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बकोरिया कांड का सच-02ः चौकीदार ने तौलिया में लगाया खून, डीएसपी कार्यालय में हुई हथियार की मरम्मती !

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NEWS WING
Ranchi, 25 November:
पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में आठ जून 2015 की रात हुए कथित मुठभेड़ (जिसमें 12 लोग मारे गए) की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने की थी. आयोग ने उस वक्त पलामू में पदस्थापित कई पुलिस पदाधिकारियों का बयान दर्ज किया था. जांच के बाद आयोग ने झारखंड के डीजीपी को पत्र लिखा था, जिसमें घटना की जांच पर सवाल खड़े किए गए थे. आयोग ने कहा था कि मामले की जांच औऱ सुपरविजन करने वाले अफसर के खिलाफ कार्रवाई करें और मामले की जांच किसी एसपी रैंक के अफसर से करायी जाए. इस बीच सूत्रों ने घटना को लेकर कई खुलासे किए हैं, जिससे यह संदेह बढ़ता जा रहा है कि आठ जून 2015 की रात बकोरिया में कोई मुठभेड़ नहीं हुई थी. पुलिस ने फरजी मुठभेड़ की झूठी  कहानी  बनायी थी. और अब सीआइडी मामले की जांच में बेवजह देरी कर रही है.

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पोस्टमार्टम हाउस में लगाया गया तौलिया में खून  !

सूत्रों के मुताबिक एनएचआरसी की जांच टीम को यह पता चला था कि शवों को एक 407 वाहन से पलामू सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस लाया गया था. पोस्टमार्टम हाउस में स्कॉर्पियो की सीट पर रखे तौलिया को 407 (जिस पर शव को लादा गया था) के डाला में जमे खून व पानी से भिंगोते हुए देखा गया. फिर उस तौलिए को खून लगा दिखाकर जब्ती सूची में दर्ज किया गया. उल्लेखनीय है कि newswing.com ने 25 नवंबर 2017 की खबर में वह तस्वीर प्रकाशित किया था, जिसमें स्कॉर्पियो  की सीट में लगे तौलिया पर कोई खून नहीं लगा दिख रहा है.

आरमोरर जमादार व सिपाही सरताज ने की  थी हथियार की मरम्मती  !
सूत्रों ने यब भी दावा किया है कि आयोग को यह जानकारी भी दी गयी है कि सतबरवा थाना के तत्कालीन प्रभारी मो. रुस्तम घटनास्थल से जब्त सामानों को लेकर बजे डीएसपी-दो के चैंबर में पहुंचे. वहीं पर आरमोरर (हथियार की मरम्मती करने वाला) जमादार और सिपाही सरताज ने हथियार को ठीक किया. उल्लेखनीय है कि newswing.com ने 25 नवंबर 2017 की खबर में घटनास्थल पर रखे हथियार की तस्वीर प्रकाशित किया था. तस्वीर में यह साफ दिख रहा है कि घटनास्थल पर रखे हथियार में किसी का मैग्जीन नहीं है, तो किसी का ट्रिगर नहीं है तो किसी में वोल्ट ही नहीं है. गौरतलब है कि पुलिस ने जब्त हथियारों को जब्ती सूची के साथ अदालत में नहीं पेश किया था. घटना के करीब एक सप्ताह बाद हथियारों को ठीक करके अदालत में पेश किया गया.

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इसे भी पढ़ेंः सीआईडी ने न तथ्यों की जांच की, न मृतकों के परिजन व घटना के समय पदस्थापित पुलिस अफसरों का बयान दर्ज किया

रात के 2.30 बजे थाना प्रभारी ने मुठभेड़ होने से इंकार किया थाः आइपीएस 
न्यूज विंग को एक सूत्र ने बताया है कि आठ जून 2015 की रात एक आइपीएस घटनास्थल के नजदीक वाली सड़क से गुजरे थे. लेकिन वहां पर उन्होंने मुठभेड़ होने जैसा कुछ नहीं देखा था.  रात के करीब 2.30 बजे डीजीपी डीके पांडेय ने उन्हें फोन किया था. डीजीपी ने उनसे कहा था कि तुम्हारे यहां सतबरवा में मुठभेड़ हुआ है. उन्होंने इस तरह की सूचना होने से इंकार किया था. डीजीपी का फोन आने के बाद उन्होंने (आइपीएस) ने सतबरवा थाना प्रभारी मो. रुस्तम को फोन किया और मुठभेड़ के बारे में पूछा. इस पर थाना प्रभारी ने किसी तरह का मुठभेड़ होने की बात से इंकार किया था. यह जानकारी भी आयोग की टीम को दी गयी थी. यहां उल्लेखनीय है कि घटना को लेकर दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने मुठभेड़ का वक्त 10-11 बजे रात बताया है.  

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