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नर्मदा नदी के लिए खतरे की घंटी, 100 किमी तक सूख गयी 

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Bhopal  :   नर्मदा नदी के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. खबरों के अनुसार नर्मदा 100 किमी तक सूख गयी है. इसी क्रम में समुद्र 70 किमी तक आगे आ गया है. जिसका खारा पानी बर्बादी कर रहा है. सरदार सरोवर का डूब क्षेत्र और जलाशय भी खाली हो रहा है. नर्मदा नदी के सूखने का कारण पर्यावरण प्रदूषण बताया गया है. यह अवैध उत्खनन का नतीजा है. नर्मदा की कछार, घाटी, जंगल, उपनदियां और पानी का बंटवारा के अलावा इलाके में अवैध उत्खनन ने नदी का स्वरूप बिगाड़ दिया है. सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के अनुसार सर्वाधिक नुकसान विकास के नाम पर नर्मदा नदी  सहित अऩ्य उप नदियों पर बनाये गये बडे बांधों और अवैध रूप से रेत खनन के कारण हुआ है.

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जलस्त्रोत बचाना क्या संभव हो पायेगा ?

इस सबंध में मेधा पाटकर नर्मदा जन संवाद कार्यक्रम का आयोजन करेगी. मेधा ने पत्रकारों को बताया कि नर्मदा सेवा यात्रा और पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रूपये खर्च करने वाली सरकार अवैध रेत खनन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे रही है. उनका आरोप था कि 17 सितंबर 2017 के दिन प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण किया और मध्यप्रदेश की इस नदी का पानी गुजरात की कंपनियों को दे दिया. इसका असर मध्यप्रदेश में पड़ रहा है. कहा कि बडवानीकुक्षी जैसे शहरों में दो दिन में एक बार पानी मिल पा रहा है. मेधा पाटकर का कहना है कि नर्मदा नदी के नाम पर करोड़ों रुपए यात्रा और योजनाओं पर खर्च करने के बाद तीन साधू और एक बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा देकर शासन ने शतरंज की चाल चली है.  लेकिन इससे जलस्त्रोत क्या बच पायेगा?

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