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न्यूज विंग की खबर का असर, पाकुड़ के बदहाल बीड़ी मजदूरों की दशा पर सरकार के कान हुए खड़े

Ranchi : न्यूज विंग ने 21 नवंबर 2017 को एक खबर ‘पाकुड़: परिवार चलाने के लिए महिलाएं बीड़ी बनाने को मजबूर, बच्चे भी पढ़ाई छोड़ बनाते हैं बीड़ी’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की थी. झारखंड सरकार ने न्यूज विंग की खबर को गंभीरता से लिया और एक जांच एजेंसी से जांच करायी. जांच की रिपोर्ट में एजेंसी ने न्यूज विंग की खबर में प्रकाशित तथ्यों  को सही पाया.

जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकुड़ जिला में लगभग 6 बीड़ी फैक्ट्री है, जिसमें 100 मजदूर काम करते हैं और बीड़ी बांधने वाले मजदूरों की संख्या हजारों में है.

Ranchi : न्यूज विंग ने 21 नवंबर 2017 को एक खबर पाकुड़: परिवार चलाने के लिए महिलाएं बीड़ी बनाने को मजबूर, बच्चे भी पढ़ाई छोड़ बनाते हैं बीड़ी शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित की थी. झारखंड सरकार ने न्यूज विंग की खबर को गंभीरता से लिया और एक जांच एजेंसी से जांच करायी. जांच की रिपोर्ट में एजेंसी ने न्यूज विंग की खबर में प्रकाशित तथ्यों  को सही पाया.

जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकुड़ जिला में लगभग 6 बीड़ी फैक्ट्री है, जिसमें 100 मजदूर काम करते हैं और बीड़ी बांधने वाले मजदूरों की संख्या हजारों में है.

Sanjeevani

इसे भी पढ़ें : पाकुड़: परिवार चलाने के लिए महिलाएं बीड़ी बनाने को मजबूर, बच्चे भी पढ़ाई छोड़ बनाते हैं बीड़ी

रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि इस काम में मुस्लिम समुदाय के मजदूर भी बीड़ी बांधने के रोजगार से जुड़े हैं, जिस कारण पढ़ाई छूट जाती है. मुस्लिम समुदाय के बच्चे़ ज्यादातर मदरसों में पढ़ते हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों का अनुपात कम दिखता है. बीड़ी बांधने का कारोबार ठेकेदारी प्रथा जैसी है, ठेकेदार द्वारा केंदुआ पत्ता और दूसरी सामग्री बीड़ी मजदूरों तक पहुंचायी जाती है. बीड़ी बनाने वाले मजदूरों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ता है, जिसके उपचार के लिए जिला में खोले गये अस्पातल आज भी बंद पड़ा है.

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श्रम कानून की हो रही अवहेलना

मजदूरों की मजदूरी दर भुगतान में श्रम कानूनों की अवहेलना करते हुए मजदूरी भुगतान किया जाता है, जो काफी कम है. जिले में श्रम कानून दम तोड़ चुकी है. करीब 50 हजार बीड़ी श्रमिकों का शोषण बदस्तूर जारी है और बीड़ी कंपनियां प्रतिदिन तीन करोड़ से अधिक बीड़ी का उत्पादन करती है. जानकारों का यह भी कहना है कि यहां तैयार बीड़ी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व अन्य प्रांतों में भेजा जाता है. बीड़ी बनाने वाले मजदूरों को प्रति एक हजार बीड़ी बनाने के एवज में 158 रुपये भुगतान करने का प्रावधान है, लेकिन कंपनी की ओर से महज 125 रुपये का ही भुगतान किया जाता है. स्थानीय श्रमिक संगठन इन मजदूरों को बोनस, ग्रेच्यूटी व अन्य सुविधाएं नहीं दिला पाता है.

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