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नौकरीपेशा महिलाओं की तुलना में हर सप्ताह 42 घंटे अधिक काम करती है घरेलू महिला

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Kumari Neha

Ranchi : जब भी महिलाओं की बात आती है तो जहन में एक ऐसी तस्वीर आती है, जिसमें एक महिला के बहुत से हाथ दिखाये गये हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि हर हाथ कोई ना कोई काम करते हुए दिखाया गया है. कुछ हाथ घरेलू कार्य जैसे सफाई, खाना बनाना और तो कुछ बच्चों की देखभाल करते नजर आते हैं,  उस तस्वीर को देखकर ऐसा लगता है कि महिलाएं बिना रुके, बिना थके हर काम कर सकती हैं जैसे कोई रोबोट हो. क्या वास्तव में ये तस्वीर महिलाओं के रोजाना की दिनचर्या की कड़वी सच्चाई को बयान करती है.

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8 घंटे की नौकरी में थक जाते है पुरुष

एक पुरुष जब सुबह अपनी नौकरी के लिए तैयार होता हैं और 8 घंटे की नौकरी करके शाम को घर आ जाता है. सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक की कोई भी जिम्मेदारियों में उसकी भागीदारी ना के बराबर है. लेकिन दूसरी तरफ एक महिला सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक हर किसी बात के लिए जिम्मेदार मानी जाती है. सुबह बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर रात को रसोई की सफाई तक हर जगह अपनी भागीदारी निभाती है. इस दिनचर्या में उनका घर का काम और थकान कोई मायने ही नहीं रखता.

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समाज में घरेलू काम करना महिलाओं की मुख्य जिम्मेदारी

महिलाएं घरों में जो घरेलू काम करती हैं, उन कामों का कोई महत्व नहीं समझा जाता क्योंकि लोगों को लगता है कि घर में किया गया काम आर्थिक रूप से कोई योगदान नहीं देता. सही मायने में देखें तो महिलाओं द्वारा किये गए घरेलू कार्य आर्थिक रूप से सीधा-सीधा योगदान देते है. लेकिन सामाजिक तौर पर घरेलू काम करना महिलाओं की ही मुख्य जिम्मेदारी मानी जाती है. कुछ परिवारों में आज भी किसी महिला को तब तक बाहर काम करने दिया जाता जब तक की उसका असर घरेलू कार्यो पर नहीं पड़ता हो. जब नौकरी की वजह से कोई महिला घरेलू कार्यों को नहीं कर पाती तो परिवार को इस बात से समस्या होने लगती है और वो नौकरी छोड़ने के लिए महिला पर दवाब बनाने लगते है. ऑफिस से घर आने पर रोज पति अपनी पत्नी से सबसे पहले ये पूछता है क्या किया तुमने दिन भर, घर में रह कर कैसे इतना थक जाती हो. तो क्या घर में रहने वाली महिलाएं काम नहीं करती है.

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इस बारे में हमने कुछ महिलाओं से बात की आइये जानते क्या कहा उन्होंने……..

रांची के हरमू में रहने वाली एक महिला बताती है, कैसे सुबह से रात हो जाती है पता ही नहीं चलता है कितनी बार तो ऐसा होता है कि बीना एक मिनट का रेस्ट लिये रात हो जाती है. एक बेबी के आ जाने के बाद हमारी दिनचर्या हमारे मुताबिक नहीं बेबी के मुताबिक होता है. सुबह में जब तक बेबी सोया रहता है तब तक पति और बाकी के लोगों का नास्ता रेडी कर के रख देना पड़ता है क्योंकि बेबी के उठ जाने के बाद पूरा टाइम उसे देना पड़ता है. बेबी का डेली रूटीन में हमारा पुरा दिन निकल जाता है. उसके बाद अगर टाइम मिल भी जाए तो घर के बाकी कामों को करने में चला जाता है. खुद के लिए टाइम नहीं मिल पाता है. सबसे ज्यादा तकलीफ तब होती है जब बेबी की तबियत खराब हो जाती है. उसके बाद भी हमसे ये पुछा जाता है कि ऐसा क्या काम कर रही थी दिन भर की इतना थक गयी हो. हर बार हमारी तुलना नौकरी करने वाली महिलाओं से किया जाता है, तो क्या ऐसे लोग ये नहीं जानते कि एक नौकरी करने वाली महिलाओं का काम करने का एक शिफ्ट होता है पर ये हमारे साथ नहीं होता है. हमारा काम सुबह उठने से लेकर शुरु होता है जो बीना रुके सोने के पहले तक चलता रहता है.

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बच्चे की देखभाल में प्रति सप्ताह 98 घंटे काम करती है मां

हम अपको यहां बताना चाहेंगे की हाल में हुये एक रिसर्च में ये बात सामने आयी है कि बच्चे को पालना किसी फुल टाइम जॉब से कम नहीं है. यहां तक ये भी सामने आया है कि मां का काम किसी नौकरी में करने वाले काम के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा होता है. इस रिसर्च के अनुसार एक मां बच्चे की देखभाल में 98 घंटे प्रति सप्ताह काम करती है. इस अमेरिकी सर्वे में 5 से 12 साल की उम्र के बच्चे की 2 हजार मांओं को शामिल किया गया और इसके परिणाम हैरान करने वाले रहे. एक आम दिन में मां औसतन सुबह 6:23 बजे से रात 8:31 बजे तक बच्चे के लिए काम करती रहती है. इसे तोड़ा जाए तो यह 7 दिन में 14 घंटे की शिफ्ट के बराबर का काम हुआ. यह किसी भी सामान्य जॉब के मुकाबले कहीं ज्यादा है. 

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हर दिन के काम के लिस्ट में लगभग 26 टास्क होते हैं एक मां के पास

अमेरिका के एक जूस ब्रैंड द्वारा कराए गए इस रिसर्च के मुताबिक एक मां एक दिन में औसतन 1 घंटा 7 मिनट का समय ही अपने लिए निकाल पाती है. स्टडी में यह भी पता चला कि 40% मांएं अपनी जिंदगी कभी न खत्म होने वाले टु-डू लिस्ट के दबाव में गुजारती हैं. यह कोई पहला रिसर्च नहीं है जिसमें मां की जिंदगी की कठिनाइयां सामने आई हों. इससे पहले 2013 में हुए एक सर्वे में सामने आया था कि एक मां के टु-डू लिस्ट में लगभग 26 टास्क होते हैं. इनमें स्नैक्स की व्यवस्था करना, नाश्ता बनाना और जरूरी अपॉइंटमेंट्स याद रखना महत्वपूर्ण है. जाहिर है, मां का काम सबसे बड़ा तो है ही, सबसे मुश्किल भी है. 

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