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नगर निगम जिस पार्क की करता है देखभाल, वो बना बदसूरती की मिसाल 

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News Wing Team

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रोजमर्रा की आपाधापी से फुर्सत मिलने के बाद किसी बेहतर माहौल में जब सुकून की सांसें लेने की चाहत होती है तो लोगों के मन में पहला ख्याल पार्क का ही आता है. मगर पार्क ही अगर असुविधाओं का केंद्र बन जाए तो तकलीफें बढ़ जाती हैं. हैरानी की बात है कि जो पार्क रांची नगर निगम के नियंत्रण में नहीं है, वह बेहतर तरीके से संचालित हो रहे हैं. सबसे पहले कांके रोड स्थित रॉक गार्डन की बात करते हैं. यह पार्क आरआरडीए द्वारा निजी हाथों में संचालन के लिए दिया गया है. शहर के बीच बीच एक बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में यह जाना जाता है. पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां झरने और मूर्तियां भी बनाई गई हैं.  रॉक गार्डन देखने में तो खूबसूरत है ही, साथ ही इसके निर्माण में आधुनिक और प्राचीन सृजनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिलता है.यहां लोहे की छड़ से बना एक पैदल पुल है, जिसमें सिर्फ दो स्तंभ हैं. गार्डन के अंदर पत्थरों से बनी कई मूर्तियां हैं. सैलानियों के बीच यह गार्डन खासा उत्साह जगाता है.

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सुबह सैर की छूट देने पर लोग पार्क को करते थे गंदा

पार्क के संचालक रामाधार सिंह ने बताया कि वे इस पार्क का संचालन 2004 से कर रहे हैं. शुरूआत में यहां सुबह और शाम के सैर सपाटे के लिए छूट दी गई थी. लेकिन लोग यहां शौच करके चले जाते थे. इसलिए इसे तय समय पर ही सिर्फ सैलानियों के लिए खोला जाता है. यहां बच्चों को लुभाने के लिए तरह तरह की व्यवस्था है. राइड्स, पिरामिड तो आकर्षक हैं ही, 3डी विजुअल, आदि अत्याधुनिक मनोरंजन के साधन भी उपलब्ध हैं.

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शहर के बीच प्राक़तिक छटा बिखेरता है कांके डैम पार्क

रॉक गार्डन से सटे कांके डैम पार्क में जलाशय की ओर से सूर्यास्त का मनोरम नजारा देखा जा सकता है. यह पार्क झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग की ओर से संचालित है. इस पार्क को मेंटेन करने के लिए पर्यटन विभाग की ओर से जरूरत के हिसाब से हर बार खर्च किया जाता है, कुछ साल पहले ही यहां ग्रामीणों के चलने के लिए फुटओवर का निर्माण किया गया. वहीं दूसरी ओर इस पार्क के रख-रखाव के अभाव में फ्लाईओवर को बंद कर दिया गया है. पार्क में बच्चों के खेलकूद के साजोसामान टूट-फूटकर हादसे को निमंत्रित कर रहे हैं. यहां लाखों खर्च कर लेजर लाइट शो के लिए यूनिट लगाये गये, वह भी बंद पड़े हैं. कुल मिलाकर कहें तो रांची के पार्कों में पर्यटन एवं मनोरंजन की असीम संभावनाओं के बाजवूद हालात ऐसे बने हुए हैं, जैसे असुविधा में सुविधा की तलाश हो. लिहाजा उत्साहित सैलानी इन पार्कों में आते तो जरूर हैं, पर अव्यवस्था का मंजर देखकर निराश भी होते हैं.

                                                                                             (दूसरा भाग)

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