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पलामूः सरैया मध्य विद्यालय में एक शिक्षक के भरोसे 155 विद्यार्थी, बर्बाद हो रहा है बच्चों का भविष्य

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News Wing Palamu, 28 November: सरकार भले ही बच्चों की उच्च एवं गुणवतायुक्त शिक्षा के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च कर रही है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में बच्चों को सही और समय पर शिक्षा नहीं मिल पा रही है. स्कूली बच्चे सिर्फ मध्याह्न भोजन खाने के लिए स्कूल जा रहे हैं. कई बच्चे तो स्कूल में शिक्षकों के नहीं रहने के कारण विद्यालय जा नहीं पा रहे हैं. कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां शिक्षकों की बाढ़ है तो कहीं अकाल पड़ा हुआ है. जिले के नक्सल प्रभावित पांकी प्रखंड के सुदूरवर्ती सरैया राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था का बुरा हाल है. स्कूल में वर्ग एक से आठ तक की कक्षा चलती है. यहां कुल 155 विद्यार्थी विभिन्न कक्षाओं में नामांकित हैं, लेकिन सबसे चैंकाने वाली बात है कि डेढ़ सौ बच्चों पर मात्र एक पारा शिक्षक ही कार्यरत हैं. सवाल उठता है कि 155 बच्चों को मात्र एक शिक्षक कैसे पढ़ा सकता है? यही नहीं शिक्षक के बीमार पड़ने या कहीं किसी जरूरी काम से बाहर चले जाने पर स्कूल अक्सर बंद रहता है.

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शिकायत और आंदोलन का कोई असर नहीं 

गांव के समाजसेवी गणेश सिंह समेत अन्य कई ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल में मात्र एक पारा शिक्षक बढ़ावन सिंह कार्यरत हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अभाव में बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. उन्होंने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति के लिए कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लिखित शिकायत की गयी. आंदोलन भी किया गया. इसके बाद एक सरकारी शिक्षक की प्रतिनियुक्ति हुई है, लेकिन उनका डेपुटेशन खत्म होने के बाद वे अपने मूल विद्यालय में लौट गए. उनके जाने के बाद स्कूल में मात्र एक पारा शिक्षक बढ़ावन सिंह बच गए हैं. इस पारा शिक्षक के भरोसे ही 155 भविष्य टिका हुआ है.

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आन्दोलन के मूड में ग्रामीण और बच्चे 

ग्रामीणों ने बताया कि यदि स्कूल में एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई तो वे अपने बच्चों के साथ सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन करेंगे. इसकी जबाबदेही शिक्षा विभाग के अधिकारियों की होगी. इधर, बच्चों ने बताया कि शिक्षक के अभाव में स्कू में पढ़ाई नहीं होती. एक शिक्षक डेढ़ सौ बच्चों को एक साथ नहीं पढ़ा सकते हैं, इसलिए स्कूल अवधि में ज्यादातर समय वे खेलते रहते हैं. मध्याहन भोजन खाने के बाद घर चले जाते हैं. यह सिलसिला हर दिन जारी रहता है.

शिक्षक नहीं आना चाहते सरैया मध्य विद्यालय 

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कोई भी शिक्षक सरैया राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में अपना योगदान नहीं करना चाहते हैं. यदि किसी शिक्षक को सरैया स्कूल में प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है तो शिक्षक कोई उपाय लगाकर अपनी प्रतिनियुक्ति दूसरे स्कूल में करा लेते हैं. डेपुटेशन में भी कोई शिक्षक स्कूल में योगदान नहीं करते हैं. सूत्र बताते हैं कि कुछ वर्ष पूर्व सरैया स्कूल के शिक्षक की पिटाई कर दी गयी थी. हमेशा यह विद्यालय विवादित रहा है. यही कारण है कि कोई शिक्षक इस स्कूल में अपनी प्रतिनियुक्ति नहीं कराते हैं.

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जल्द होगी शिक्षकों की नियुक्ति: बीपीओ

पांकी के बीपीओ सुरेन्द्र कुमार हिमांशु ने बताया कि सरैया मध्य विद्यालय में शिक्षक की कमी के मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. जल्द ही वहां दूसरे विद्यालय से शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी.

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