न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

दे नी आयो भात…दे नी आयो भात…बुदबुदाते हुए भूख से मर गई 11 साल की संतोषी

88

Pravin Kumar

Ranchi/Simdega, 15 October : झारखंड में खाद्य सुरक्षा की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होती जा रही है, अब कोई राज्य में भूखा नहीं मरेगा, हर किसी को मिलेगा अनाज, जैसे तमाम सरकारी वादों के बीच झारखण्ड में भूख से मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा. दुखद यह है कि इसकी पहचान सुनिश्चित करने का कोई मैकेनिज्म ही नहीं राज्य सरकार के पास.

Sport House

ताजा मामला सिमडेगा जिले के सुदूरवर्ती प्रखंड जलडेगा का है. पतिअम्बा पंचायत की 11 वर्षीय संतोषी कुमारी की मौत भूख से 28 सितम्बर 2017 की रात हो गई.

भूख से मर गई 11 साल की बच्ची संतोषी कुमारी
संतोषी कुमारी का गांव राज्य के सीमावर्ती जिला सिमडेगा में स्थित है. जिला के जलडेगा प्रखंड के पतिअम्बा पंचायत के कारीमाटी गांव में वह रहती थी. संतोषी परिवार के अन्य छह सदस्यों के साथ रहती थी.

परिवार के पास नाम मात्र की जमीन है. जिससे परिवार को साल भर का भोजन नहीं मिल पाता है. घर के सदस्य दातुन और पत्तल, दोना बेचकर किसी तरह प्रतिदिन 50 से 80 रूपया कमा पाते हैं. यह कमाई भी अनिश्चित है. हर रोज 50 से 80 भी आ जाये, यह भी संभव नही. जिस दिन काम नहीं मिलता, घर का चूल्हा नहीं जलता है. परिवार पिछले 6 महीने से एक वक्त ही भोजन जुटा पाता था.

Mayfair 2-1-2020

परिवार में दादी बालामती देवी (65 वर्ष), मां कोईली देवी (38 वर्ष), पिता ततायन नायक (40 वर्ष), छोटा भाई प्रकाश (डेढ़ साल), बहन चांदो (10 वर्ष) संतोषी के साथ रहा करते थे. पिता मानसिक रूप से बिमार हैं. बड़ी बहन गुड़िया (20 वर्ष) काम की तलाश में बाहर गयी हुई है.

पिछले 6 माह से परिवार की स्थिती काफी खराब
परिवार पिछले 6 महीने से काफी विकट स्थिति से जूझ रहा था. क्योंकि राशन कार्ड से राशन मिलना बंद हो गया था. आंगनबाड़ी से डेढ़ वर्षीय प्रकाश को जो कुछ थोड़ा भोजन मिलता था उसे पानी में घोल कर परिवार गुजारा करता था. मगर बीते दो महीने से यह भी बंद हो गया था.

संतोषी कुमारी की दादी बालामती को भी मिलने वाला वृद्ध पेंशन 8 महीने से बंद था. परिवार के विकट स्थिति आ गई थी. परिवार में सबसे बड़ी बहन गुड़िया काम की तलाश में बाहर गई हुई है. मृतका की मां ने बताया कि संतोषी की मौत से चार दिन पूर्व दो पैला चावल उधार लेकर खाना बनाया था. परिवार को उधार इस आधार पर मिला था कि जब बड़ी बेटी काम से लौटेगी तो वापस कर देंगे.

राशन का चावल न मिलना बना मौत का कारण
6 माह पूर्व से राशन परिवार को नहीं मिल रहा था. संतोषी की मां कोईली देवी ने बताया कि सरकार के द्वारा पिछले 6 महीने से उनके परिवार को राशन नहीं मिल रहा है. 28 सितंबर जिस दिन संतोषी की मौत हुई थी, रात के करीब 10 बज रहे होंगे. घर में चावल का एक दाना भी नहीं था. पिछले 4 दिनों से परिवार के सदस्यों ने कुछ नहीं खाया था. मृतक संतोषी कुमारी के स्कूल में भी मध्यान भोजन में एक समय खाना मिलता था. सितंबर के समय में जब दुर्गा पूजा की छुट्टी हो गई थी, तब संतोषी कुमारी की भूख से मौत हो गई.

Related Posts

demo

परिजन बताते हैं जिस रात संतोषी कुमारी को मौत हुई, वह भूख से लगातार रोते हुए कह रही थी- दे नी आयो भात,  दे नी आयो भात..(मां भात दो ना… मां भात दो ना). यह बुदबुदाते हुए 11 साल की गरीब बच्ची संतोषी की भूख से मार्मिक मौत हो गयी.

