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दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को स्कूल से निकाले जाने पर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा, यह बर्दाश्त के काबिल नहीं

 

 

 

Ranchi Cm takes actions on removing raped minor Student from school

 

 

 

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Ranchi : राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खूंटी के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय से दुष्कर्म पीड़िता को निकाले जाने के मामले में नाराजगी जाहिर की है. इस इस मामले में सीएम ने रविवार को ट्वीट करते हुए खूंटी के डीसी सूरज कुमार को कार्रवाई का निर्देश दिया है.

 

लापरवाही का मामला दोषी अधिकारियों पर हो कड़ी कार्रवाई

 

दुष्कर्म पीड़िता को स्कूल से निकाले जाने के बाद यह मामला सीएम के संज्ञान में आया. जिसके बाद सीएम हेमंत सोरेन ने रविवार को ट्वीट करते हुए डीसी को कहा यह, घोर लापरवाही का मामला है. जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने डीसी को निर्देश दिया कि बच्ची को उचित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराया जाये. और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई कर इस संबंध में मुझे सूचित किया जाये.

 

हेमंत सोरेन को टैग कर इस संबंध में जानकारी दी थी

 

दुष्कर्म पीड़िता को स्कूल से निकाले जाने के बाद इसकी जानकारी अजय वर्मा नाम के एक युवक ने दैनिक अखबार में छपी खबर की कटिंग को ट्विटर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को टैग कर इस संबंध में जानकारी दी थी. अजय वर्मा ने हेमंत सोरेन को टैग करते हुए लिखा है, माननीय मुख्यमंत्री जी ऐसी घटनाओं से मानवता शर्मसार हो रही है. क्या लड़की होना गुनाह है आखिर इसका दोष क्या है?  समय से पहले इस मासूम बच्ची पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. कृपया इस बच्ची के साथ न्याय करें. ऐसी घटनाओं से मानवता शर्मसार हो रही है. कृपया इस बच्ची के साथ न्याय करें.

 

क्या है मामला

 

मिली जानकारी के अनुसार खूंटी की एक नाबालिग के साथ हथियार के बल पर सामूहिक दुष्कर्म किया गया था. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इसके बाद पीड़िता का एडमिशन खूंटी के एक कस्तूरबा विद्यालय में छठी कक्षा में किया गया था. होली में जब पीड़िता के 2 माह की गर्भवती होने की जानकारी स्कूल को मिली तो उसे स्कूल से हटाने का फैसला लिया गया. इस मामले में डीईओ ने एक पत्र बाल संरक्षण पदाधिकारी को लिखा. इसमें कहा गया है कि छात्रा को रखना उचित नहीं. दुष्कर्म पीड़िता के स्कूल में रहने से दूसरी छात्राओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. आवश्यक कार्यवाही की जाए. पत्राचार के दौरान पीड़िता के नाम का भी खुलासा कर दिया गया. जो पोक्सो कानून के खिलाफ है. उधर, सीडब्ल्यूसी ने मामला सामने आने के बाद डालसा के सदस्य सचिव को पत्र लिखकर दो माह की गर्भवती छात्रा के गर्भपात का आदेश मांगा है. साथ ही इस संबंध में खूंटी के डीसी, सिविल सर्जन समेत अन्य अधिकारियों को जानकारी दी गई है.

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