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पलामू: सांसद आदर्श गांव में बिना शिक्षक चलता है उच्च विद्यालय

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News Wing
Daltongagj, 13 December:
  राज्यसभा सांसद धीरज साहू द्वारा बनाया गया आदर्श गांव के करगढ़-द्वारिका में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है. यहां स्थापित उच्च विद्यालय बिना शिक्षक के संचालित होता है. यहां दो शिक्षक कार्यरत है, लेकिन दोनों अपनी सेवा नहीं देते. भेड़-बकरियों की तरह एक ही कमरे में कक्षा एक से दस तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है. सबसे बड़ी बात है कि इस विद्यालय में शिक्षक नहीं आते. गांव का ही एक युवक बच्चों को पढ़ाने का काम पूरा करता है.

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शिक्षा के नाम पर की जाती है खानापूर्ति

शोर-शराबे में बच्चे पढ़ायी नहीं कर पाते हैं और शिक्षा ग्रहण करने की खानापूर्ति पूरा कर अपने घर चले जाते हैं. प्रतिदिन उपस्थिति नहीं बनाए जाने के कारण बच्चों को उनका रोल नंबर तक मालूम नहीं है. नियमानुसार यहां दो शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन एक शिक्षक भी यहां सेवा नहीं देते. महीने में मुश्किल से तीन से चार दिन प्रधानाध्यापक आते हैं और कागजी खानापूर्ति करके चले जाते हैं. इस विद्यालय में तीन सौ से अधिक बच्चे नामांकित हैं. लेकिन फिर भी पढ़ाई की व्यवस्था यहां ठप है.

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नक्सलियों से भय खाते हैं शिक्षक

पांकी मुख्यालय से लगभग 9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आदर्श पंचायत केकरगढ़ का द्वारिका गांव आज भी विकास का बांट जोह रहा है. सुदूरवर्ती और नक्सल प्रभावित इस गांव में नक्सलियों का भय व्याप्त है. द्वारिका गांव में राजकीयकृत उच्च विद्यालय है, लेकिन यहां एक भी शिक्षक पढ़ाने नहीं आते हैं. नक्सलियों का डर इतना ज्यादा है कि शिक्षक भी यहां ठहरने से डरते हैं. प्रधानाचार्य विनय कुमार पांडे महीने में सिर्फ दो या तीन बार आकर खानापूर्ति करते हैं. वे विद्यालय में मात्र दो से तीन घंटे ही व्यतीत करते हैं. वहीं पदस्थापित सहायक शिक्षक नंद कुमार पांडे पदस्थापन के दिन बाद से मात्र एक दिन विद्यालय पहुंचे हैं. उसके बाद वह कभी भी विद्यालय नहीं आए हैं. ऐसा नहीं है कि पुलिस इस इलाके में अभियान नहीं चलाती है. समय-समय पर पुलिस इस इलाके में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, लेकिन नक्सलियों के खौफ के आगे सारी कार्रवाई शिथिल पड़ जाती है.

इधर कक्षा अष्टम की छात्रा संध्या कुमारी, छाया कुमारी व पूनम कुमारी ने बताया कि कई वर्षों से विद्यालय में उपस्थिति नहीं बनायी गयी है. उन लोगों को अपना रोल नंबर तक पता नहीं है.

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गांव का युवक पढ़ता है बच्चों को

लगातार शिक्षकों के गायब रहने के कारण गांव के शिक्षिक युवक रंजीत कुमार यादव सभी छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का काम करता है. करीब डेढ़ वर्ष से रंजीत यहां सेवा दे रहा है. रंजीत ने बताया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य उसे पांच हजार रूपया महीना देते हैं. वर्ष 2008 में नक्सलियों ने उच्च विद्यालय के भवन को उड़ाने की कोशिश की थी, उसके बाद से विद्यालय एक ही कमरे में संचालित हो रहा है. बाकि का कमरा गौशाला बना हुआ है.

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ट्यूशन कर पढ़ायी पूरी करते हैं छात्र

दसवीं के छात्र आशीष कुमार व धीरेंद्र कुमार यादव ने बताया कि एक ही कमरे में सारे क्लास चलने के कारण हल्ला ज्यादा होता है. इस वजह से वो लोग विद्यालय नहीं आते हैं. ट्यूशन कर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं.

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