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नवीन पटनायक ने कलिंगा के आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश मेरे सामने दिया था : जॉर्ज तिर्की

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Pravin Kumar/Saurabh Shukla

Ranchi,8 Decembar : जॉर्ज तिर्की ओडिशा के कद्दावर नेता रहे हैं. अपना राजनीतिक जीवन जेएमएम से शुरू किया और बीरमित्रपुर विधानसभा से 1995 और 2000 में पार्टी के विधायक चुने गए. जब झारखंड अलग राज्य बना तो जेएमएम की प्राथमिकता झारखंड के अंदर सिमट कर रह गई. जिसके कारण इन्होंने पार्टी छोड़ा और बीजू जनता दल में शामिल हुए. बीजू जनता दल में आदिवासी और गरीब-गुरबों की बात नहीं सुने जाने के कारण पार्टी से अलग हो गये. अपनी राजनीतिक लड़ाई को जारी रखते हुये जॉर्ज ने सेना बनाया. 2009 और 2014 में निर्दलीय विधायक के रुप में पुन: विधानसभा के लिए चुने गये. इसके बाद समता क्रांति दल बनाया. अपनी पार्टी छोड़ पुन: 6 दिसंबर 2017 को घर वापसी करते हुए झामुमो का दामन थामा है. इस मौके पर उनसे खास बातचीत की हमारे वरीय संवाददाता प्रवीण कुमार और सौरभ शुक्ला ने. पेश है बातचीत का मुख्य अंश.

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न्यूजविंग: अपने राजनीतिक जीवन के विषय में बताएं? किस रूप में वृहद झारखंड राज्य की बात होती थी और फिर ओडिसा के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग जो लड़ाई लड़ रहे थे, वह आज ठगा महसूस कर रहे हैं?

जॉर्ज तिर्की : मैंने नौकरी के रूप में पीएफ काउंसलर प्रोफेशनल के तौर पर अपने जीवन की शुरूआत की थी. वहां से त्यागपत्र देने के बाद मैंने बैंक में काम करना शुरू किया. 15 साल के अंदर सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लेने लगा, क्योंकि जिस क्षेत्र से मैं था वह बहुत ही पिछड़ा हुआ था. इसलिए 1995 में मैंने सक्रिय राजनीति में हिस्सा लिया. 2000 में ओड़िशा से झामुमो से पहली बार 4 विधायक जीतकर आए. उसके बाद जब झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तिव में आया तो झारखंड में हमारे क्षेत्र के शामिल नहीं होने पर इलाके के लोगों को बहुत दुख पहुंचा. ओडिशा की परिस्थिति ऐसी है कि भाजपा, कांग्रेस, बीजद किसी दल ने आदिवासियों को उनका हक नहीं दिलाया. आज केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार हमलोगों की जमीन पर उनकी नजर है और वह जमीन को लूटने में लगे हैं. तब मैंने सोचा कि घर वापसी किया जाए और झामुमो में शामिल हो गया.

न्यूजविंग: झारखंड अलग राज्य बनने के बाद आपने जॉर्ज सेना का गठन किया, उसके माध्यम से आपने चुनाव लड़ा और जीता. ऐसे में क्या आवश्कता पड़ी कि जिस पार्टी से आप अलग हुये और फिर उसमें ही वापस लौटे?

जॉर्ज तिर्की : झामुमो से इस्तीफा देने के बाद मैं बीजद में गया. मैं बीजद में जनरल सेक्रेटरी रूप में था और ओडिशा को बहुत ही करीब से देखा था. बीजद में रहकर भी हमारे जैसे नेता को बर्बाद किया गया और मैं इसका प्रमाण हूं. जब कलिंगनगर में फायरिंग हुई थी तो उस समय वहां के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपनी गलत नीतियों का परिचय दिया.सीएम ने कलिंगनगर के आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था. यही वजह रही कि जल, जगंल और जमीन की लड़ाई करने वाली पार्टी में शामिल हो गया.

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न्यूजविंग : कलिंगनगर में जो गोली चली उसका आदेश क्या मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आपके सामने दी थी?

