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दुर्भाग्य : स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे पिछड़े 115 जिलों में झारखंड के 24 में से 19 जिले

Kumar Gaurav
Ranchi: रघुवर सरकार एक तरफ झारखंड में विकास की बा़त करती है. हजार दिन और तीन साल पूरे होने का जश्न मनाती है, लेकिन केंद्र के नीति आयोग की रिपोर्ट में झारखंड की कहानी कुछ और बयान करती है. रिपोर्ट ने झारखंड सरकार के सभी दावों के पोल खोल दिए हैं. स्वास्थ्य के पांच आयामों में झारखंड देशभर में सबसे निचले पायदान पर है. रिपोर्ट में आयोग ने देश भर के 115 पिछड़े जिलों को नामांकित किया है. इसमें झारखंड के 24 में से 19 जिले हैं. जहां की सरकार स्वास्थ्य के मामले में सबसे फिसड्डी है, वहां सरकार के विकास के दावे कितने खोखले होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. 

Kumar Gaurav

Ranchi: रघुवर सरकार एक तरफ झारखंड में विकास की बा़त करती है. हजार दिन और तीन साल पूरे होने का जश्न मनाती है, लेकिन केंद्र के नीति आयोग की रिपोर्ट में झारखंड की कहानी कुछ और बयान करती है. रिपोर्ट ने झारखंड सरकार के सभी दावों के पोल खोल दिए हैं. स्वास्थ्य के पांच आयामों में झारखंड देशभर में सबसे निचले पायदान पर है. रिपोर्ट में आयोग ने देश भर के 115 पिछड़े जिलों को नामांकित किया है. इसमें झारखंड के 24 में से 19 जिले हैं. जहां की सरकार स्वास्थ्य के मामले में सबसे फिसड्डी है, वहां सरकार के विकास के दावे कितने खोखले होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. 

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जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टर और मरीज का अनुपात देश में सबसे कम
आए दिन राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में मरीज डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत करते हैं. मरीजों का कहना है कि डॉक्टर्स काफी जल्दबाजी में रहते हैं. मरीज का मर्ज समझने में ज्यादा टाइम नहीं देते. इसका प्रमुख कारण यह है कि जितने मरीज आते हैं उस हिसाब से डॉक्टरों की संख्या बहुत कम है. इस मामले में झारखंड देश के सभी राज्यों से पीछे है. इस मामले में पहले तीन स्थानों पर गोवा, कर्नाटक और पंजाब हैं. 

सभी मरीजों को सरकार नहीं मुहैया करा पाती बेड
प्राथमिक उपचार केंद्र से लेकर राज्य के सबसे बड़े अस्पताल तक सभी जगह जितने मरीज ईलाज के लिए आते हैं उतनी बेड अस्पतालों में है ही नहीं. नतीजा ये होता है कि जिन मरीजों को अस्पताल में एडमिट करने की जरुरत होती है मजबूरीवश उनको भी डॉक्टर दवा देकर घर भेजने को बेबस हो जाते हैं. इस मामले में भी झारखंड अंतिम दो पायदान पर है. इस मामले में सिर्फ यूपी ही झारखंड से आगे है. बिहार भी इस मामले में झारखंड से बेहतर है.

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17 जिलों में स्वास्थ्य स्थिति को परिवर्तन करने की सलाह
देश के सभी राज्यों को स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछड़े जिलों की सूची तैयार कर सौंपी गई है, जिसे राज्यों को पूर्ण रुप से मौजूदा व्यवस्था का परिवर्तन करने को कहा गया है. इस मामले में सभी राज्यों के जिलों की संख्या तैयार की गई है. जिनमें झारखंड के 17 जिलों के नाम हैं. इस मामले में यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के जिलों की संख्या ही झारखंड से ज्यादा है.

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अंडरवेट नवजात बच्चों का भी प्रतिशत सबसे ज्यादा
देशभर में पैदा लेने वाले बच्चों की संख्या जो अंडर वेट हैं, उसमें भी झारखंड की स्थिति देशभर में सबसे फिसड्डी ही है. झारखंड के 47.8 प्रतिशत नवजात बच्चे अंडरवेट ही होते हैं. इस मामले में बिहार के 43.9 प्रतिशत बच्चे अंडरवेट होते हैं, वहीं मध्यप्रदेश में यह मामला 42.8 है. 

झारखंड के इन 19 जिलों को किया गया है शामिल
नीति आयोग ने देश भर के कुल 115 सीडब्डयू जिलों को नामित किया है. जो स्वास्थ्य के मामले में फिसड्डी हैं. इसमें झारखंड के साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, रामगढ़, बोकारो, चतरा, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, खूंटी और रांची शामिल हैं.

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