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बाबरी मस्जिद पर शिया समुदाय सुन्नी के साथ, वसीम रिजवी हुकूमत का एजेंट और अपराधी : शिया मौलाना

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News Wing Ranchi, 29 November: यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के द्वारा विवादित ढांचा बाबरी मस्जिद को लेकर कोर्ट में दाखिल किए हलफनामा का शिया धर्मगुरु और रांची जफरिया मस्जिद के इमाम मौलाना सैयद तहजीबुल हसन ने विरोध किया है. उन्होंने इसे वसीम रिजवी की निजी सोच बताते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद पर देश का पूरा शिया समाज सुन्नी समुदाय के साथ है. वसीम रिजवी का बयान यूपी शिया वक्फ बोर्ड का हो सकता है, लेकिन शियाओं का नहीं. इसे मेहरबानी कर मीडिया वाले शिया समुदाय की राय नहीं बताएं. उन्होंने कहा कि रिजवी के द्वारा बाबरी मस्जिद पर दिए गए बयान से शिया समुदाय कतई सहमत नहीं है. मौलाना तहजीबुल हसन ने यह बातें संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कही, जहां सुन्नी समुदाय के सभी मसलक के धर्मगुरु मौजूद थे. कांफ्रेंस का आयोजन जाफिरया मिशन व रहबरान-ए-मिल्लत रांची की ओर से अंजुमन प्लाजा स्थित मोसाफिर खाना में किया गया था.

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गौरतलब है कि एक माह पहले यूपी शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने आयोध्या स्थित विवादित ढांचा बाबरी मस्दिज को शिया समुदाय की भी संपत्ति बताई थी, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट में उस पर स्थान मंदिर बनाने की सिफारिश की, साथ ही इसी लेकर कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया है. 

वसीम रिजवी पर हत्या समेत 51 मामले दर्ज हैं

मौलाना तहजीबुल हसन ने यूपी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी को सरकार का एजेंट बताया है. उन्होंने कहा कि हुकुमत इनसे इस तरह के बयान दिलवा रही है. वसीम रिजीव एक अपराधी छवि के व्यक्ति हैं. इनपर हत्या समेत 51 अपराधिक मामले दर्ज हैं. शिया सुन्नी के नाम पर मुस्लिमों को बांटने की कोशिश हो रही है. बाबरी मस्जिद की लड़ाई सुन्नी समुदाय लड़ता आ रहा है, और मस्जिद की संपत्ति भी इसी समुदाय की है. बाबरी मस्जिद पर हर तबके का मुसलमान एक था, एक है और एक रहेगा.

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मस्जिद पर कोर्ट का फैसला सर्वोपरिः मौलाना उबैदुल्ला

मजलिसे उलेमा बोर्ड के जेनरल सेक्रेटरी और रांची एकरा मस्जिद के ख़तीब मौलाना उबैदुल्ला क़ासमी ने वसीम रिजवी के बयान की कड़ी निंदा करते हुए यूपी हुकूमत से उन्हें शिया सुन्नी वक्फ बोर्ड से हटाने की मांग की. उन्होंने कहा कि रिज़वी के बयान का कोई भी शिया संगठन या शिया भाई सर्मथन नहीं करते हैं. सभी ने उस बयान का खंडन किया है. कासमी ने बाबरी मस्जिद के मामले को कोर्ट पर छोड़ देने की सिफारिश करते हुए कहा कि मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला सर्वोपरि है. कोर्ट का जो भी निर्णय आयेगा उसे समुदायों को मानना चाहिए. मस्जिद की प्रापर्टी किसकी है इसका फैसला कोर्ट करेगा, ना कि वसीम रिजवी. इस मौके पर मौलाना सैयद तहजीबुल हसन, मौलाना असगर मिसबाही, मौलाना शरीफ अहसन मजहरी, मौलाना तौफिक कादरी, मौलाना रिजवी अहमद कासमी, सैयद इकबाल हुसैन, अंजुम इस्लामिया रांची के महासचिव हाजी मोख्तार अहमद समेत कई लोग मौजूद थे.

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