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फादर कामिल बुल्के का अवशेष रांची पहुंचा, संत जेवियर्स में हुआ भव्य समारोह, स्थापित की गयी प्रतिमा

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Ranchi : फादर कामिल बुल्के के पवित्र अवशेष को संत जेवियर कॉलेज गेट के सामने बने पुण्य स्थल में स्थापित किया गया. सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर भव्य समारोह में कॉलेज परिसर में स्थापित किया गया. इसके पूर्व सुबह 9 बजे से मनरेसा हाउस से संत जेवियर्स कॉलेज तक अवशेष के साथ शोभा यात्रा निकाली गयी. संत जेवियर्स कॉलेज में अवशेष फादर निकोलस टेटे और रेक्टर फादर हेनरी बारला को सौंप दिया गया. इसके बाद फादर के व्यक्तित्व पर विमर्श किया गया, जिसमें उनके हिंदी के क्षेत्र में योगदान पर चर्चा की गयी. मौके पर भाग लेने मुख्य रूप से रोम से आए जेनरल अस्सिटेंट फादर भर्नन डी कुन्हा के अलावा कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो, विशप तेलेस्फोर विलुंग शामिल थे. 

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सजे वाहन में लाया गया अवशेष, कॉलेज कैंपस में स्थापित की गयी प्रतिमा

संत जेवियर कॉलेज परिसर में गेट के सामने फादर कामिल बुल्के की प्रतिमा स्थापित की गयी

मनरेसा हाउस से संत जेवियर्स लाने के दौरान फादर कामिल बुल्के के अवशेष को फुलों से सजे वाहन में लाया गया. इस दौरान मनरेसा हाउस से कॉलेज परिसर तक दोनों ओर छात्रों और आमजनों की भीड़ थी. विदित हो कि मंगलवार को भी एयरपोर्ट से मनरेसा हाउस लाने के दौरान काफी संख्या में लोग अवशेष के दर्शन को आए थे. इस दौरान वाहन पर पुष्पवर्षा भी की गयी थी. वहीं बुधवार को कॉलेज परिसर में गेट के सामने फादर कामिल बुल्के की भव्य प्रतिमा स्थापित की गयी.

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फादर कामिल बुल्के की उपलब्धियां

  • 1955 में ए टेक्निकल इंग्लिश हिंदी ग्लौशी प्रकाशित
  • 1949 में रामकथा उत्पत्ति और विकास का प्रकाशन
  • 1968 में हिंदी अंग्रेजी कोष तैयार किया
  • 1972 में हिंदी मुक्तिदाता का प्रकाशन
  • 1973 में बेल्जियम के रॉयल अकादमी के सदस्य बने
  • 1977 में हिंदी नया विधान प्रकाशित 
  • 1974 में हिंदी में सेवाओं के लिए पदम विभूषण से सम्मानित
  • 1978 में हिंदी नीलपक्षी का प्रकाशन

फादर कामिल बुल्के एक परिचय

  • एक सितंबर 1909 को बेल्जियम के फलैंडर्स में जन्म
  • 1930 में यीशु समाजी सोसाइटी में प्रवेश 
  • 1932 में जर्मनी में जेसुइट कॉलेज में दर्शनशास्त्र में एमए
  • 1939 में ईशशास्त्र कॉर्सियोंग कॉलेज से 
  • 1941 में पुरोहिताभिषेक 
  • 1947 में इलाहाबाद विवि से एमए और डीफिल
  • 1951 में भारत की नागरिकता मिली
  • 1950 से 1977 तक रांची के संत जेवियर्स कॉलेज में हिंदी संस्कृत के विभागाध्यक्ष रहे
  • 17 अगस्त 1982 को दिल्ली में इलाज के दौरान निधन 

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