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देशभर में सूचना आयोग की हालत खस्ता, खाली पड़े हैं 109 आयुक्त पद, झारखंड में 11 में से 9 पद रिक्त

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Ranchi: सूचना का अधिकार अर्थात राईट टू इन्फॉरमेशन. सूचना अधिकार के द्वारा राष्ट्र अपने नागरिकों को अपनी कार्य और शासन प्रणाली को सार्वजनिक करता है. सूचना का अधिकार का प्रयोग कर भारत में केंद्र व राज्य शासन के किसी भी विभाग से जानकारी घर बैठे प्राप्त करने की पहल के रूप में देखा जाता रहा है. साथ ही सरकार के विभागों के द्वारा सूचना नहीं प्रदान करने पर आवेदक को  सूचना आयोग के समक्ष अपील करने का भी प्रवधान किया गया. लेकिन इस संदर्भ में हाल में किये गये कई चौंकाने वाले खुलासे समाने आये हैं. देश के 19 राज्य में मार्च 2018 के पहले पखवाड़े तक 1.93 लाख द्वितीय अपील एवं शिकायत की अर्जियां लंबित पड़ी हुई हैं. साथ ही जून 2014 बने नये राज्य तेलंगाना में अब तक सूचना आयोग ही नहीं बन पाया है. ऐसे हालात राज्यों के नहीं बल्कि केंद्रीय सूचना आयोग के भी है, जहां लंबित पड़े मामलों की संख्या 23,989 है.

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109 सूचना आयुक्त के पद खाली

वही उत्तरप्रदेश में चालीस हजार 248 मामले और महाराष्ट्र चालीस हजार 248 लंबित है. जबकि झारखंड, बिहार, तथा तमिलनाडु के सूचना आयोग ने अपने यहां मौजूद लंबित मामलों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. देश भर में सूचना आयुक्त के कुल 146 पदों में वर्तमान समय में 109 पद खाली पड़े है. झारखंड की भी मुख्य सूचना आयुक्त के साथ कुल 11 पद है जिसमें वर्तमान समय में 9 पद अभी भी रिक्त है. गुजरात जैसे राज्यों में भी 2018 जनवरी से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है. वही महाराष्ट्र के सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद एक प्रभारी सूचना आयुक्त के जिम्मे चल रहा है.

अपनी वार्षिक रिपोर्ट भी नहीं जारी कर पता सूचना आयोग

सीएचआरआई के स्टेट ऑफ इन्फॉरमेशन कमीशन्स एंड द यूज ऑफ आरटीआई लॉज इन इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश और बिहार के सूचना अयोग का अब तक वेबसाइट नहीं बना है. वही सूचना आयोग को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करनी होती है, जिसमें झारखंड और केरल के सूचना आयोग ने ही अब तक छ: वार्षिक रिपोर्ट जारी की है. वही पंजाब ने पांच वार्षिक रिपोर्ट जारी किये है जबकि आंध्रप्रदेश को चार ही जारी किये गये है. मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश के सूचना आयोग ने अब तक कोई वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं किया है.

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मामलों की निपटारे में त्रिपुरा, नगालैंड तथा मेघालय सबसे आगे

त्रिपुरा, नागालैंड तथा मेघालय के सूचना आयोग में कोई भी मामला निपटारे के लिए लंबित नहीं है. मिजोरम में साल 2016-17 में मात्र एक मामला निपटारे के लिए आया और इस पर फैसला सुना दिया गया. जबकि झारखंड, तमिलनाडु और बिहार में लंबित पड़े मामलों की संख्या यहां के सूचना आयोग के द्वारा सार्वजनिक नहीं किया गया है.

 12 सालों में मिले 2.14 करोड़ आवेदन

पिक

सूचना आयोग के गठन के समय से लेकर 2005-2017 के बीच 12 सालों में आरटीआई की कुल आवेदन 2.14 करोड़ देशभर के आयोग को मिले. जिसमें से कई राज्यों के आयोग के द्वारा कुल प्राप्त आवेदन को सार्वजनिक नहीं किया गया है. अगर उनकी भी संख्या इसमें शमिल की जाये तो ये आंकड़ा 3 करोड़ तक पहुंच सकता है. कानून के लागू होने के बाद से सिर्फ 0.5 प्रतिशत लोगों ने ही इसका प्रयोग किया है.

12 सालों में आयी कुल आरटीआई की अर्जियां

गुजरात        -9.86 लाख

राजस्थान      -8.55 लाख

छत्तीसगढ़    – 6.02 लाख

केरल            -5.73 लाख

हिमाचल प्रदेश -4.24 लाख

पंजाब              -3.60 लाख

हरियाणा         -3.32 लाख

ओड़िशा        -2.85 लाख

महाराष्ट्र       -54.95 लाख

कर्नाटक      -20.73 लाख

केंद्र सरकार को अपने अधिकार-क्षेत्र में आने वाले मुद्दों पर 57.43 लाख अर्जियां 12 साल में मिली हैं.

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