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न्यायाधीश लोया की मौत मामले की जांच की मांग वाली अर्जियों पर कोर्ट ने फैसले को रखा सुरक्षित

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New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की कथित रहस्यमय मृत्यु की एक स्वतंत्र जांच की मांग वाली विभिन्न अर्जियों पर शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. ज्ञात हो कि लोया सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवायी कर रहे थे. उनकी एक दिसम्बर 2014 को नागपुर में तब कथित रूप से दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गयी थी. यह घटना तब घटी थी जब वह एक सहयोगी की पुत्री के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए गये थे.

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जांच की मांग वाली याचिकाओं का महाराष्ट्र सरकार ने किया था विरोध

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की एक पीठ ने एक विस्तृत सुनवायी के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. लोया की मृत्यु की जांच की मांग वाली याचिकाओं का महाराष्ट्र सरकार ने विरोध किया था.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था निष्पक्ष होनी चाहिये जांच

जस्टिस लोया की मौत की जांच के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2018 में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा था कि इस केस की निष्पक्ष जांच होनी चाहिये. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों से कहा था कि वह जस्टिस लोया मामले में ऐसे दस्तावेज एकत्र करें, जिन्हें उस वक्त तक जमा नहीं किया गया था. साथ ही उन्हें कोर्ट को सौंपने को भी कहा था. कोर्ट ने याचिकाओं में उठाये गये मुद्दों को गंभीरबताते हुये कहा था कि हमें सभी दस्तावेज बहुत ही गंभीरता से देखने होंगे.

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लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर उठाए गए सवाल

मालूम हो कि बृजगोपाल लोया के परिजनों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए  The Caravan पत्रिका में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में लोया की मौत की संदेहास्पद परिस्थितियों पर सवाल उठाये गये थे. इस रिपोर्ट के प्रकाशित किये गये हिस्से में रिपोर्टर से बात करते हुए लोया की बहन ने बताया कि उस समय बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहित शाह ने उनके भाई बृजगोपाल लोया को पक्ष में फैसला देने के लिए 100 करोड़ रुपये का ऑफर दिया था.

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जमीन, घर और पैसे का लोया को मिला था ऑफर

लोया की बहन अनुराधा बियानी के मुताबिक, मोहित शाह बृजगोपाल लोया को देर रात में कॉल करके सादे कपड़ों में मिलने के लिए कहते, साथ ही जल्दी और पॉजिटिव फैसला देने का दबाव बनाते थे. अनुराधा के अनुसार मोहित शाह ने उनके मनमुताबिक फैसला देने के एवज में खुद 100 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव लोया के सामने रखा था. अनुराधा ने यह भी बताया था कि मोहित शाह ने लोया से कहा था कि अगर फैसला 30 दिसंबर से पहले आता है तो इस पर किसी का ध्यान नहीं जायेगा क्योंकि उस समय कोई और ऐसी सनसनीखेज स्टोरी होगी, जो सुनिश्चित करेगी कि इस बात पर लोगों का ध्यान न जाए. अनुराधा की इस बात का समर्थन बृजगोपाल लोया के पिता ने भी किया है. उन्होंने रिपोर्टर को बताया कि उनके बेटे को पैसों का ऑफर मिला था. उन्होंने का कि उनके बेटे को यह बताया था कि तुम्हें मुंबई में घर चाहिये, कितनी जमीन चाहिये, कितना पैसा चाहिये, उसे इस तरह के प्रस्ताव मिलते थे. लेकिन लोया के पिता स्पष्ट करते हुये कहा था कि उनका बेटा ऐसे किसी प्रस्ताव के सामने नहीं झुका था. उन्होंने कहा था कि उसने मुझे बताया कि मैं या तो इस्तीफा दे दूंगा या ट्रांसफर ले लूंगा. फिर गांव चला जाऊंगा और खेती करूंगा.

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मामले में अमित शाह बरी

The Caravan की यह रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्टर द्वारा मोहित शाह और अमित शाह दोनों को सवाल भेजे गये थे, लेकिन रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक दोनों ही पक्षों से कोई जवाब नहीं दिया गया. लोया की मौत के बाद एमबी गोसवी को इस केस की जिम्मेदारी दी गयी थी, जिन्होंने 15 दिसंबर को सुनवाई शुरू की. मिहिर देसाई के मुताबिक, गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की अमित शाह से आरोप हटाने की दलील 3 दिन सुनीं, जबकि सीबीआई जो कि मुख्य जांच एजेंसी थी, उसकी बहस 15 मिनट में ही खत्म हो गयी. सुनवाई 17 दिसंबर को खत्म हुयी, जिसके बाद गोसवी ने अपना आदेश सुरक्षित रखा. और फिर 30 दिसंबर 2014 को गोसवी ने बचाव पक्ष के वकीलों की बात को सही मानते हुए फैसला सुनाया कि सीबीआई राजनीतिक उद्देश्यों के चलते आरोपी को फंसा रहा है. इसके बाद अमित शाह इस मामले से बरी हो गये

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