मृतका संतोषी कुमारी के परिवार का राशन बंद होने की शिकायत स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा उपायुक्त के जनता दरबार में 21 अगस्त 2017 किया गया था. इस संबंध में 1 सितंबर 2017 को इसकी लिखित शिकायत एवं नया कार्ड बनाने के लिए आवेदन जिला आपूर्ति पदाधिकारी सिमडेगा को दिया गया था. आवेदन पुन: देने के लगभग एक महीना तक परिवार का राशन कार्ड नहीं बना. 28 सितंबर को जब संतोषी की मौत हो गई, इसके लगभग दो हफ्ते बाद 10 अक्टूबर को परिवार का राशन कार्ड बना बनाया गया.

गांव में और भी परिवारों पर भूख से मौत का खतरा
इसी गांव के पति नायक का परिवार की भी स्थिति खराब है. इनका भी राशन कार्ड आधार कार्ड से लिंक ना होने की वजह से राशन मिलना बंद है. पति नायक को पिछले 6 महीनों से राशन नहीं  मिल रहा है. पति नायक ने 21 सितंबर को उपायुक्त के जनता दरबार में आवेदन दिया. मगर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि पति नायक का राशन कार्ड आधार कार्ड बनवाने बाद ही लॉगिन कर दिया गया. लेकिन अभी तक अनाज नहीं मिल पा रहा है.

मौत के बाद भी जिला प्रशासन उदासीन
सतोषी की मौत के बाद भी जिला प्रशासन की नींद नहीं खुली है. सामाजिक कार्यकर्त्ता मामले को उठा रहे हैं तो प्रशासन इसे दबाने की कोशिश कर रहा है. 6 अक्टूबर और 13 अक्टूबर को पीड़ित परिवार से सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने मुलाकात की. दोनों ही मुलाकात में परिवार के सदस्यों की भुखमरी की स्थिति सामने आई. परिवार को  अनाज एवं भोजन उपलब्ध कराया गया.

इसके बाद प्रशासन द्वारा परिवार को 5 किलो चावल दिया गया था. मृतक की मां बतती हैं कि बेटी के मरने के बाद सरकार ने 35 किलो चावल दिया है. वह भी बेटी के अंतिम संस्कार में खत्म हो गया.

प्रशासन की ओर से परिवार को मदद के नाम पर मात्र 35 किलो चावल मिला. 12 अक्टूबर को पीड़ित परिवार से मिलने सामाजिक कार्यकर्त्ता फिर पहुंचे. उस समय बेटी की मौत के सदमे में मां  बीमार हो गयी थी. जांच दल के सदस्यों की पहल पर उन्हें प्रखंड अस्पताल लाया गया. मेडिकल अफसर ने बताया कि मृतका की मां कोइली देवी ने काफी दिनों से कुछ खाया ही नहीं है. 12 अक्टूबर को आपूर्ति पदाधिकारी ने पीड़ित परिवार का राशन कार्ड जारी किया. लेकिन पीड़ित परिवार को अभी भी राशन उपलब्ध नहीं हो रहा है, क्योंकि आगे की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है.

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने सामने लाई सच्चाई
भूख से हुई इस मौत की फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य धीरज कुमार बताते हैं कि संतोषी कुमारी की मौत निश्चित तौर पर भूख से हुई है. जब परिवार के लोगों से मुलाकात की तो घर की हालत काफी दयनीय थी. संतोषी की भूख से हुई मौत को जिला प्रशासन झुठलाने पर तुला है. सच यह है कि अब भी परिवार को राशन नहीं मिल रहा है. घर में आय के स्रोत नहीं हैं. क्योंकि सरकार ने करीब 11.5 लाख राशन कार्ड आधार से लिंक नहीं होने की वजह से रद्द कर दिया है. इस कारण राज्य में बहुत से परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गये हैं. आदिम जनजातियों के लिए डाकिया योजना राज्य में संचालित की जा रही है. यह पहल अच्छी है लेकिन इसका लाभ आदिम जनतातियों  को नही मिल पा रहा है. आज भी अनाज लाने के लिए कई किलोमीटर चलकर राशन दुकान पर जाते हैं.

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस को मुंह चिढ़ाती संतोषी की मौत 
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी और कुपोषण के खिलाफ संघर्ष, जागरुकता और प्रोत्साहन को प्रसारित करने के मकसद से विश्व खाद्य दिवस प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है. ऐसे में झारखण्ड में भूख से हो रही गरीब लोगों की मौत हमारे विकास पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं. खासकर झारखण्ड में यह स्थिति तब है जब सरकार देश-दुनिया में घूमकर राज्य के विकास का डंका पीटते नहीं थक रही. ग्लोबल-डिजिटल और विकसित झारखण्ड की सच्चाई 11 साल की बच्ची की भूख से हुई मौत से उघर जाती है. 

SP Jamshedpur 24/01/2020-30/01/2020

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like