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देश में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले पावर प्लांट में से एक है टीटीपीएस, केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने उत्पादन बंद करने का दिया निर्देश

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Akshay Kr. Jha

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Ranchi, 06 November: देश में सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों में से एक तेनूघाट थर्मल पावर स्टेशन भी शामिल है. कंपनी हवा और पानी दोनों को काफी ज्यादा प्रदूषित कर रही है. जिससे आस-पास की हवा और पानी काफी हद तक प्रदूषित हो गयी है. कंपनी प्रदूषण से बचने के लिए सही उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर रही है, जिससे प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता था. इतना ही नहीं कंपनी नाले के जरिए छाई (कोयले का राख) को दामोदर नदी में बहाने का काम कर कर रही है. साथ ही कंपनी ने ऐसा कोई भी उपकरण प्लांट में नहीं लगाया है, जिससे प्रदूषण मानकों का ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड कर सके. टीटीपीएस की इन्हीं सब हरकतों की वजह से सीपीसीबी (Central Pollution Control Board) ने कंपनी को नोटिस जारी किया है. नोटिस में निर्देश दिया गया है कि वो अपने दोनों यूनिट से उत्पादन बंद कर दे. बावजूद इसके प्लांट के दोनों यूनिट से उत्पादन जारी है.

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सीपीसीबी की कंपनी को नोटिस

सीपीसीबी (Central Pollution Control Board), दिल्ली की तरफ से टीटीपीएस को 21 नवंबर को एक नोटिस भेजा गया है. बोर्ड ने नोटिस को बकायदा अपने साइट पर भी लगाया है. झारखंड राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव संजय कुमार सुमन ने बतायाः “सीपीसीबी दिल्ली की तरफ से टीटीपीएस को नोटिस भेजा गया है और 15 दिनों के अंदर नोटिस का जबाव देने को कहा गया है.” नोटिस में सीपीसीबी ने साफ तौर से कहा है कि टीटीपीएस उन चुनिंदा थर्मल पावर प्लांटों में से एक है जो हवा और पानी को काफी प्रदूषित कर रही है.

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टीटीपीएस को उत्पादन बंद करने का निर्देश

नोटिस में सात बिंदुओं पर टीटीपीएस को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. सबसे पहले दोनों यूनिट से हो रहे उत्पादन को बंद करने का निर्देश दिया गया है. यूनिट बंद करने के बाद राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को इस बारे जानकारी देने का निर्देश है. निर्देश दिया गया है कि जब-तक राज्य प्रदूषण बोर्ड से दोबारा अनुमति नहीं ले ली जाए उत्पादन बंद ही रखना है. लेकिन टीटीपीएस के दोनों यूनिट से बदस्तूर उत्पादन जारी है.

15 दिनों के अंदर जवाब नहीं तो होगी कार्रवाई, आज 16 वां दिन

सीपीसीबी ने टीटीपीएस को इन सातों बिदुओं पर 15 दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है. कहा गया है कि अगर कंपनी नोटिस का जवाब 15 दिनों के अंदर नहीं देती है, तो सीपीसीबी Environment Protection Act 1986 के कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा. सूत्रों की माने तो कंपनी ने सीपीसीबी के किन्हीं निर्देशों का पालन अभी तक नहीं किया है. दोनों यूनिट से उत्पादन जारी है और सुरक्षा मानकों से जुड़े किसी भी उपकरण को नहीं लगाया गया है.

नोटिस में और क्या कहा गया     

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– टीटीपीएस बिना Air (Prevention & Control of Pollution) Act, 1981 और Water (Prevention & control of Pollution) Act, 1974  की अनुमति के जनवरी 2016 से उत्पादन कर रही है.

– Online Continuous Stack Emission Monitoring System तुरंत बहाल हो. जिसके जरिए ऑनलाइन ये पता लगाया जाता है कि चिमनी के जरिए कितना प्रदूषण फैल रहा है.

– छाई ओवरफ्लो होकर मुरमानावा नाला के जरिए दामोदर नदी में जाकर मिल रहा है. प्लांट के बाहर किसी भी हाल में किसी भी तरह का तरल पदार्थ डिस्चार्ज ना किया जाए. इसके लिए नोटिस इश्यू होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर प्लान तैयार कर सीपीसीबी को भेजी जाए.  

– टीटीपीएस झारखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 को पूरी तरह से लागू करे.

– इएसपी (जिससे धुंए के जरिए हवा को प्रदूषित होने वाले धूल के कण हवा में जाने से पहले खत्म हो जाते हैं) को यूनिट वन के साथ तत्काल प्रभाव से जोड़ा जाए.

– टीटीपीएस तत्काल प्रभाव से एक Online System बहाल करें, जिससे हवा में होने वाले प्रदूषण और ऐश पॉन्ड की जानकारी सीपीसीबी (सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड) को लगातार मिलती रहे.

– छाई (कोयले का राख) किसी भी हाल में ऐश पॉन्ड के बाहर ना जाए. इसके लिए Ash Water Recirculation System प्लांट में लगायी जाए.

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प्रदूषण बोर्ड की तरफ से नोटिस आते रहते हैं, जवाब दिया जाएगाः एमडी

टीटीपीएस के एमडी रामअवतार साहू ने बताया कि सीपीसीबी की तरफ से नोटिस आया है. लेकिन अभी तक एक्शन टेकिंग रिपोर्ट की जानकारी सीबीसीबी को नहीं दी गयी है. बोर्ड की तरफ से ऐसे नोटिस आते रहते हैं.  हमलोग जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं.
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