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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव और विधायक निर्मला देवी को आरोप मुक्त करने पर फिर से विचार करने का सेशन कोर्ट को आदेश

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Ranchi, 04 December: हाई कोर्ट ने हजारीबाग सेशन कोर्ट को आदेश दिया है कि वह पूर्व मंत्री योगेंद्र साव व विधायक निर्मला देवी के खिलाफ पारित आदेश पर पुनर्विचार करे. क्योंकि सेशन कोर्ट द्वारा जारी आदेश कानून की नजर में सही नहीं है. इसलिए आदेश को निरस्त किया जाता है. हाई कोर्ट ने ट्रायल सेशन कोर्ट को आदेश दिया है कि वह चार सप्ताह के भीतर इस पर पुनर्विचार (फिर से विचार) करे. वर्ष 2015 में हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र के ढ़ेंगा में हुई फायरिंग के मामले में ट्रायल कोर्ट ने नौ जून को योगेंद्र साव और निर्मला देवी के डिस्चार्ज पीटीशन को खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया है. उल्लेखनीय है कि ढ़ेंगा में हुई पुलिस फायरिंग को लेकर बड़कागांव थाना में कांड संख्या-167/2015 दर्ज किया गया था. इस मामले का सेशन ट्रायल नंबर 278/2016 है. हाईकोर्ट जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने पारित आदेश में अन्य बातों के अलावा यह भी कहा है कि सेशन्स कोर्ट ने अपने पारित आदेश में यह जिक्र नहीं किया है कि इन दोनों के विरुद्ध प्राइमा फेसी साक्ष्य है अथवा नहीं. इसलिए सेशन ट्रायल कोर्ट इन दोनों की याचिका पर चार सप्ताह के अंदर पुनर्विचार करे. यह आदेश 31 अक्तूबर को पारित हुआ था. जो एक दिसंबर को जारी हुआ. 

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एनटीपीसी के पुनर्वास कॉलोनी के पास हुई थी घटना

14 अगस्त 2015 को हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र के ढ़ेंगा में बनी एनटीपीसी पुनर्वास कॉलोनी के पास हुए गोली काण्ड हुई थी. ग्रामीणों ने योगेन्द्र साव एवं निर्मला देवी के नेतृत्व में एनटीपीसी की कोल परियोजना के ली गयी भूमि के लिए उचित मुआवजा देने के मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किया था. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद स्थिति हिंसात्मक हो गयी थी. पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किया गया और गोली चलाई गयी. इसके बाद भीड़ को भडकाने, तेज हथियार चमकाने और सरकारी लोगों को उनके काम में बाधा उत्पन्न करने आदि विभिन्न आरोपों के तहत योगेन्द्र साव, निर्मला देवी व अन्य पर मुकदमा दायर किया गया था.

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पुलिस ने किया था चार्जशीट, अदालत ने रिजेक्ट किया था आवेदन

इस मामले में पुलिस ने अनुसंधान पूरा कर योगेन्द्र साव, निर्मला देवी एवं अन्य के खिलाफ आदालत में आरोप पत्र समर्पित किया था. रिचा श्रीवास्तव के सेशन ट्रायल कोर्ट में आरोप गठन से पहले योगेंद्र साव व निर्मला देवी ने एक आदेवद दिया था. जिसमें कहा था कि उन दोनों के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है. इसलिए आरोप को खारीज किया जाये. आदालत ने दोनों के अावेदन को रिजेक्ट कर दिया था. जिसके बाद दोनों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया था. 

कोई मेटेरियल एविडेंस नहीं

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान योगेन्द्र साव और निर्मला देवी का पक्ष रखते हुए उनके वकील अभिषेक कुमार गुप्ता ने कहा कि इस केस में दोनों पति-पत्नी के खिलाफ कोई मटेरियल एविडेंस नहीं है.  जिससे अपराध से दोनों को शामिल बताने का साक्ष्य नहीं मिलता है. ट्रायल कोर्ट ने दोनों के डिस्चार्ज पीटिशन को खारिज कर दिया है. सरकार का पक्ष रखते हुए सरकारी वकील तापस राय ने इसका विरोध किया था. 

 

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