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बकोरिया कांडः मानवाधिकार आयोग ने अधिवक्ता से पूछा पहले क्यों नहीं उपलब्ध कराये तथ्य

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Ranchi: बकोरिया कांड में ताजा तथ्य सामने आया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी साईट से जांच रिपोर्ट को हटा लिया है. इसके साथ ही आयोग ने हाई कोर्ट के अधिवक्ता अशोक कुमार से पूछा है कि आपने इससे पहले आयोग के समक्ष तथ्यों की जानकारी क्यों नहीं दी थी. यहां उल्लेखनीय है कि आयोग ने बकोरिया कांड की जांच की थी. जांच में आयोग ने मामले की सीआइडी जांच पर सवाल उठाया था. आयोग ने जांच से जुड़े अफसरों पर कार्रवाई करने का आदेश भी डीजीपी को दिया था. साथ ही कहा था कि मामले की जांच एसपी रैंक के अफसर से करायी जाये. 

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आठ जून 2015 की रात पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में हुए कथित मुठभेड़ में एक नक्सली और 11 निर्दोष लोग मारे गए थे. इस मामले की सीबीआई जांच कराने को लेकर झारखंड हाई कोर्ट में याचिका पर सुनवाई पूरी हो चुकी है, आदेश सुरक्षित है. इस मामले में कई एेसे तथ्य सामने आये हैं, जिससे यह पता चलता है कि मुठभेड़ फर्जी था. हालांकि मामले की जांच कर रही सीआइडी लगातार मुठभेड़ को सही बता रही है.  

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इससे पहले पीड़ित पक्ष ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मामले की शिकायत की थी. आयोग की एक टीम ने झारखंड आकर मामले की जांच की थी. तभी यह बात चर्चा में थी कि एक एसपी रैंक के अफसर का रिश्तेदार भी जांच टीम में हैं. जांच टीम के साथ उस अफसर को भी लगाया गया था. बाद में उस अफसर को जिला में एसपी के पद पर पोस्टिंग दे दी गयी. आयोग ने अधिवक्ता अशोक कुमार को जो पत्र लिखा है, उससे यह पता चलता है कि  अधिवक्ता अशोक कुमार ने जो तथ्य आयोग को भेजे हैं, वह आयोग को पहले कभी मिला ही नहीं. जबकि अधिवक्ता ने घटनास्थल से जुड़ी वही तस्वीरें व तथ्य आयोग को भेजे हैं, जो आयोग की टीम के रांची दौरे के वक्त उपलब्ध कराये गये थे.  लेकिन अब आयोग यह पूछ रहा है कि उसके सामने इससे पहले तथ्यों की जानकारी क्यों नहीं दी गई.

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