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पलामू : रेलवे ने बंद की ट्रेस पासिंग, कटा 30 गांवों का संपर्क, आंदोलन की तैयारी में ग्रामीण 

Palamu : बरवाडीह-गढ़वा रोड रेलखंड पर लालगढ़ और राजहरा स्टेशन के बीच पंजरी खुर्द गांव के पास ट्रेस पासिंग बंद कर दिए जाने से 30 गांवों का आवागमन ठप हो गया है. ग्रामीणों में इसे लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे अपनी मनमानी बंद करे और जल्द रेल फाटक को चालू करे. ग्रामीणों का यह भी कहना है कि रेल फाटक से जुड़कर गांव में सड़क आती है. ऐसे में फाटक बंद रहने से गांवों का संपर्क कट गया है. वहीं रेलवे का कहना है कि आये दिन हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

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क्या हो रही परेशानी

लोगों का कहना है कि लालगढ़ तक जाने के लिए नौ करोड़ की सड़क बनी है, पहले लोग इसी रास्ते से फाटक पार करते लोग गांव पहुंचते थे. इतना ही नहीं लालगढ़ में करीब छह करोड़ की लागत से आईटीआई और हॉस्पिटल बना है. जब वहां तक जाने के लिए सड़क ही नहीं रहेगी तो उतनी राशि खर्च करने का क्या औचित्य है? उसी सड़क से गढ़वा और पलामू जिले को जोड़ने के लिए कोयल नदी पर सरकार करीब 70 करोड़ की लागत से पुल बनवा रही है. फाटक बंद होने से 30 गांवों की आवाजाही बंद होने से सबकी चिंता बढ़ गयी है कि शादी या फिर किसी की बीमारी की हालत में गाड़ी कैसे गांव पहुंचेगी ?

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क्यों बंद किया गया रेल फाटक

हाल के दिनों में इस ट्रेस पासिंग पर कई रेल दुर्घटनाएं होते-होते बची है. बीते दिनों एक शराबी चालक ने लापरवाही बरतते हुए पिकअप वैन रेलवे ट्रैक पर फंसा दिया था, जिससे दो से तीन एक्सप्रेस ट्रेन और एक पैसेंजर ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गयी थी. रेलवे के इंजीनियरिंग सेक्शन ने लगातार हो रही दुर्घटनाओं और बन रही संभावनाओं को देखते हुए रेलवे फाटक को बंद कर दिया है. रेलवे का मानना है कि ग्रामीण अनाधिकृत रूप से रेलवे लाइन पार करते हैं. सड़क भी दोनों तरफ से बना दी गयी है, लेकिन रेलवे लाइन पार करने का स्थायी साधन विकसित नहीं किया गया है. अंडरग्राउंड सड़क बनानी होगी, तभी इसका समाधान हो सकता है. आन्दोलन से स्थायी समाधान नहीं हो सकता.

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रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति करेगी आन्दोलन

रेलवे से जुड़ी समस्याओं को लेकर काफी सक्रिय रहा रेल उपभोक्ता संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने रेल प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि एक पखवाड़े के भीतर फाटक पर लगाये अवरुद्ध को नहीं हटाया गया तो समिति बाध्य होकर वहां के ग्रामीणों के साथ उसे उखाड़ कर आवागमन सुचारू करेगी, जिसकी सारी जबावदेही रेल प्रशासन पर होगी. उन्होंने कहा कि इस समस्या के निदान के लिए समिति डेढ़ दशक से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करते आ रही है, वावजूद रेल प्रशासन और सूबे की सरकार जन भावनाओं को कुचलते आ रही है. सिंह ने रेल सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि उसकी कुंभकर्णी नींद नहीं खुलती है तो यहां 30 गांव की जनता स्वयं रास्ता तय करेगी.

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क्या कहते हैं डीआरएम

डीआरएम मनोज कुमार अखौरी का कहना है कि रेल प्रशासन तैयार है, लेकिन राज्य सरकार की निधि से ही उसे बनाया जा सकेगा. वहां के लोगों की परेशानी से वे खुद वाकिफ हैं, लेकिन रेल प्रशासन तय नियमावली के तहत की कुछ करने को कटिबद्ध है.

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