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नगड़ीः कैशलेस योजना फेल होने के बाद अब पीडीएस में डीबीटी की शुरुआत

Mritunjay Shrivastav/ Akshay Kumar Jha

NEWS WING, 02 October: डीबीटी यानि Direct Benefit Transfer. एक ऐसी योजना जिससे सरकार की तरफ से मिलने वाली किसी भी तरह की सब्सिडी की राशि सीधा लाभुक के खाते में जाती हो. इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार और लाभुक के बीच के बिचौलियो खत्म करना मकसद होता है. झारखंड सरकार इस दिशा में एक काफी अहम कदम उठाने जा रही है. लेकिन, सवाल अभी से उठने लगे हैं. क्या ये योजना जनता के कसौटी पर खरी उतरेगी? ऐसा इसलिए बोला जा रहा है. क्योंकि, इस योजना की भी शुरुआत उसी प्रखंड नगड़ी से होने जा रही है. जहां से झारखंड सरकार की कई योजनाओं की शुरुआत की गयी है, और वो सभी आज फेल हैं. 

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पीडीएस में डीबीटी शुरू करने वाला पहला प्रखंड होगा नगड़ी

जब केंद्र सरकार की तरफ से देश भर में नोटबंदी की गयी. उस वक्त देश भर में कैशलेस ट्रांजैक्शन करने की बात हो रही थी. जहां भी बीजेपी की सरकार थी, वहां के राज्य सरकारों ने राज्य में कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने का पूरा प्रयास किया. उसी दिशा में झारखंड की रघुवर सरकार ने भी नगड़ी को पूरे तरह से कैशलेस करने के लिए तमाम तरह की कोशिशें की. अब नगड़ी ही झारखंड का वो प्रखंड बनने जा रहा है जहां पीडीएस में डीबीटी की शुरुआत एक पयलेट योजना के तहत होने वाली है. 4 अक्टूबर को राजधानी रांची जिला के नगड़ी प्रखंड कार्यालय में सीएम रघुवर दास खुद इसकी शुरुआत करने वाले हैं.

योजना के बारे में क्या कहा मंत्री ने

राज्य के खाद्य आपूर्ति एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री सरयू राय ने बताया कि यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की जायेगी. इसके सफलता के बाद इस योजना को भविष्य में दूसरे प्रखंडों में शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा लाभुकों के बैंक खाते में सब्सिडी का पैसा सीधे ट्रांसफर हो जाएगा. लाभुकों को बाजार मुल्य पर ही अनाज लेना होगा. सरयू राय ने यह भी बताया कि चावल 32.64 रूपये प्रति किलो की दर से मिलेगा. ऐसे में 31.64 रूपये लाभुकों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जायेगा.

सरकार दो महीने तक करेगी इंतजार

नगडी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी कुलदीप कुमार ने बताया कि दो महीने तक सरकार लाभुकों के अकाउंट में पैसा देती रहेगी. इस बीच जनवितरण प्रणाली से चावल खरीदी गयी है या नहीं इसकी भी साथ-साथ मॉनेटरिंग की जायेगी. बताते चलें कि पीडीएस से सिर्फ दो तरह के कार्डधारियों को अनाज दिया जाता है. एक लाल कार्डधारी और दूसरा पीएच कार्डधारी. लालकार्डधारियों को 35 किलो चावल हर महीने दिए जाने का प्रावधान है. वहीं पीएच कार्डधारियों के परिवार के हर सदस्य को पांच किलो अनाज देने का प्रावधान है. सरकार ऐसी नीति पर काम कर रही है जिससे कार्डधारी पैसा निकाल कर सिर्फ अनाज ही खरीद सके. अगर दो महीने लगातार इस मामले में किसी कार्डधारी को गलत करते पाया गया तो सरकार उसे पीडीएस के लाभुकों की सूची से हटा सकती है. साथ ही कार्रवाई भी कर सकती है.  

योजना को लेकर डीलरों को संदेह

नगडी के पीडीएस डीलरों को डीबीटी के सुचारू रूप से चलने पर संदेह है. क्या कहा जानिए

डीलर राजकुमार केशनी- यह इलाका पुरी तरह से ग्रामीण परिवेश का है. योजना एक महीने चल जाए उसके बाद ही कुछ कहा जा पायेगा. वैसे यहां चावल लेने वाले बूढे ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. उनको बैंक से पैसा निकालने में दिक्कत आएगी.

डीलर द्वारिका प्रसाद महतो- लाभुक पहले पीडीएस दुकान आते थे अंगुठा लगाते थे और राशन लेकर अपने घर चले जाते थे. लेकिन अब उनको बैंक से पैसा निकालना पड़ेगा. पैसा नहीं निकाला तो अनाज भी नहीं मिलेगा. इससे बिचैलियों के हावी होने की आशंका है.

डीलर आनंद केशरी- अनाज लेने वाले परिवार के सदस्य बूढ़े भी हैं बीमार भी. बैंक में हस्ताक्षर के माध्यम से पैसे का भुगतान होता है. हो सकता है कि घर का ही कोई सदस्य अपने बूढ़े सदस्य का हस्ताक्षर करवा कर गड़बड़ी करे.    

किन-किन योजनाओं की हुई है नगड़ी से शुरुआत

– जमीन रजिस्ट्री की ऑनलाइन योजनाः पूरे राज्य में योजना फेल है. ना म्यूटेशन हो रहा है और ना ही रसीद काटी जा रही है.

इसे भी पढ़ेंः राज्य भर में ऑनलाइन लैंड रिकॉर्ड सिस्टम फेल, सरकार की गलत रणनीति की वजह से हुआ ऐसा

– योजना बनाओ अभियानः बिना ग्रामसभा किए ही पंचायत में मुखिया कुछ लोगों से हस्ताक्षर करा कर ये योजना पूरी तरह से अपने हाथ में ले चुके हैं.

– कैशलेस प्रखंड घोषित हुआ थाः सरकार का ये दावा पूरी तरह से फेल है. नगड़ी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से नकदी पर टिकी है.   

 

 

 

 

 

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