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नीति आयोग की रैंकिंग में झारखंड के 17 जिले पिछड़े

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Ranchi : नीति आयोग ने देश के 101 पिछड़े जिलों की रैंकिंग की सूची जारी की है. इस रैंकिंग सूची मे झारखंड राज्‍य के 17 जिले शामिल हैं. इन पिछड़े जिलों में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेश, कौशल विकास व मूल बुनियादी ढांचे में खराब प्रदर्शन की बात कही गई है.

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टॉप 10 रैंकिंग में झारखंड का कोई जिला नहीं

टॉप 10 की रैंकिंग में झारखंड का कोई जिला नहीं है. 27 वें रैंक पर पूर्वी सिंहभूम (39.45%) और 28 वें पर बोकारो (39.45%) है. रांची का रैंक 32 और स्कोर 39.12% है. साहेबगंज (90वां रैंक), पाकुड़ (86वां रैंक) और सिमडेगा (74वां रैंक) नीचे के स्थान पर हैं. हजारीबाग की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है, जिसने 40.46% स्कोर हासिल किया है. साहेबगंज की स्थिति सभी मानकों पर खराब है. साहेबगंज को सिर्फ 30.57% स्कोर मिला है. देश भर के 101 पिछड़े जिलों में आंध्र प्रदेश का विजयनगरम सर्वाधिक 48.13 % स्कोर के साथ पहले स्थान पर है.

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झारखंड के पिछड़े 18 जिलों में से 17 जिले 40% का भी स्कोर हासिल नहीं कर पाये

नीति आयोग ने विकास के मामले में पीछे छूट गये जिलों के प्रदर्शन में सुधार के लिए बुनियादी विकास मानकों के साथ आधार रैंकिंग की शुरुआत की है. स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेश, कौशल विकास व मूल बुनियादी ढांचे में प्रदर्शन के आधार पर तैयार इस रैंकिंग व स्कोर में झारखंड के पिछड़े 18 जिलों में से 17 जिले 40% का भी स्कोर हासिल नहीं कर पाये हैं.

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स्वास्थ्य के मानक पर झारखंड का एकमात्र जिला गुमला टॉप 20 की सूची में

दिल्ली में नीति आयोग के सीइओ अमिताभ कांत ने आधार रैंकिंग जारी की. इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्किल डेवलपमेंट व वित्तीय समावेशन के मानक के लिए रैंक व स्कोर तय किये गये हैं. इस कार्यक्रम का मकसद देश के सर्वाधिक पिछड़ों जिलों में विकास को गति देने और उनमें प्रभावी बदलाव लाना है. स्वास्थ्य के मानक पर झारखंड का एकमात्र जिला गुमला टॉप 20 की सूची में है, जिसकी रैंकिंग 12 व स्कोर 45.05% है. गोड्डा 21वें और हजारीबाग 27वें स्थान पर है. स्वास्थ्य के मानक पर झारखंड के किसी जिले ने 50 फीसदी स्कोर भी अर्जित नहीं किया.

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  • शिक्षा के मानक पर झारखंड के पांच जिलों – हजारीबाग, बोकारो, रांची, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम ने 50% से ज्यादा स्कोर अर्जित किये हैं, लेकिन इनका रैंक 22 से 37 के बीच है.
  • कौशल विकास में पूर्वी सिंहभूम ने 49.19% स्कोर लाकर देश के पिछड़े जिलों में पहला स्थान हासिल किया है. झारखंड के बाकी जिलों का स्कोर 20% से भी कम है.

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ऐसे की गयी है रैंकिंग

  • हर जिले को पांच क्षेत्रों के 49 इंडिकेटर पर अंक दिये गये हैं. जिलों की प्रगति के पैमाने में शिक्षा व पोषण के लिए 30 अंक, शिक्षा के लिए 30 अंक और कृषि व जल संसाधन के लिए 20 अंक दिये गये हैं. शेष 20 अंक वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और मूलभूत ढांचों के लिए हैं.
  • मई से इन जिलों की रैंकिंग उनके द्वारा की गयी प्रगति के आधार पर की जायेगी. उन्होंने बताया कि आयोग एक प्राइमर बना रहा है, जिसके तहत हर जिले के लिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जायेगी, जिनमें वे आसानी से आगे बढ़ सकते हैं और अपनी ओवरऑल रैंकिंग में तेजी से सुधार कर सकते हैं.

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रीयल-टाइम निगरानी डैशबोर्ड एक अप्रैल से

अमिताभ कांत ने कहा कि वास्तविक समय पर आंकड़ों के संग्रह और निगरानी के लिए एक अप्रैल से लोगों के लिए बदलाव का वाहक (चैंपियन ऑफ चेंज) ‘डैशबोर्ड’ शुरू किया जा रहा है. रीयल टाइम डाटा के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को नीति आयोग नयी सूची जारी करेगा.

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