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फराओ शासकों के पिरामिड में पॉल ब्रन्टन ने गुजारी रात,आत्‍माओं से हुई बात

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Nw desk :  मिस्र के पिरामिडों का रहस्य आज भी वैसा ही बना हुआ है, जैसा पहले कभी था. फराओ शासकों की यह कला वास्तु कला विशेषज्ञों के लिए इसलिए रहस्यमय है कि उस क्षेत्र में दूर-दूर तक उस स्तर के पत्थर नहीं हैं जैसे कि उसमें प्रयुक्त हुए हैं. फिर वे इतने भारी हैं कि उन्हें उतनी ऊंचाई तक उठा ले जाना और फिटिंग में कहीं रत्ती भर भी अंतर दृष्टि-गोचर न होना मानवी श्रेय के लिए आज तो असंभव ही लगता है.  

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दुर्घटनाओं के लिए पिरामिडों का अभिशाप जिम्मेदार

मिस्र पर जब नैपोलियन ने चढ़ाई की और उसे जीता तो प्रचलित किंवदंतियों के संदर्भ में उसने इन पिरामिडों की नये सिरे से खोज की. बाद में अंग्रेजों का शासन जब उस क्षेत्र पर हुआ तो उन्होंने कब्रों के साथ दबी हुई बहुमूल्य संपदा खोज निकालने और पुरातत्व विज्ञान से संबंधित तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने की दृष्टि से भीतरी भागों की खोजबीन की पर शोधकर्ताओं की आश्चर्यजनक ढंग से ऐसी मौतें होती रहीं,  जिनका कोई प्रत्यक्ष कारण समझा नहीं जा सका. उन दुर्घटनाओं को पिरामिडों का अभिशाप माना जाता है.  इसके बाद भी साहसी लोगों ने खोजबीन आगे भी जारी रखी.   

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फराओ राजाओं की आत्माएं अभी भी पिरामिडों में विद्यमान हैं

आम जन में एक विश़्वास है कि पुरातन काल के फराओ राजाओं की आत्माएं अभी भी पिरामिडों  में विद्यमान हैं और जब तब अपने अस्तित्व का परिचय देती रहती हैं.  इसकी परख करने के लिए जो लोग किसी प्रकार उनमें घुस गये और रात्रि के दृश्य देखने के लिए रुक गये, उनमें से अधिकांश मर गये या पागल बन कर लौटे;  अभी भी उन विश्व के सात आश्चर्यों में से एक माने जाने वाले इन पिरामिडों को देखने कई व्यक्ति जाते हैं और फोटो खींचकर या इधर-उधर चक्कर लगाकर खाली लौट आते हैं.  उस क्षेत्र में रहने वाले रक्षकों या दुकानदारों के मुंह से चित्र-विचित्र कहानियां सुनने के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगता.    

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पाल ब्रन्टन को पिरामिड में आत्माएं घेरने लगीं 

इंग्लैंंड के विश्व विख्यात आत्मिकी एवं पुरातत्वविद् कथा लेखक पाल ब्रन्टन ने इस संदर्भ में एक अनोखा साहस किया और वे जान हथेली पर रखकर पिरामिडों में बनी कब्रों में रात बिताने के लिए तत्पर हो गये. साथ में चलने के लिए उनने एक मिस्री व्यक्ति से अनुरोध भी किया और लालच भी दिया लेकिन स्पष्ट इनकार कर दिया.   पाल ब्रन्टन चौकीदारों से आंख बचाकर उस कक्ष में जा घुसे, जिसमें सम्राट तूतन खामन की कब्र बनी हुई है.  कई दिन चक्कर काटने के उपरान्त ब्रन्टन ने भीतरी कक्ष में प्रवेश पा लिया तथा एक टार्च तथा चाय का थर्मस लेकर वहाँ एक पत्थर पर बैठ गये. थोड़ी रात बीतते-बीतते वहाँ उन्हें ठंड लगने लगी जबकि वह क्षेत्र बालू तपने से गरम रहता है.    थोड़ी ही देर में वहां की निस्तब्धता टूटी और भयावह आकृतियों के आगमन की सूचना मिलने लगी. घने अंधकार में भी  आत्माओं की आकृतियां उभर रही थीं.  लेकिन ब्रन्टन डरपोक नहीं थे.   

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सन्नाटा चीरते हुए दो दिव्य छायाएं प्रकट हुईं, एक राजा प्रतीत था और दूसरा पुरोहित

इसी बीच सन्नाटा छा गया.  उसे चीरती हुई दो दिव्य छायाएं प्रकट हुईं. उनमें से एक राजा प्रतीत होता था और दूसरा पुरोहित.  दोनों शांत मुद्रा में थे.  इसके बाद आत्माएं पाल ब्रन्टन को सूक्ष्म आत्मा रूप में अपने साथ ले गयीं और एक विचित्र लोक में पहुंची.   वहां डरावना जैसा कुछ नहीं था,  वरन परम शांति का साम्राज्य था और वहां के निवासी अधिक ऊंची आत्मिक स्थिति में पहुंचने के लिए प्रयत्नशील थे;  संभवतः मृतात्माओं में से जो विचारशील थे, आत्मिक दृष्टि से ऊंचे उठे हुए थे उनके लिए बना हुआ यह विचित्र क्षेत्र था.  उन आत्माओं में से जो प्रमुख थीं उनने एक ही परामर्श दिया कि बाहर से अपने को समेटो और भीतर के क्षेत्र में प्रवेश करो. वहां वह सब कुछ मिलेगा जिसकी तुम्हें तलाश है.  दिव्य क्षमताओं की उपलब्धि के लिए बाहर के किसी का आश्रय लेने की अपेक्षा यह कहीं अधिक सरल है कि अपने को समझा जाये और उसका परिशोधन किया जाये.  इतना संक्षिप्त और सारगर्भित मार्गदर्शन पाकर ब्रन्टन जैसे विद्वान का समाधान हो गया.

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पाल ब्रन्टन वापस शरीर चेतना में लौटे 

पाल ब्रन्टन वापस शरीर चेतना में लौटे तो उस क्षेत्र में विद्यमान डरावनी आत्माएं भयभीत करने की स्थिति में नहीं थीं.  हलचलें उनकी चल रही थीं पर वह सब कुछ सामान्य प्राणियों की स्वाभाविक उछल-कूद जैसा लगता रहा. भोर होते ही जैसे ही पिरामिड का फाटक चौकीदारों ने खोला, वे बाहर निकल आये और नया दृष्टिकोण लेकर वापस लौटे कि प्राणि चाहे जीवित स्थिति में हों या मृतात्मा के रूप में, अपने स्वभाव के अनुरूप ही आचरण करते रहते हैं.  उनसे न अधिक लाभ मिल सकता है,  न हानि की संभावना है.  अपनी आत्मा ही सब कुछ है.

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