जॉर्ज तिर्की : मेरे सामने फायरिंग का आदेश दिया गया था और मैं उसका प्रमाण हूं. यह सब देखने के बाद आदिवासी समाज की जमीन लूटने के लिए बहुत लोगों को मारा गया. वहां काशीपुर, नारायण पटना, नजिगढ़, कलिंगनगर सभी जगह आदिवासियों को मारा गया.

न्यूजविंग: ओडिशा के आदिवासी किस मुद्दे और समस्याओं से जूझ रहे हैं?

जॉर्ज तिर्की :अभी हमारे जमीन और जंगल जिसे हमने अपने पुरखों से विरासत के रूप में पाया है, उसे बचाना है. यदि जल, जंगल, जमीन की लूट हो जाए तो आदिवासी संपूर्ण रूप से बर्बाद हो जाएंगे. पूरी ताकत से हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं. राज्य में घूम-घूमकर आदिवासियों को गोलबंद कर एकजुट करने का काम करेंगे. झामुमो में आने के बाद एक राजनीतिक ताकत मिली है. चट्टानी एकता के साथ वहां हो रहे शोषण के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी.

न्यूजविंग: क्या आने वाले समय में आदिवासी, पिछड़ा, दलितों को एक नया नेतृत्व मिलेगा?

जॉर्ज तिर्की :बेशक, वैसे लोगों के शोषण और वेदना से मैंने आज घर वापसी की है. मैंने 25 साल से संघर्ष किया और जब मैं भटक गया था, तब उस क्षेत्र के लोगों ने महसूस किया कि हमारे हक की लड़ाई लड़ने वाला कोई नहीं है. क्षेत्र की जनता का कहना था कि आप झामुमो की सदस्यता ले लीजिए. उनकी प्रेरणा से आज मैंने घर वापसी का निश्चय किया है.

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न्यूजविंग :ओड़िशा के खनन क्षेत्र में जूझ रहे लोगों की समस्या क्या है?

जॉर्ज तिर्की : यहां बहुत से मुद्दे हैं, जैसे राऊरकेला के क्षेत्र में जबरन जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. कर्णधार जहां उत्तम गुणों का लौह अयस्क है, उसके उपर सरकार की निगाहें हैं. केंद्र की सरकार इसे नीलाम करने की योजना बना रही है, जिसके विरोध में लड़ाई जारी रहेगी. जहां भी क्षेत्र में गरीबों का शोषण हो रहा है वहां मैं जाकर उनकी आवाज को बुलंदी देने का काम करूंगा.

न्यूजविंग: झामुमो में आने के बाद क्या उम्मीद करते हैं? ये झारखंड की पार्टी है, वहां की चुनौती से कैसे लड़ेंगे?

जॉर्ज तिर्की  : आदिवासियों का आंतरिक झुकाव झामुमो के साथ है. लेकिन बेहतर नेतृत्व नहीं होने के कारण वहां असफल हुआ था. अब पुन:घर वापसी हुई है. ऐसा नहीं है कि झामुमो केवल झारखंड में सक्रिय है. ओड़िशा में भी पार्टी की विचारधारा के साथ वहां हो रहे शोषण के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी.

न्यूजविंग :  मतलब फिर से वृहद झारखंड राज्य की मांग बुलंद की जाएगी?

जॉर्ज तिर्की  : आज मैंने फिर से झामुमो की सदस्यता ली है और जैसा पार्टी का आदेश होगा वैसा ही करेंगे.

न्यूजविंग :  किस उम्मीद के साथ आज आपने पार्टी की सदस्यता ली है?

जॉर्ज तिर्की  :पार्टी की नीति को जन-जन तक पहुंचाकर एक मजबूत नेतृत्व झामुमो के हाथों में आने वाले समय में होगा. राजनीतिक रूप से लोगों को वहां कमजोर किया गया. अब झामुमो में आने के बाद ओड़िशा की जनता की लड़ाई को जारी रखेंगे. लेकिन वृहद झारखंड राज्य के मुद्दे पर पार्टी निर्णय लेगी, तब हमलोग फिर से इस लड़ाई को आगे बढ़ायेंगे.

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