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बकोरिया कांड का सच-03: चालक एजाज की पहचान पॉकेट में मिले ड्राइविंग लाइसेंस से हुई थी, लाइसेंस की बरामदगी दिखाई ईंट-भट्ठे से

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Ranchi, 27 November: पलामू के सतबरवा में आठ जून 2015 को हुए कथित मुठभेड़ में 12 लोगों के मारे जाने के मामले में अब हर दिन नये तथ्य सामने आ रहे हैं. जो मुठभेड़ के फर्जी होने की ओर इशारा करता है. ताजा तथ्य यह सामने आया है कि घटना में मारे गए चालक मो. एजाज के शव की पहचान नौ जून 2015 की सुबह 6.10 बजे ही हो गयी थी. इस घटना को लेकर दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक सुबह 6.10 बजे पंचनामा के वक्त मो. एजाज के पॉकेट से उसका पर्स मिला था. जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस था. ड्राइविंग लाइसेंस से उसकी पहचान हो गयी थी. पर, घटनास्थल पर बनाए गए जब्ती सूची के तथ्य बिल्कुल अलग हैं. जब्ती सूची में यह लिखा गया है कि मृत चालक मो. एजाज का ड्राइविंग लाइसेंस घटनास्थल से 100 गज की दूरी पर स्थित ईंट-भट्ठा से बरामद किया गया.

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जब्ती सूची में जहां पर शव दिखाया गया है, उसकी एक भी तस्वीर नहीं
कथित मुठभेड़ की घटना के बाद प्राथमिकी और जब्ती सूची में जिस स्थान पर शवों की बरामदगी बतायी गयी है, उन स्थानों पर पड़े शव के साथ एक भी तस्वीर पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है. जो तस्वीरें उपलब्ध हैं, उसमें शवों को एक लाईन से जमीन पर लिटा दिए जाने का है. जब्ती सूची में दिखाया गया है कि मो. एजाज का शव स्कॉर्पियो के ड्राइविंग सीट से बरामद किया गया और सीट पर रखे तौलिया में खून लगा है. लेकिन जो तस्वीर है, उसमें सीट खाली है और तौलिया पर खून लगा हुआ नहीं है.

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प्राथमिकी में 117 खोखा मिलने की बात, जब्त एक भी नहीं
कथित मुठभेड़ की घटना के बाद पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की, उसमें घटनास्थल से गोलियों का 117 खोखा मिलने की बात कही गयी है. लेकिन घटना को लेकर जो जब्ती सूची तैयार की गयी है, उसमें घटनास्थल से जब्त किए गए खोखा का जिक्र ही नहीं है. इतना ही नहीं एक तस्वीर में एक मोबाइल फोन सही हालत में दिख रहा है, लेकिन जब्ती सूची में मोबाइल फोन को टूटा हुआ बताया गया है. जो फोन सही सलामत है, उसका जिक्र जब्ती सूची में किया ही नहीं गया. 

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सीआईडी ने नहीं निकाली मृतकों व पुलिस अफसरों के मोबाइल का सीडीआर
बकोरिया कांड की जांच शुरु में पलामू पुलिस ने की थी. बाद में यह मामला सीआईडी को सौंप दिया गया. पुलिस और सीआईडी पर अनुसंधान ठीक से नहीं करने और कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं. इस आरोप की पुष्टि इस बात से भी होती है कि ढ़ाई साल गुजरने के बाद भी सीआइडी ने कई तथ्यों की जांच ही नहीं की. सीआईडी ने उन पुलिस अफसरों के मोबाइल फोन का सीडीआर व लोकेशन नहीं हासिल किया, जिन्होंने मुठभेड़ में शामिल होने का दावा किया था. विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अगर पलामू जिला बल के पुलिस अफसरों के मोबाइल का सीडीआर और लोकेशन निकाल लिया जाए, तो यह साफ हो जायेगा कि घटना के वक्त पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर थे या पलामू शहर में.

 

 

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