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बकोरिया कांड का सच-06ः जांच हुए बिना डीजीपी ने बांटे लाखों रुपये नकद इनाम, जवानों को दिल्ली ले जाकर गृह मंत्री से मिलवाया

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सीएम को भी गलत जानकारी देकर जारी कराया बयान. 

डीजी सीआरपीएफ ने भी सभी को किया पुरस्कृत.

Ranchi, 10 December: आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ में 12 लोगों के मारे जाने की घटना की जांच जल्द पूरी हो, इस पर किसी ने भी ध्यान नहीं दिया. डीजीपी डीके पांडेय ने इस केस के अनुसंधान में तेजी आए, इसकी कोशिश कभी नहीं की. सीआइडी प्रमुख के पद पर ढ़ाई साल तक पदस्थापित रहे एडीजी अजय भटनागर व अजय कुमार सिंह ने भी एेसा कुछ भी नहीं किया. यही कारण है कि अब तक इस कथित मुठभेड़ में शामिल जवानों को गैलेंट्री नहीं मिल पाया. अगर मुठभेड़ सही थी, तो जवानों को गैलेंट्री मिलना ही चाहिए. पर, इस ओर ध्यान ही नहीं दिया. हुआ इसके ठीक विपरित. देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह, राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत सीआरपीएफ डीजी तक को गलत जानकारी दी गयी. यहां तक कि कथित मुठभेड़ में शामिल कोबरा के जवानों को लेकर डीजीपी दिल्ली गए. वहां पर जवानों को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलवाया. कहा गया कि जवानोंं ने बहुत बहादुरी का काम किया है और बस कुछ ही दिनों में झारखंड से नक्सलियों का सफाया होने वाला है. जबकि पुलिस के अफसर ही तब और अब उस मुठभेड़ को फरजी बता रहे हैं. जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वह भी मुठभेड़ को फरजी साबित कर रहा है.

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जांच पूरी हुए बिना बांट दी लाखों के इनाम

नौ जून की सुबह डीजीपी डीके पांडेय, तत्कालीन एडीजी अभियान एसएन प्रधान, स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता समेत अन्य सीनियर पुलिस अफसर हेलीकॉप्टर से बकोरिया पहुंच गए. वहां मरे हुए लोगों को नक्सली घोषित कर दिया. फोटो खींचवाए. इतना ही नहीं डीजीपी ने वहां मौजूद जवानों के बीच लाखोंं रुपये नकद बांट दिए. यह सब तब किया, जबकि उन्हें पता था कि किसी भी मुठभेड़ की जांच पूरी हुए बिना उसमें शामिल जवानों पर पदाधिकारियों के बीच नकद या किसी तरह का पुरस्कार बांटना गलत है. सूप्रीम कोर्ट ने इस सिलसिले में स्पष्ट आदेश जारी कर रखा है. 

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सीएम को दी गलत जानकारी 

कथित मुठभेड़ की घटना के बारे में गलत जानकारी मुख्यमंत्री रघुवर दास को दी गयी. जिसके कारण मुख्यमंत्री ने नौ जून की शाम ही एक बयान जारी कर मुठभेड़ में शामिल जवानों ंको बधाई दी और कहा कि जल्द ही राज्य से नक्सलियोंं का सफाया हो जायेगा. 

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सीआरपीएफ मुख्यालय को भी अंधेरे में रखा

घटना के कुछ दिन बाद सीआरपीएफ के तत्कालीन डीजी से भी कथित मुठभेड़ में शामिल जवानों व अधिकारियों को पुरस्कृत करा दिया गया. डीजी सीआरपीएफ का प्रशस्ति पत्र और डीजी शील्ड जिन जवानों और पदाधिकारियोंं के नाम रांची पहुंची, उसमें वे अफसर भी शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दिए बयान में मुठभेड़ को फरजी बताया है. इससे साफ होता है कि सीआरपीएफ मुख्यालय को भी गलत जानकारी दी गयी. सीआरपीएफ डीजी द्वारा जवानों व पदाधिकारियों को पुरस्कृत किया जाना, सूप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि मुठभेड़ की जांच के बाद ही उसमें शामिल जवानों व अधिकारियोंं को पुरस्कृत किया जायेगा. 

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