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पलामू : यहां चलता है आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल 

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Daltonganj : अंधविश्वास दूर करने के लिए सरकार जागरूकता पर लाखों रूपये खर्च कर रही है, लेकिन झारखंड के पलामू जिले में तमाम कोशिशें फेल होती नजर आती हैं. जिला मुख्यालय डालटनगंज से 85 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद अनुमंडल अंतर्गत हैदरनगर में आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल करीब 65 वर्षों से लगातार चलते आ रहा है. 

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हकीकत में दिखते हैं प्रेत आत्माएं

आपने भूतों की कहानियां घर के बड़े बुजुर्गो से काफी सुनी होगी. किताबों में पढ़ा भी होगा और फिल्मों में देखा भी होगा. लेकिन पलामू के हैदरनगर में भूतों की हर तरह की हरकत सच में देखने को मिलती है. फिर भी पलामू प्रशासन इस बात से बेखबर है. आप देखकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे. यहां कथित भूत प्रेत बाधा से पीड़ित लोग नाचते-झूमते हैं.

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भारी भीड़ उमड़ती है 

जिस किसी बच्चे, स्त्री एवं पुरुषों पर कथित भूतों का छाया रहता है, वे भूतों से छुटकारा पाने के लिए इस जगह पर आते हैं और उन्हें यहां आने के बाद भूतों से पूर्ण रूप से छुटकारा मिल जाता है. ऐसा आने वाले लोग मानते हैं. इस स्थान पर पूरे भारत के हर कोने से लोग आते हैं और अपने कष्टों से निवारण पाते हैं.

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कब-कब लगता है मेला  

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इस जगह पर साल में दो बार चैती नवरात्री एवं शारदीय नवरात्र के एकम से नौवमी तक बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. इस जगह पर ज्यादातर उन्ही लोगों की भीड़ होती है जिसपर भूतों का साया होता है. हैदरनगर के जिस जगह पर भूत मेला लगता है वहीं पर देवी मां का विशाल मंदिर स्थापित है. इस मंदिर के पास एक जिन बाबा का मजार भी है, जिसके कारण लोगों का मानना है कि यहां भूतों-प्रेतों से छुटकारा मिलाना और भी आसान हो जाता है.

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ओझा-गुणी एवं डायन की सिद्धि प्राप्त करते हैं लोग 

इस भूत मेले में दूर-दूर से आकर बहुत से लोग ओझा-गुनी एवं डायन की सिद्धि प्राप्त करते हैं. नवरात्री के समय यहां पर भीड़ इतनी काफी हो जाती है कि लोग साड़ियों एवं चादरों से तम्बू बनाकर रहते हैं. इन जगहों पर रहने वाले लोगों का कहना है कि जब रात होती है तब इसके आस-पास के इलाको में भूतों के रोने की आवाज सुनाई पड़ती है. इस स्थान पर लोग डर की वजह से रहना नहीं चाहते हैं. इस जगह पर वही लोग निवास करते हैं जो शुरु से ही इस जगह पर रहते आ रहे हैं. इस मंदिर परिसर में एक अग्नि कुंड स्थापित है. जिन लोगों पर भूत-प्रेत की छाया रहती है वो नाचने एवं झूमने लगते हैं. इस स्थान पर लोगों के शरीर में छिपी आत्मा अनेक प्रकार के करतब दिखाने लगती है, जिसे देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं. 

देश मंगल पर पहुंच चुका है पर लोगों के जीवन से मंगल कोसों दूर है. इक्कीसवीं सदी के इस युग में मन पर अन्धविश्वास हावी है. तरक्की करना तब सार्थक सिद्ध होगा जब लोगों के मानस पटल से अन्धविश्वास दूर होगा. आज के इस वैज्ञानिक युग में भी लोगों का इस तरह का आस्था और अंधविश्वास का खेल देखने को मिल रहा है जहां लोग दवा न कराकर दुआ के लिए पहुंच रहे हैं और मां के प्रति आस्था रख रहे हैं.

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