न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

नक्सलवाद के खात्मे के 22 दिन शेष: गुमला में पीएलएफआई ने क्रसर प्लांट में मशीनों को किया आग के हवाले, छोड़ा पर्चा

5

News Wing
Gumla, 08 December:
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास और डीजीपी डीके पांडेय साल भर से यह दावा कर रहे हैं कि 31 दिसंबर 2017 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा. 31 दिसंबर की समय सीमा खत्म होने में 22 दिन बचे हैं. और राज्य में नक्सली गतिविधि अब भी जारी है. छह दिसंबर को गिरिडीह के बगोदर में नक्सलियों ने पोस्टरबाजी की थी और अब दो दिनों के बाद गुमला के घाघरा थाना क्षेत्र के नौनी गांव  में नक्सलियों ने क्रसर प्लांट पर काम में लगे मशिनों को आग के हवाले कर दिया साथ ही धमकी भरा पर्चा भी छोड़ा है.

क्या है पूरा मामला

गुमला जिला में लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर उग्रवादी संगठन पीएलएफआई ने अपनी मौजूदगी दर्ज करायी है. उग्रवादियों ने घाघरा थाना क्षेत्र के नौनी गांव में एक पत्थर क्रसर प्लांट में खड़ी दो पोकलेन मशीन व एक लोडर मशीन को आग के हवाले कर दिया. दोनों मशीनों को मिलाकर लगभग तीन करोड़ रुपये की सम्पति की क्षति हुई है. उग्रवादी आगजनी की घटना को अंजाम देकर फरार हो गये साथ ही एक हस्तलिखित पर्चा भी छोड़ा. पर्चे में लिखा गया था कि जब तक क्रसर मालिक संगठन से बात नहीं कर लेता है तब तक क्रसर में काम नहीं होगा. साथ ही यह भी लिखा है कि कोई भी वाहन मालिक क्रसर प्लांट में काम के लिए अपने वाहन को ना दें.

इसे भी पढ़ें- नक्सलवाद के खात्मे के 24 दिन शेष: गिरिडीह के बगोदर में फिर पोस्टरबाजी, दहशत

silk

घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी घटनास्थल पर नहीं पहुंची पुलिस

क्रसर प्लांट में काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि रात के 12 बजे छह की संख्या में उग्रवादी आये थे, सभी हथियारों से लैस थे, जिनमें से एक पास एके 47 था. हम सब उस वक्त सो रहे थे. जिसके बाद वो हमें जगा कर हमसे मोबाइल फोन छीन लिया और जहां पर मशीनें लगी थी वहां ले जाकर दो पोकलेन मशीन और एक लोडर को आग लगा दिया. उसके बाद उन्होंने हमें काम बंद कर घर जाने को कहा और चले गये. वहीं घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंची थी.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: