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पीएम मोदी को लोजपा सांसद महबूब अली कैसर की नसीहत- गिरेबान में झांके बीजेपी, क्यों दूर हो रहे सहयोगी ?

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News Wing Desk

2019 का चुनावी दंगल अभी दूर है, मगर उसको लेकर देश में नये सियासी समीकरण गढ़ने और नयी संभावनाओं को तलाशने का दौर जरूर शुरू हो गया है. जो कल तक दोस्त थे, अब विरोधी बनने लगे हैं, जो कल तक कट्टर दुश्मन थे, वे अब याराना के गीत गा रहे हैं. इसे राजनीति का संक्रमण काल भी कह सकते हैं, जिसमें कुछ जुड़ता है या फिर टूटता है, अथवा दोनों होता है. यह चर्चा इसलिए भी प्रासंगिक है क्योंकि एक तरफ तमाम विरोधी पार्टियां आपसी गतिरोध छोड़कर एकजुट होने की जुगत में हैं, वहीं केंद्र में सत्तारूढ एनडीए के कुछ सहयोगी दलों ने अलग राह पकड़ ली है और कुछ इस पर विचार कर रहे हैं, जो बीजेपी के लिए चिंता का विषय भी है.” 

अपने अंदर झांककर देखे बीजेपी : महबूब अली कैसर

टीडीपी के एनडीए से अलग होने और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की खबरों के बाद एनडीए के कई सहयोगियों ने पीएम मोदी पर गहरा विश्वास जताया है और एनडीए को एकजुट बताया है. लेकिन इस बीच बिहार में एनडीए की सहयोगी और केंद्र सरकार में शामिल लोजपा के मुस्लिम सांसद महबूब अली कैसर ने कहा है कि बीजेपी को अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि आखिर क्यों सहयोगी एनडीए छोड़कर जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि लोकसभा उप चुनाव के नतीजों से भी यह बात साफ हो चुकी है कि बीजेपी को यूपी में बड़ा झटका लगा है. ऐसे में बीजेपी को अपने अंदर झांकना चाहिए.

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मोदी

 

जेडीयू, शिवसेना से बीजेपी को थोड़ी राहत

हालांकि बिहार से एनडीए के दूसरे सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड ने बीजेपी के टेंशन को थोड़ा कम किया है. जेडीयू के महासचिव के. सी. त्यागी ने का कहना है कि हमलोग बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के कामकाज से खुश हैं. उन्होंने जेडीयू के एनडीए से बाहर जाने की किसी भी संभावना से इन्कार किया है. इधर, एनडीए से अलग होने वाली शिवसेना के रुख से भी बीजेपी को थोड़ी राहत मिली होगी क्योंकि शिवसेना आंध्र की दो पार्टियों- टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस द्वारा लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने जा रही है. शिवसेना नेता संजय राउत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि न तो टीडीपी और न ही वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे पर बातचीत की है. शिवसेना ने अविश्वास प्रस्ताव को नो सीरियस मैटर करार दिया है.

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बढ़ते असंतोष पर मंथन जरूरी

इसमें संदेह नहीं कि बिहार में जीतनराम मांझी की पार्टी हमऔर आंध्र में टीडीपी के अलग राह पकड़ने या मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से फिलहाल मोदी सरकार को कोई नुकसान नहीं होने वाला. मगर जिस रफ्तार से एनडीए के घटक दलों का असंतोष बढ़ रहा है, वो बीजेपी के लिए अच्छा संकेत नहीं है. ऐसी ही परिस्थितियों को लेकर लोजपा के महबूब अली कैसर ने बीजेपी को अपने गिरेबान में झांकने की नसीहत दी है.

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