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पारा टीचर हत्याकांड : आरोपी विधायक एनोस एक्का के खिलाफ एक साल से बंद है सुनवाई

Ranchi : विधायक एनोस एक्का पर पारा टीचर मनोज की हत्या के मामले में दायर की गयी याचिका पर य़ेक साल से सुनवाई बंद है. दरअसल पारा टीचर की हत्याकांड के अभियुक्त उग्रवादी बारूद गोप को सरकारी गवाह बनाया गया और इस पर कानूनी विवाद होने पर हाईकोर्ट ने अपनी फैसला सुरक्षित रख लिया. जबकि एनोस एक्का  ने बारूद गोप को सरकारी गवाह बनाये जाने के बाद मामले में कोर्ट में चुनौती दी थी.वहीं जब इस मामले पर सुनवाई हुई और पहली तारीख पड़ी तो सरकार की ओर से कोई वकील कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ. उसके बाद टीचर मनोज के पिता ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है और हाईकोर्ट में लंबित हत्या के इस मामले को जल्दी ही निपटाने के निर्देश देने का आग्रह किया है.

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मनोज के पिता ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर किया आग्रह 

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में मनोज के पिता ने  लिखा है कि विधायक एनोस एक्का ने 24 नवंबर 2014 को PLFI के उग्रवादियों की मदद से उनके बड़े बेटे मनोज को पहले अगवा किया और फिर उसकी हत्या करवा दी. वहीं पुलिस ने जांच में हत्या के सभी सबूतों को इक्ट्ठा किया और इस मामले में विधायक सहित PLFI  के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया और पुलिस की ओर से इस हत्याकांड में लिप्त उग्रवादी बारूद गोप को सरकारी गवाह बनाने की बात कही. वहीं कोर्ट ने भी इसे स्वाकीर कर लिया. लेकिन विधायक ने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और कोर्ट ने याचिका 92-16 पर चार जनवरी को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. इसपर मनोज के पिता ने अपने पत्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि मामले को जल्दी ही निबटाने के निर्देश दिये जायें.ताकि उन्हें न्याय मिल सके.

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दूसरी ओर उग्रवादी बारूद गोप ने सेशन ट्रायल केस नंबर 29-2015 में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन दिया था. वहीं सत्र न्यायालय में सात अप्रैल 2016 को सरकारी वकील और विधायक के वकील की दलील सुनने के बाद बारूद की अर्जी स्वीकार कल ली और सरकारी गवाह बनाने का फैसला कर लिया. लेकिन इसके बाद एनोस एक्का ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. वहीं 23 जून 2016 को इस मामले में न्यायामूर्ति आर मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई हुई स मामले में विधायक की ओर से कहा गया कि बारूद गोप ही हत्या का आरोपी है और उसके खिलाफ 50 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज है. तो इस स्थिती में उसे गवाह नहीं बनाया जाना चाहिए. वहीं सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की र से की भी वकील हाजिर नहीं हुआ तो हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद निचली अदालत के आदेश पर रपोक लगा दी.                  

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