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देश के 1382 जेलों में कैदियों के लिए अमानवीय हालात, सुप्रीम कोर्ट ने सुधार के दिये निर्देश

News Wing

New Delhi, 15 September: विभिन्न जेलों में होनेवाली कैदियों की अस्वभाविक मौत मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है. मामले में हाई कोर्ट को निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वर्ष 2012 के बाद जेलों में हुई कैदियों की अस्वभाविक मौतों को चिन्हीत कर उनके परिजनों का पता लगाने के लिए स्वत ही याचिका दर्ज की जाये और उन्हें उचित मुआवजा भी दिया जाये.

काउन्सलिंग के लिये काउन्सलर और सहायक व्यक्तियों की नियुक्ति

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न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने जेल सुधारों के बारे में विस्तृत दिशा निर्देश जारी करते हुये सभी राज्य सरकारों को कैदियों, खासकर पहली बार अपराध करने वाले, की काउन्सलिंग के लिये काउन्सलर और सहायक व्यक्तियों की नियुक्ति करने के लिए कहा. यही नहीं, न्यायालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि कैदियों के लिये चिकित्सीय सहायता की उपलब्धता के बारे में अध्ययन कराया जाए और जहां भी आवश्यक हो वहां सुधारात्मक कदम उठाये जाएं.

Sanjeevani
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जेल में अस्वभाविक मौत के शिकार कैदियों के परिजनों को दें मुआवजा

पीठ ने कहा, हम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012 से 2015 के दौरान अस्वाभाविक मृत्यु के शिकार हुये कैदियों के परिजनों की पहचान के लिये ऐसे मामलों में स्वत: ही जनहित याचिका दर्ज करें और इसके बाद उन्हें उचित मुआवजा दिलायें बशर्ते पहले पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया गया हो.’’ न्यायालय ने शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल से कहा कि इस फैसले की प्रति सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को एक सप्ताह के भीतर भेजी जाये.

बाल संरक्षण संस्थानों के लिए भी जारी किये निर्देश

शीर्ष अदालत ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण संस्थानों में हिरासत में या संरक्षण और देखभाल की जरूरत की खातिर रखे गये बच्चो में से , यदि किसी की अस्वाभाविक मृत्यु हुयी हो तो उनकी संख्या का चार्ट बनाने हेतु राज्य सरकारों के संबंधित अधिकारियों के साथ विचार करें.

 1382 जेलों में कैदियों के लिए अमानवीय हालात
न्यायालय ने देश की 1382 जेलों में व्याप्त अमानवीय हालात की ओर ध्यान आकर्षित करने और उचित निर्देशों के लिये 2013 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिये.

 

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