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फैमिली कोर्ट का बड़ा फैसला: गर्भवती पत्नी को घर से निकालने पर सुनाई 22 साल की सजा

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Ahmedabad:  अहमदाबाद में एक केस की सुनवाई करते हुए 55 साल के शख्स को 22 साल की सजा सुनाई गई है. ये फैसला किसी हत्या, लूट के केस पर नहीं बल्कि अपनी गर्भवती पत्नी को घर से निकाल देने पर फैमिली कोर्ट ने सुनाई है. जी हां, गुजरात की फैमिली कोर्ट द्वारा सुनाई गई ये सबसे लंबी सजा मानी जा रही है. दरअसल शख्स ने शादी के महज 6 महीने बाद अपनी गर्भवती पत्नी को घर से निकाल दिया था, और 19 सालों से उसे किसी तरह का गुजारा भत्ता भी नहीं दिया.

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11 आवेदनों के आधार पर सजा

मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, पीड़िता और उसकी बेटी ने कोर्ट में 11 बार आवेदन किया था जिसके आधार पर फैमिली कोर्ट ने सजा सुनाई. बता दें कि दोषी पति मध्य प्रदेश निवासी है, जबकि उसकी पत्नी (50) और उसकी बेटी (28) अहमदाबाद में रहते हैं. कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस को व्यक्ति द्वारा गुजारा भत्ता नहीं देने पर सलाखों के पीछे डालने का आदेश दिया है. कानून के मुताबिक, यदि पति अपनी पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं देता है तो ही उसे जेल भेजा जा सकता है. इस विशेष केस में न ही पति की ओर से गुजारा भत्ता दिया गया और न ही कोर्ट में मुकदमा के दौरान वह कभी पेशी के लिए आया. कोर्ट ने 2000 में पीडित महिला और उसकी बेटी द्वारा दाखिल की गई 11 ऐप्लिकेशन के आधार पर सजा सुनाई है. कोर्ट ने हर आवेदन में 12 से 17 महीने की सजा दी है. 

क्या था मामला

अहमदाबाद की खानपुर निवासी पीड़ित महिला की शादी एमपी निवासी महेश राजपुरा से 1989 में हुई थी, लेकिन शादी के महज 6 महीने बाद ही एक झगड़े के दौरान दोषी पति ने अपनी पत्नी को घर से बाहर निकाल दिया था. उस समय महिला गर्भवती थी. बाद में उसने एक बेटी को जन्म दिया जो अब 28 साल की है. जब अपने पति से समझौता करने की सारी कोशिशें बेकार गईं तो 1998 में मालती ने कोर्ट में याचिका दायर की. इस पर कोर्ट ने 650 रुपये का मासिक भत्ता देने का आदेश दिया, जिसे शुरुआती कुछ महीनों तक आरोपी पति ने पूरा किया गया लेकिन बाद में अचानक भत्ता देना बंद कर दिया. 1998 में जब मामला दर्ज हुआ था तब कोर्ट ने पति को 650 रुपये का मासिक भत्ता देने का आदेश दिया था जिसकी राशि 2002 में 4500 रुपये तक बढ़ गई.

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सबसे लंबी सजा 
मामले की सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश एमजे पारिख ने कहा, ‘दोषी पति ने भेजे गये नोटिस का सम्मान नहीं किया गया. न ही उसका वकील और वह खुद जेल आया में सुनवाई के दौरान आया. इसलिए अब उसको और ज्यादा समय नहीं दिया सकता है.‘ यह गुजरात की फैमिली कोर्ट द्वारा अब तक की सबसे लंबी सजा बताई जा रही है. अधिवक्ताओं ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि साधारणतया पतियों को कोर्ट से कोई डर नहीं होता है, इसलिए यह सजा एक नाजीर पेश करेगी.‘ 

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