आंकड़ों की बात करें तो 2012 में 50 ऐसी घटनाएं हुई थीं. 2013 में ये आंकड़ा 112 था. 2014 में धर्मिक टकराव के 110 मामले सामने आये, 2015 में ये आंकड़ा बढ़कर 155 हो गया. 2016 में इसमें जबर्दस्त इजाफा देखने को मिला और बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं बढ़कर 230 हो गईं. जबकि 2017 में धार्मिक टकराव की 270 घटनाएं हुईं. ये आंकड़ा पांच साल में सबसे ज्यादा है. 2017 में नीतीश कुमार जुलाई तक आरजेडी के साथ थे. इसके बाद उन्होंने बीजेपी के साथ सत्ता संभाली.

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तीन महीनों में 64 घटनाएं

2018 में अबतक सांप्रदायिक हिंसा के 64 मामले सामने आए हैं. जिसमें जनवरी में 21, फरवरी में 13 और मार्च में 30 साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएं पुलिस ने दर्ज की. वही मार्च में हुई कई घटनाएं मुस्लिम बहुत इलाकों से धार्मिक जुलूस निकालने से जुड़ी हुई हैं. इसके अलावा रामनवमी पूजा के दौरान भागलपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, शेखपुरा, नवादा और नालंदा में भी हिन्दू-मुस्लिम टकराव की घटनाएं सामने आई थीं.

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