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नगर निकाय चुनाव : झारखंड सरकार के कामकाज की होगी परीक्षा, केन्द्र सरकार के कुछ फैसलों का भी होगा लिट्मस टेस्ट

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Daltonganj : डालटनगंज, हुसैनाबाद, छत्तरपुर सहित राज्य के उप नगर निकायों में अलगे महीने होने वाले चुनाव कई मामलें में महत्वपूर्ण है. राज्य में पहली बार दलीय आधार पर हो रहे इस चुनाव में जहां प्रदेश की रघुवर  सरकार के कामकाज और इकबाल की परीक्षा होगी, वहीं केन्द्र सरकार के कुछ फैसलों का लिट्मस टेस्ट भी होगा. साथ ही यह भी तय होगा कि बात-बात पर धमाचौकड़ी मचाने वाला विपक्ष जमीन पर कितना वजूद रखता है. लिहाजा यह चुनाव केवल सत्तारूढ़ दल के लिए ही नहीं, अपितु विपक्ष के लिए भी काफी मायने रखने वाला है. नगर निकाय चुनाव का परिणाम 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के नतीजों के लिए काफी मायने रखता है.

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निकाय चुनाव का परिणाम 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए खास  

नगर निकाय चुनाव

सत्तारूढ़ भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी ज्यादा अहमियत रखता है कि अगर चुनाव परिणाम गड़बड़ाया तो 2019 के आम चुनाव और विधानसभा चुनाव पर इसका प्रभावी असर पड़ेगा, क्योंकि भाजपा के बारे में यह अवधारणा है कि शहरी मतदाताओं में पार्टी की पकड़ हमेशा मजबूत रही है. अगर नींव ही कमजोर होगी तो इमारत के ढहने का खतरा भी बढ़ जायेगा. सभी प्रमुख राजनीतिक दल साल 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए इस स्थानीय निकाय चुनाव पूरे दमखम के साथ सामाजिक, जातिगत समीकरण को साथ लेते हुए बड़ी संजीदगी से लड़ रहे हैं. प्रत्याशियों के चयन में छोटे-बड़े पहलुओं का ध्यान रखा गया है. 

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साइबर ठगों ने  पूर्व सीजेआई आरएम लोढा को निशाना बनाते हुए एक लाख रुपए ठग लिये.  खबर है कि ठगों ने जस्टिस आरएम लोढा के करीबी दोस्त के ईमेल अकाउंट से संदेश भेजकर एक लाख रुपए  की ठगी कर ली.

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राजनीतिक पार्टियों ने जातिगत कार्ड पर खेला है दाव

मेदिनीनगर नगर निगम की बात की जाये तो भाजपा ने बड़े ही संजीदगी से प्रत्याशियों के चयन में जातीय संतुलन बनाने की कोशिश की है. भाजपा ने महापौर पद पर जहां बड़ी चतुराई से वैश्य को उतारा है, वहीं उपमहापौर पद के लिए राजपूत को टिकट थमाया है. नगर निगम क्षेत्र में इन दोनों जाति की बहुलता है, हालांकि भाजपा की इस चतुराई पर कांग्रेस सेंध लगाती दिख रही है. उसने दोनों ही पद पर राजपूत प्रत्याशी को उतारकर भाजपा को राजपूत वोट से वंचित रखने की चाल खेली है, साथ ही मुस्लिम और पिछड़ों का वोट झटक कर कांग्रेस भाजपा को कड़ी टक्कर देने की रणनीति पर काम कर रही है. अगर झारखंड मुक्ति मोर्चा की बात करें तो उसने महापौर पद पर ब्रह्मण और उपमहापौर के लिए चंद्रवंशी कार्ड खेलकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की झोली में सेंधमारी की रणनीति तैयार की है. झारखंड विकास मोर्चा, राजद, आजसू और बसपा ने भी प्रत्याशी चयन में चतुराई का परिचय दिया है. इन सबके बावजूद अगर देखा जाये तो सबकी लड़ाई भाजपा से ही है और हर दल उसे ही नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते दिख रहा है. हालांकि इन सबके बीच आगे कौन निकलेगा, यह कहना अभी थोड़ी जल्दबाजी होगी. चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि प्रस्तावित निकाय चुनाव में मुस्लिम वर्ग की रणनीति होगी कि उनका वोट किसी भी दशा में विभाजित न हो.

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